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लीवर रोग क्या है? इसके कारण, लक्षण, आयुर्वेदिक उपचार की पूरी जानकारी पढ़े

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आज कल लीवर खराब होने की सबसे बड़ी परेशानी आ रही है। लीवर के रोगी बढ़ते जा रहे हैं। अस्पताल के अंदर ओपीडी में मरीज लीवर के भी ज्यादा आ रहे हैं। लीवर हमारे शरीर के सबसे अहम अंगों में से एक है। यह भोजन को पचाने, पोषक तत्वों का सही इस्तेमाल करने, ऊर्जा को जमा करके रखने और कुछ हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने का काम करता है। जब लिवर अपना काम ठीक से नहीं कर पाता, तो उसका असर धीरे-धीरे पूरे शरीर पर पडऩे लगता है। शुरुआत में अक्सर कोई साफ लक्षण नहीं दिखते, इसलिए लोग इसे सामान्य थकान या खान-पान की गड़बड़ी मानकर टाल देते हैं।

चिकित्सक डा. संदीप कुमार ने बताया कि आजकल अनियमित खान-पान, बढ़ता वजन, कम शारीरिक गतिविधि और शराब का सेवन लिवर की सेहत बिगाडऩे के मुख्य कारण माने जाते हैं। वायरल हेपेटाइटिस जैसी बीमारियां भी लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए लिवर के प्रति सजग रहना और किसी भी लगातार बनी रहने वाली समस्या को हल्के में न लेना बहुत जरूरी है


लिवर रोग क्या है?
उन्होंने बताया कि लिवर रोग ( यकृत रोग ) ऐसी स्थितियों का एक समूह है जिसमें लिवर की सामान्य संरचना या उसके काम करने की क्षमता प्रभावित होती है। इसकी वजह संक्रमण, शरीर में वसा का अधिक जमा होना, लंबे समय तक शराब का सेवन, कुछ स्वास्थ्य समस्याएं या फिर अन्य कारण भी हो सकते है।

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लिवर रोग कैसे प्रभावित करता है?
डा. संदीप कुमार ने बताया कि जब लिवर पर लगातार दबाव बना रहता है तो उसकी सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। समस्या बढऩे पर थकान, भूख में कमी, पेट मे असहजता या त्वचा और आंखों में पीलापन जैसे संकेत दिखाई दे सकते है। अगर आप भी लिवर को लेकर परेशान हैं, तो इसे नजऱअंदाज़ न करें। समय रहते

ये हैं कारण, व्यक्ति की जीवनशैली, खान-पान और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं भी इसमें अपनी भूमिका निभा सकती है।
1. असंतुलित खानपान
बहुत अधिक तला हुआ भोजन, पैकेट वाले खाद्य पदार्थ, अधिक चीनी और जरूरत से ज्यादा कैलोरी, ये सब लंबे समय मे वजन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते है। इससे लिवर में वसा जमा होने की संभावना भी बढ़ जाती है, जिसे लिवर रोग के कारणों में से एक माना जाता है।

2. शराब और धूम्रपान
लंबे समय तक अधिक मात्रा मे शराब का सेवन लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। धूम्रपान भी शरीर पर कई तरह का दबाव डालता है। इसलिए लिवर की देखभाल करते वक्त इन दोनों आदतों से दूरी बनाए रखना बहुत जरूरी माना जाता है।

3. मोटापा और जीवनशैली
कम शारीरिक गतिविधि और बढ़ता हुआ वजन फैटी लिवर से जुड़ी समस्या का खतरा बढ़ा सकते है। मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप 2 डायबिटीज ये सब फैटी लिवर से जुड़े अहम कारक माने जाते है।

4. अन्य सेहत समस्याएं
हेपेटाइटिस क्च और ष्ट जैसे वायरल संक्रमण अगर लंबे समय तक बने रहें, तो लिवर में गंभीर बदलाव ला सकते हैं। कुछ ऑटोइम्यून स्थितियां और कुछ दवाओं या पदार्थों का गलत उपयोग भी लिवर इंफेक्शन का कारण बन सकते हैं।

लिवर रोग के सामान्य लक्षण क्या हैं?
लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। कुछ लोगों में शुरुआती अवस्था में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते।
1. शुरुआती लक्षण
शुरुआती संकेतों में लगातार थकान, भूख कम लगना, मतली, वजन में बदलाव और पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में हल्की परेशानी शामिल हो सकती है।

लिवर खराब होने के लक्षण कई बार धीरे धीरे सामने आते हैं। इसलिए केवल तेज दर्द को ही लिवर की समस्या का संकेत मानना सही नहीं है।

