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बेटी के जन्म पर करवाया कुआं पूजन, बेटी बोझ नहीं, घर का चिराग है: तरूण भाटी/बबीता

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Well worship was done on the birth of daughter, daughter is not a burden, she is the lamp of the house: Tarun Bhati/Babita

mahendra india news, new delhi
सिरसा। बेटी बचाने के लिए बदलाव दिखने लगा है। बेटी होने पर अब मातम नहीं पसरता, बल्कि खुशी के ढोल बजते हैं। ये बदलाव की बयार है। बेटी बोझ नहीं, घर का चिराग है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का ही असर है कि शहर के बेगू रोड निवासी तरूण भाटी ने बेटी पैदा होने पर कुआं पूजन कर जश्न मनाया।

यही नहीं आस पड़ोस के लोगों को भोजन करवाया और ढोल-नगाड़ों के साथ बेटी के जन्म की खुशी मनाई गई। तरूण भाटी ने कहा कि बेटियां अब बोझ नहीं रही। अब लोगों की सोच में फर्क आ गया है। बेटी के पैदा होने पर बेटे की मानिंद नाच-गाकर जश्न मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आज लडक़ों के बराबर लडक़ी को समझा जाने लगा है।

किसी भी प्रकार से बेटा-बेटी में भेदभाव नहीं होना चाहिए। भाटी ने कहा कि पहले बेटा पैदा होने पर कुआं पूजन कर खुशी मनाई जाती थी, लेकिन समय के साथ-साथ लोगों की सोच में बदलाव आया आर अब लोग बेटा-बेटी में फर्क नहीं समझते। लडक़ा-लडक़ी में फर्क नहीं है, फर्क सिर्फ  सोच में है। नवजात कन्या दिव्यांशी भाटी की माता बबीता ने कहा कि सरकार की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना से समाज में काफी बदलाव आया है। समाज में लड़कियों के प्रति नकारात्मक सोच में बदलाव आया है

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और समाज अब बेटियों को बेटों के बराबर ही मान-सम्मान व दुलार देने लगा है। उन्होंने कहा कि बेटी को भी अगर सही परवरिश व संस्कार दिए जाएं तो वह बेटे की भांति परिवार का नाम रोशन कर सकती है। इस मौके पर सुमित्रा देवी, सुषमा रानी, लता देवी, कीर्ति देवी, पूजा शीतल, मीनू, सुनीता, मोना, सरोज देवी, सुमन देवी, आशा देवी, मुस्कान, याशिका, एडवोकेट भारती, सुखप्रीत, यामिनी मेहता, स्वर्ण कौर, राजकुमार, अनिल कुमार, संदीप कुमार, मिहिर कुमार, पुनीत भाटी, विनय भाटी, सूरजभान, प्रणव कुमार, गुरवेश सिवाच सहित अन्य परिवार के सदस्य उपस्थित थे।