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जे सी डी मंदिर में होगा गणपति महाराज का भव्य स्वागत, महाराष्ट्र की गणपति परंपरा की झलक के साथ गूंजेगा गणपति बप्पा मोरया का जयघोष

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A grand welcome awaits Lord Ganesha at the JCD Temple; the chant of "Ganpati Bappa Morya" will resound amidst a showcase of Maharashtra's Ganesha traditions

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जे सी डी सिरसा में गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर, सोमवार को श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर भगवान श्री गणेश की विधि-विधान से स्थापना एवं पूजा-अर्चना की जाएगी। मंदिर में गणपति महाराज के आगमन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।


प्रबल महाराज के शिष्य आचार्य धनराज तिवारी ने बताया कि सनातन परंपरा में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश का पूजन करने की परंपरा है। गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से सुख-समृद्धि, बुद्धि और शुभता की प्राप्ति होने की धार्मिक मान्यता है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी का पर्व विशेष भव्यता के साथ मनाया जाता है। गणपति बप्पा के आगमन पर श्रद्धालु ढोल-ताशों और जयघोष के साथ उनका स्वागत करते हैं।

घरों एवं सार्वजनिक पंडालों में गणपति महाराज को विराजमान कर कई दिनों तक पूजा-अर्चना की जाती है। ह्लगणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरयाह्व के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। इसी श्रद्धा और उत्साह की भावना के साथ सूर्य कुंड मंदिर में भी गणपति महाराज का स्वागत किया जाएगा। आचार्य धनराज तिवारी ने गणेश जी की पौराणिक कथा बताते हुए कहा कि माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से गणेश जी की रचना की थी। माता की आज्ञा का पालन करते हुए गणेश जी ने भगवान शिव को भी उनके स्नान कक्ष में प्रवेश करने से रोक दिया।

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इसके बाद भगवान शिव और गणेश जी के बीच युद्ध हुआ और भगवान शिव ने गणेश जी का मस्तक अलग कर दिया। माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने गणेश जी को हाथी का मस्तक लगाकर पुनर्जीवन प्रदान किया तथा उन्हें प्रथम पूज्य होने का आशीर्वाद दिया। गणेश चतुर्थी के दिन श्रद्धालु भगवान गणेश को दूर्वा, सिंदूर, पुष्प, मोदक एवं लड्डू अर्पित कर पूजा करेंगे। गणपति महाराज से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और सभी विघ्नों के निवारण की प्रार्थना की जाएगी। इस वर्ष चतुर्थी तिथि 14 सितंबर सुबह 7:06 बजे से 15 सितंबर सुबह 7:44 बजे तक रहेगी।

गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक रहेगा। गणेश उत्सव का समापन 25 सितंबर, अनंत चतुर्दशी को गणपति विसर्जन के साथ होगा। आचार्य धनराज तिवारी ने श्रद्धालुओं से गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर मंदिर में पहुंचकर भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने और धार्मिक आयोजन में सहभागी बनने का आह्वान किया।