2. इसी के साथ ही समस्या बढऩे पर त्वचा और आंखों में पीलापन, पैरों में सूजन, पेट में पानी जमा होना, आसानी से खून आना या शरीर पर नीले निशान पडऩा जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। कुछ गंभीर मामलों में भ्रम या सोचने में परेशानी भी हो सकती है।

यदि ऐसे संकेत दिखाई दें, तो घर पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत चिकित्सक विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

लिवर रोग कितने प्रकार के होते हैं?
लिवर से जुड़ी समस्या कई रूपों में सामने आ सकती है। इसके कुछ प्रमुख प्रकार नीचे बताए गए है।

1. फैटी लिवर
फैटी लिवर में लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा वसा जमा हो जाती है। यह स्थिति कई बार बिना किसी साफ लक्षण के ही बनी रहती है। वजन का अधिक होना और मेटाबॉलिक समस्याएं इसका खतरा बढ़ा सकती हैं।

2. हेपेटाइटिस
हेपेटाइटिस का मतलब होता है लिवर में सूजन। यह वायरस, शराब, कुछ दवाओं या अन्य कारणों से भी हो सकता है। 

भारत में भी वायरल हेपेटाइटिस एक बड़ी सेहत परेशानी बनी हुई है। इसलिए अगर लगातार कमजोरी, पीलापन या संक्रमण का शक हो तो जांच कराना जरूरी हो जाता है।

3. लिवर सिरोसिस
सिरोसिस में लिवर के स्वस्थ ऊतक की जगह धीरे धीरे निशान वाला ऊतक बनने लगता है। लंबे समय तक चलने वाली शराब से जुड़ी लिवर समस्या, फैटी लिवर और क्रॉनिक हेपेटाइटिस, ये कुछ इसके संभावित कारण हो सकते है। हृढ्ढष्ठष्ठ्य के अनुसार सिरोसिस में स्कार टिश्यू लिवर के अंदर खून के बहाव को भी धीरे धीरे प्रभावित करने लगता है।

4. लिवर फेलियर
जब लिवर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होकर अपना सामान्य काम नहीं कर पाता तब इसे लिवर फेलियर कहा जाता है। यह एक गंभीर स्थिति होती है और इसमें तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सा देखभाल जरूरी हो जाती है।

लिवर संबंधी समस्या की पहचान कैसे की जाती है?
कई बार सिर्फ लक्षणों से समस्या की सही पहचान नहीं हो पाती है। डॉक्टर व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री, खान पान, वजन, शराब के सेवन और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं को समझने की कोशिश करते है।
 
    
   
लिवर रोग में खान-पान कैसा होना चाहिए?
खान-पान लिवर की देखभाल का एक बड़ा हिस्सा होता है। भोजन व्यक्ति की स्थिति, वजन और अन्य स्वास्थ्य जरूरतों के हिसाब से ही तय होना चाहिए।

कौन से खाद्य पदार्थ शामिल करें?
मौसमी फल और सब्जियां
हरी पत्तेदार सब्जियां
साबुत अनाज
पर्याप्त फाइबर वाला भोजन
जरूरत के अनुसार दाल और अन्य पौधों से मिलने वाला प्रोटीन
पर्याप्त पानी
भोजन जितना ताजा, हल्का और संतुलित रखा जाए, उतना ही बेहतर रहता है।

किन चीजों से बचना चाहिए?
शराब
बहुत अधिक तला और पैकेट वाला भोजन
जरूरत से ज्यादा चीनी
अधिक नमक
बहुत अधिक कैलोरी वाला भोजन
बिना सलाह के हर्बल या सप्लीमेंट उत्पाद


आयुर्वेद में भी भोजन को व्यक्ति की प्रकृति, पाचन और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार रखने पर जोर दिया जाता है। आहार को व्यक्ति की जरूरत और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार समझने पर ध्यान दिया जाता है। इसलिए सही आहार का चुनाव लिवर की देखभाल और शरीर के संतुलन को बनाए रखने में सहायक हो सकता है।

आयुर्वेद की पारंपरिक प्रक्रियाओं का एक समूह होता है। इसमें वमन, विरेचन, बस्ती, नस्य और रक्तमोक्षण जैसी प्रक्रियाएं आती है। हर व्यक्ति के लिए हर प्रक्रिया सही नहीं होती है। इसलिए लिवर से जुड़ी समस्या में पंचकर्म किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की जांच और सलाह के बाद ही लेना चाहिए। गंभीर लिवर बीमारी में इसे खुद से शुरु करना सही नहीं माना जाता।