home page

हम सभी दुनियावी यात्रा में सहयात्री हैं, पर ना हमें यात्रा की अवधि पता है ना रास्तों का : स्वामी आत्मानंद

 | 
We are all fellow travelers on this worldly journey, but we neither know the duration of the journey nor the paths: Swami Atmanand
mahendra india news, new delhi

 जैसे कहीं सफर पर जाते हुए यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए सामान का बोझ कम रखते हैं, वैसे ही जीवन रूपी यात्रा तय करते हुए कामनाओं व विकारों का बोझ कम से कम होना चाहिए ताकि जीवन यात्रा आनंदमय बन सके। हम सभी इस दुनियावी यात्रा में सहयात्री हैं, फर्क इतना है कि ना हमें यात्रा की अवधि का पता है ना रास्तों का। अतः आपसी मन मुटाव कलह क्लेश ना रख कर जीवन का सफर तय करना चाहिए। उक्त प्रवचन शिव शक्ति योग मिशन सिरसा द्वारा सेक्टर स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन महामंडलेश्वर स्वामी आत्मानंद पुरी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहे।

 

 

स्वामी आत्मानंद पुरी ने 10वें स्कंद की चर्चा करते हुए कहा कि यह स्कंद भगवान का हृदय है और इसमें भगवान कृष्ण के बचपन की मधुर लीलाएं, गोपी खेल और उनके मानवीय और दिव्य स्वरूप का चित्रण है। सबके रूप रंग आकृति अलग-अलग है पर आत्मा में कोई भेद नहीं है सब में एक ही आत्मा है. स्वामी जी ने विद्या और अविद्या का अंत्र समझाया कि विद्या का अर्थ आध्यात्मिक ज्ञान  ब्रह्म ज्ञान जो हमें समस्त बंधनों से मुक्त करती है और मोक्ष प्राप्त होता है और अविद्या या अज्ञान मिथ्या ज्ञान है जो वास्तविकता को न जान कर सांसारिक माया में फंसे रहने की स्थिति है। उन्होंने कहा कि भगवान लीलाओं के माध्यम से धर्म, ज्ञान और वैराग्य का संदेश देते हैं स्वामी जी ने बताया कि देवता 33 है बाकी उनके रूप हैं और मुख्य रूप से पंचदेव गणेश जी, महादेव जी, विष्णु जी, सूर्य देव और मां दुर्गा हैं जिन्हें सृष्टि का आधार माना जाता है।

भक्ति और ज्ञान मोक्ष प्राप्ति के दो भिन्न लेकिन पूरक मार्ग है ज्ञान बुद्धि तारक और आत्म साक्षात्कार पर आधारित है जबकि भक्ति भावना प्रेम और ईश्वर के प्रति समर्पण पर आधारित है ज्ञान शुष्क हो सकता है लेकिन भक्ति में प्रेम की प्रधानता होती है और दोनों के समन्वय से ही पूर्णता प्राप्त होती है। आज की कथा में भगवान कृष्ण व रुकमणी विवाह का आयोजन किया गया।

WhatsApp Group Join Now

कथा में नत्थू राम गर्ग सुशील गोयल, मदन लाल गुप्ता, निर्मल कंदोई, विश्व बंधु गुप्ता, योगेश गर्ग, सुमन मित्तल, सुभाष जिंदल, रमेश जमालिया, अमित कुमार, डॉक्टर एसएल अग्रवाल, किशन कुमार, कीर्ति बंसल, सुरेश बंसल, गीतांश शर्मा, ओम प्रकाश शर्मा, उजाला राम, हीमेश गर्ग, इंद्रपाल नैन, पवन शर्मा, दिनेश गर्ग, सुभाष खेतड़ी वाला, जीतराम, भीम जिंदल, बठिंडा से राज बंसल व सुरेन्द्र सांवरिया, डा. सुरेश मित्रा उपस्थित रहे। भागवत जी व कृष्ण रुकमणी की आरती व प्रसाद वितरण के साथ कथा तीसरे दिन की कथा समाप्त हुई।