World Clubfoot Day: जिला नागरिक अस्पताल सिरसा में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन, अब तक 99 बच्चे हुए पूरी तरह ठीक
mahendra india news, new delhi
विश्व क्लबफुट दिवस के अवसर पर जिला नागरिक अस्पताल SIRSA में अनुष्का फाउंडेशन के सहयोग से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को क्लबफुट (पैर टेढ़े होने की जन्मजात समस्या) के प्रति जागरूक करना और समय पर इसके इलाज के महत्व को समझाना था।
कार्यक्रम में उपस्थित जिला नागरिक अस्पताल के डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. संदीप ने बताया कि क्लबफुट एक जन्मजात विकृति है। यदि जन्म के तुरंत बाद इसका सही उपचार शुरू कर दिया जाए, तो बच्चा पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकता है। उन्होंने बताया कि नागरिक अस्पताल सिरसा में हर मंगलवार को क्लबफुट से पीड़ित बच्चों का इलाज पूरी तरह निःशुल्क किया जाता है। अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. कमल बेनीवाल द्वारा विशेष तकनीक से बच्चों के पैरों पर प्लास्टर किया जाता है। इसके साथ ही, अनुष्का फाउंडेशन की ओर से बच्चों को विशेष जूते और ब्रेस भी मुफ्त उपलब्ध कराए जाते हैं। अस्पताल में अब तक 99 बच्चों का सफल इलाज किया जा चुका है, जो आज सामान्य बच्चों की तरह दौड़-भाग रहे हैं।
इस अवसर पर डीईआईसी (DEIC) मैनेजर डॉ. अंकुर ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) की उपलब्धियों को साझा करते हुए बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान आरबीएसके के तहत जिले के 83 बच्चों का विभिन्न गंभीर बीमारियों के लिए पूरी तरह निःशुल्क उपचार करवाया गया है। इन बीमारियों में जन्मजात हृदय रोग (CHD), भेंगापन (Squint), न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट (NTD), कटे होंठ व तालू (Cleft Lip & Palate) और सुनने की अक्षमता (Hearing Impairment) जैसी जटिल समस्याएं शामिल हैं।
डॉ. अंकुर ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि सिरसा जिले में इस समय 11 मोबाइल हेल्थ टीमें (Mobile Health Teams) पूरी तरह सक्रिय हैं। ये टीमें रोजाना विभिन्न स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों (AWC) का दौरा कर बच्चों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग करती हैं, ताकि किसी भी बीमारी या जन्मजात विकृति की समय रहते पहचान की जा सके और पीड़ित बच्चों को डीईआईसी के माध्यम से तुरंत इलाज मुहैया कराया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान नोडल ऑफिसर डॉ. भारत भूषण ने भी अभिभावकों से अपील की कि यदि नवजात शिशु के पैरों में किसी भी तरह की असामान्यता दिखे, तो उसे छिपाने के बजाय तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करें। सही समय पर लिया गया डॉक्टरी परामर्श बच्चे को दिव्यांगता से बचा सकता है।
इस जागरूकता कार्यक्रम के दौरान नोडल ऑफिसर डॉ. भारत भूषण, फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. विनोद, डीईआईसी मैनेजर डॉ. अंकुर, संजय (आरबीएसके कोऑर्डिनेटर), पवन (साइकॉलॉजिस्ट), सुशीला (अर्ली इंटरवेंशनिस्ट), एएनएम प्रवीण, चिराग (डीईओ) तथा अनुष्का फाउंडेशन से मि. राजेंद्र कुमार सहित डीईआईसी का अन्य स्टाफ व बच्चों के अभिभावक मुख्य रूप से मौजूद रहे।
