सरसों की बंपर पैदावार चाहिए? बुवाई से पहले जान लें ये 5 जरूरी बातें
mahendra india news, new delhi
सरसों की बिजाई का सीजन शुरू हो गया है। किसान सरसों की बिजाई की तैयारियां में लग गये हैं। सरसों का अधिक उत्पादन हो, इसके लिए किसान क्या करें। इसकी जानकारी नीचे दी गई है। सरसों की खेती में अधिक फायदा लेने के लिए सही समय पर बुवाई, उन्नत किस्मों का चुनाव, संतुलित खाद-उवर्रक (विशेषकर सल्फर) और समय पर सिंचाई करना सबसे जरूरी है।
सरसों की खेती से बंपर पैदावार और मुनाफा प्राप्त करने के महत्वपूर्ण तरीके नीचे दिए गए हैं:
सरसों की फसल से अच्छी पैदावार लेने के लिए सिर्फ अच्छा बीज डालना ही काफी नहीं है. बुवाई का सही समय, खेत की तैयारी, बीज की मात्रा, पौधों के बीच दूरी और खाद का सही इस्तेमाल भी उतना ही जरूरी है. जरा सी लापरवाही से फसल की बढ़वार और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं. अगर किसान शुरुआत से ही इन 6 जरूरी बातों का ध्यान रखें, तो सरसों की फसल को बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकता है और लागत के मुकाबले अच्छा मुनाफा लेने की संभावना बढ़ सकती है.
1. सही समय पर बुवाई
सरसों की बुवाई के लिए 5 अक्टूबर से 25 अक्टूबर के बीच का समय सबसे अच्छा माना जाता है। बुवाई तब शुरू करें जब दिन का तापमान 32एष्ट से नीचे आ जाए। समय पर बुवाई करने से फसल की बढ़वार अच्छी होती है और माहू (चम्पा) या फंगस जैसी बीमारियों का खतरा कम रहता है।
2. उन्नत एवं हाइब्रिड किस्मों का चुनाव
अच्छी पैदावार देने वाली किस्मों का चयन करें, जैसे: पायनियर 45S46, RH-30, पूसा बोल्ड या अन्य प्रमाणित हाइब्रिड किस्में।
• बीज उपचार: बुवाई से पहले बीजों को कार्बेन्डाजिम (बाविस्टिन) या ट्राइकोडर्मा से जरूर उपचारित करें, जिससे पौधे जड़ गलन और फंगस से सुरक्षित रहें।
3. खेत की तैयारी और बीज की मात्रा
खेत की 2 से 3 बार गहरी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा और समतल बना लें।
• बीज दर: प्रति एकड़ करीब 1 से 1.5 किलो बीज पर्याप्त होता है। कतार से बुवाई करें (पंक्ति की दूरी 1.5 फुट और पौधे की दूरी 15-20 सेमी रखें)। छितराकर बुवाई करने से बीज ज्यादा खर्च होता है और गुड़ाई-निराई में परेशानी आती है।
4. संतुलित खाद और सल्फर का प्रयोग
अंतिम जुताई के समय डीएपी, एनपीके या सिंगल सुपर फॉस्फेट के साथ पोटाश का प्रयोग करें।
• सल्फर का महत्व: सरसों तिलहनी फसल है, इसलिए बेंटोनाइट सल्फर (10 से 15 किलो प्रति एकड़) बुवाई के समय या पहली यूरिया के साथ अवश्य डालें। सल्फर से दानों में तेल की मात्रा 2त्न से 3त्न तक बढ़ जाती है, जिससे बाजार में भाव 500 से 700 रुपये क्विंटल तक ज्यादा मिल सकता है।
5. सिंचाई एवं कीट प्रबंधन
पहली सिंचाई: बुवाई के 30 से 35 दिन बाद (फूल आने से पहले) पहली सिंचाई करें। ध्यान रखें कि फूल आते समय सिंचाई न करें।
दूसरी सिंचाई: दाने बनते समय (70 से 80 दिन की अवस्था पर) आवश्यकतानुसार दूसरी सिंचाई करें।
कीट और रोग नियंत्रण: माहू (चम्पा) या सफेद रस्ट (तना गलन) के लक्षण दिखने पर तुरंत कृषि विशेषज्ञों की सलाह से उचित कीटनाशक या नीम के तेल का छिडक़ाव करें।
