आंगनवाड़ी केंद्र नाथूसरी चौपटा में बेटियों को गोद लेने वाले तीन दंपतियों को किया सम्मानित, 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' की दिलाई शपथ
mahendra india news, new delhi
राष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य में नाथूसरी चौपटा स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह जानकारी देते हुए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रीना रानी ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना और बालिकाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता लाना रहा। कार्यक्रम में उन परिवारों को विशेष सम्मान दिया गया जिन्होंने बेटियों को गोद लेकर समाज के सामने एक अनूठी मिसाल पेश की है।

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में विशेष रूप से उन तीन दंपतियों को आमंत्रित किया गया, जिन्होंने लड़कियों को गोद लेकर उन्हें अपना नाम और नया जीवन दिया है। केंद्र की ओर से इन दंपतियों किरण व जगदीश, चंद्रकला व हनुमान, राजरानी व राजाराम को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर छोटी बालिकाओं से केक कटवाकर उत्सव मनाया गया। साथ ही केंद्र के बच्चों का जन्मदिन भी सामूहिक रूप से मनाया गया ।
'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान को गति देते हुए उपस्थित सभी महिलाओं और ग्रामीणों को बेटियों को शिक्षित करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की शपथ दिलाई गई। इसके अतिरिक्त, बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए पोस्टरों के माध्यम से जागरूक किया गया। पोस्टरों के जरिए समझाया गया कि बाल विवाह न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि यह एक बेटी के सुनहरे भविष्य की हत्या भी है।
रीना रानी ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान पोषण माह के अंतर्गत 'गोद भराई' की रस्म भी अदा की गई। इसमें गर्भवती महिलाओं की गोद भराई की गई और उन्हें स्वस्थ खान-पान के बारे में जागरूक किया गया। पर्यावरण की सुरक्षा का संदेश देते हुए केंद्र परिसर में पौधरोपण भी किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न लाभकारी योजनाओं जैसे 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना', 'आपकी बेटी-हमारी बेटी' और 'सुकन्या समृद्धि योजना' के बारे में विस्तार से बताया ताकि पात्र परिवार इनका लाभ उठा सकें।
इस अवसर पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रीना रानी ने कहा कि आज बेटियां हर क्षेत्र में बेटों से आगे निकल रही हैं। हमारा उद्देश्य न केवल केंद्र पर बच्चों को पोषण देना है, बल्कि समाज की सोच में बदलाव लाना भी है। जब समाज बेटियों को गोद लेने वाले दंपतियों का सम्मान करेगा, तभी सही मायनों में लैंगिक समानता आएगी। हम हर घर तक यह संदेश पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि बेटी है तो कल है। इस दौरान आंगनवाड़ी सहायिका सरोज रानी, आशा वर्कर बबीता, अध्यापिका संतोष, सीमा, सहित ग्रामीण महिलाएं काजल, छाया , पिंकी, सुलोचना, प्रीति व बच्चे मौजूद रहे ।
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