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गांव रूपावास के दो स्वतंत्रता सेनानी मौजी राम व भागू राम पूनिया ने स्वतंत्रता संग्राम में लिया भाग

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Two freedom fighters from village Rupawas, Mauji Ram and Bhagu Ram Poonia, took part in the freedom struggle

 mahendra india news, new delhi

SIRSA गांव रूपावास ऐतिहासिक महत्व का गांव है। करीब 295 साल पहले बसा यह रूपावास गांव फौजियों के गांव के रूप में प्रख्यात है। रूपावास गांव से करीब 75 युवा फौज में भर्ती होकर मातृभूमि की रक्षा कर रहे हैं। करीबन 20 से अधिक सैनिक सेवानिवृत्त हो चुके हैं। गांव में दो स्वतंत्रता सेनानियों मौजी राम व भागू राम पूनिया ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया था। गांव के मनीराम ढिल्लों ने MLA बनकर हलके की सेवा की है। 4700 के करीब आबादी वाले इस गांव का रकबा करीब 4375 एकड़ है व 2800 मतदाता है। गांव में माहौल धार्मिकता से सराबोर शांतिपूर्वक व सौहार्दपूर्ण है। ग्रामीण राजस्थानी बागड़ी बोली बोलते हैं। करीब 295 वर्ष पहले यहां औलख व चूरनियां गोत्र के लोगों ने आकर डेरा डाला। पहले चौ. रूपाराम के नाम से इस जगह को रूपराम वाला बास कहा जाता था बाद में समय गुजरने के बाद गांव का नाम रूपावास पड़ गया।



गांव में कई धार्मिक स्थल गांव में कई धार्मिक स्थल हैं। जिनमें भगवान विष्णु मन्दिर, जाहरवीर गोगाजी की गोगामेड़ी, शनिदेव मन्दिर है जिसमें सभी गांव के लोग पूजा अर्चना करते हैं। राधास्वामी आश्रम दिनोद की शाखा भी गांव में हैं । गांव में बाबा गोपालपुरी का आश्रम व मंदिर बना हुआ है, जिसके प्रति लोगों की अटूट आस्था है।


पहले गांव के पास थी 12 हजार बीघा जमीन गांव की सबसे पहले 12000 बीघा जमीन थी परंतु बाद में रायपुर व जोड़कियां गांव बसने के कारण जमीन बंट गई। गांव मे धीरे धीरे ढिल्लों, पूनिया, कासनिया, जेवलिया, गजरोइया, भांभू, ढूकिया, भिढ़ासरा, फगेड़िया, राजपूत, सिहाग, ढाका, महला, कड़वासरा सहित अनेक गोत्रों के लोग आकर बस गये। गांव की 70 प्रतिशत आबादी जाट है।
 

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