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ओटीटी प्लेटफॉर्म और पारंपरिक सिनेमा एवं मीडिया साक्षरता विषय पर दो व्याख्यानों का आयोजन

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Two lectures were organised on OTT platforms and traditional cinema and media literacy

mahendra india news, new delhi
चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के यूनिवर्सिटी स्कूल फॉर ग्रेजुएट स्टडीज (यूएसजीएस) के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में ओटीटी प्लेटफॉर्म और पारंपरिक सिनेमा एवं मीडिया साक्षरता विषय पर दो व्याख्यानों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को बदलते मीडिया परिदृश्य की गहन समझ प्रदान करना और डिजिटल युग में उनकी विश्लेषणात्मक क्षमता को सुदृढ़ करना रहा।


इस संबंध में जानकारी देते हुए यूएसजीएस के डीन प्रोफेसर मोहम्मद काशिफ किदवई ने बताया कि यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल सूचना प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी सत्यता और संदर्भ को समझना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे मीडिया के प्रति सजग दृष्टिकोण अपनाएं और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए एक जागरूक पत्रकार की भूमिका निभाएं।


प्रथम व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रोफेसर सेवा सिंह बाजवा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म ने मनोरंजन और सूचना प्रसार के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव लाए हैं। उन्होंने पारंपरिक सिनेमा और ओटीटी के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए बताया कि जहां सिनेमा सामूहिक अनुभव का माध्यम है, वहीं ओटीटी व्यक्तिगत और ऑन-डिमांड मनोरंजन का सशक्त प्लेटफॉर्म बन चुका है।

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प्रोफेसर बाजवा ने कहा कि आज कंटेंट ही असली शक्ति है और जो रचनात्मकता के साथ प्रामाणिकता को जोड़ता है, वही दर्शकों के दिलों तक पहुंचता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे केवल दर्शक बनकर न रहें, बल्कि कंटेंट क्रिएटर के रूप में अपनी पहचान स्थापित करें। साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर स्वतंत्रता के साथ-साथ जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है, इसलिए नैतिक मूल्यों और सामाजिक सरोकारों को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए।

चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के यूनिवर्सिटी स्कूल फॉर ग्रेजुएट स्टडीज (यूएसजीएस) के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में ओटीटी प्लेटफॉर्म और पारंपरिक सिनेमा एवं मीडिया साक्षरता विषय पर दो व्याख्यानों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को बदलते मीडिया परिदृश्य की गहन समझ प्रदान करना और डिजिटल युग में उनकी विश्लेषणात्मक क्षमता को सुदृढ़ करना रहा। इस संबंध में जानकारी देते हुए यूएसजीएस के डीन प्रोफेसर मोहम्मद काशिफ किदवई ने बताया कि यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल सूचना प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी सत्यता और संदर्भ को समझना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे मीडिया के प्रति सजग दृष्टिकोण अपनाएं और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए एक जागरूक पत्रकार की भूमिका निभाएं। प्रथम व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रोफेसर सेवा सिंह बाजवा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म ने मनोरंजन और सूचना प्रसार के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव लाए हैं। उन्होंने पारंपरिक सिनेमा और ओटीटी के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए बताया कि जहां सिनेमा सामूहिक अनुभव का माध्यम है, वहीं ओटीटी व्यक्तिगत और ऑन-डिमांड मनोरंजन का सशक्त प्लेटफॉर्म बन चुका है। प्रोफेसर बाजवा ने कहा कि आज कंटेंट ही असली शक्ति है और जो रचनात्मकता के साथ प्रामाणिकता को जोड़ता है, वही दर्शकों के दिलों तक पहुंचता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे केवल दर्शक बनकर न रहें, बल्कि कंटेंट क्रिएटर के रूप में अपनी पहचान स्थापित करें। साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर स्वतंत्रता के साथ-साथ जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है, इसलिए नैतिक मूल्यों और सामाजिक सरोकारों को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए। दूसरे व्याख्यान में विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमित सांगवान ने विद्यार्थियों को डिजिटल युग की चुनौतियों और मीडिया की सूक्ष्मताओं से परिचित करवाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय “सूचना विस्फोट” का युग है, जहां हर व्यक्ति के हाथ में स्मार्टफोन होने के कारण वह स्वयं एक प्रकाशक बन चुका है। डॉ. सांगवान ने ‘फेक न्यूज’ के खतरों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज सूचनाओं की अधिकता है, लेकिन सत्यता की कमी है। उन्होंने विद्यार्थियों को आगाह किया कि किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच करना एक जिम्मेदार नागरिक का प्रथम कर्तव्य है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मीडिया साक्षरता का अर्थ केवल तकनीक का ज्ञान नहीं, बल्कि सूचना के पीछे छिपे एजेंडे और उसके प्रभाव को समझने की क्षमता विकसित करना है। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने विषय से संबंधित जिज्ञासाएं प्रस्तुत कीं, जिनका विशेषज्ञों द्वारा विस्तारपूर्वक समाधान किया गया। इस अवसर पर विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. कृष्ण कुमार, डॉ. विकास कुमार तथा डॉ. टिम्सी मेहता सहित छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
दूसरे व्याख्यान में विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमित सांगवान ने विद्यार्थियों को डिजिटल युग की चुनौतियों और मीडिया की सूक्ष्मताओं से परिचित करवाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय “सूचना विस्फोट” का युग है, जहां हर व्यक्ति के हाथ में स्मार्टफोन होने के कारण वह स्वयं एक प्रकाशक बन चुका है।


डॉ. सांगवान ने ‘फेक न्यूज’ के खतरों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज सूचनाओं की अधिकता है, लेकिन सत्यता की कमी है। उन्होंने विद्यार्थियों को आगाह किया कि किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच करना एक जिम्मेदार नागरिक का प्रथम कर्तव्य है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मीडिया साक्षरता का अर्थ केवल तकनीक का ज्ञान नहीं, बल्कि सूचना के पीछे छिपे एजेंडे और उसके प्रभाव को समझने की क्षमता विकसित करना है।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने विषय से संबंधित जिज्ञासाएं प्रस्तुत कीं, जिनका विशेषज्ञों द्वारा विस्तारपूर्वक समाधान किया गया। इस अवसर पर विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. कृष्ण कुमार, डॉ. विकास कुमार तथा डॉ. टिम्सी मेहता सहित छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।