पंडित होशियारी लाल शर्मा की पांचवीं पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब, हजारों लोगों ने नम आंखों से अर्पित किए श्रद्धासुमन
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पंडित होशियारी लाल शर्मा की पांचवीं पुण्यतिथि पर गुरुवार को सिरसा के रिद्धि-सिद्धि रिसोर्ट में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में रक्त एकत्रित हुआ। दोपहर 11 से साढ़े भजन संकीर्तन किया गया। इसके उपरांत प्रसाद ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन हुआ। सभा में पहुंचे हजारों लोगों ने नम आंखों से पंडित होशियारी लाल शर्मा को अपने श्रद्धासुमन अॢपत किए। उनकी यह श्रद्धांजलि सभा समाजसेवा, आध्यात्म का एक अनूठा संगम बन गई और इस
दौरान सभी ने पंडित जी की सादगी, कार्यशैली, स्वभाव एवं संस्कारों की प्रशंसा की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि पंडित होशियारी लाल शर्मा सिरसा की राजनीति का एक सशक्त हस्ताक्षर थे। उन्होंने ताउम्र कांगे्रस में रहते हुए आम आदमी आवाज को बुलंद किया। जब भी किसी आमजन पर कोई आंच आई तो होशियारी लाल शर्मा संघर्ष की कतार में पहली पंक्ति में खड़े हुए नजर आए। उनका जीवन हमें सादगी, संस्कार एवं सेवाभाव की प्रेरणा देता है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बडोली ने कहा कि राजनीति में आज सिद्धांत तार-तार हो रहे हैं। पंडित जी ने राजनीति में सिद्धांतों का अनुसरण किया। कभी भी अनुशासन की लक्ष्मण रेखा को नहीं लांघा।

उड़ीसा के पूर्व राज्यपाल प्रोफेसर गणेश लाल ने कहा कि राजनीति को अक्सर सत्ता और चुनाव से जोडकऱ देखा जाता है, लेकिन कुछ ऐसे जननेता भी होते हैं जो राजनीति को केवल समाज सेवा का माध्यम मानते हैं। ऐसे
नेताओं की पहचान उनके पदों से नहीं, बल्कि उनके कार्यों से होती है। सिरसा की राजनीति में यदि ऐसे व्यक्तित्वों की चर्चा की जाए तो पंडित होशियारी लाल शर्मा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार तरुण भंडारी ने कहा कि पंडित जी ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में संगठन, समाज सेवा और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता
दी। यही कारण है कि आज उनके निधन के बाद भी लोग उन्हें सम्मान और आत्मीयता के साथ याद करते हैं। विधायक शीशपाल केहरवाला ने कहा कि पंडित होशियारीलाल शर्मा ने
जीवनभर जनसेवा को प्राथमिकता दी और समाज के जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहे। उन्होंने अपनी सरलता, मिलनसार व्यवहार और संघर्षशील व्यक्तित्व से लोगों
के दिलों में विशेष स्थान बनाया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला के पुत्र आदित्य सुरजेवाला ने कहा कि पंडित जी की राजनीति पद और स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि जनहित और
सामाजिक सरोकारों के लिए समर्पित रही। वहीं विधायक शीशपाल केहरवाला ने कहा कि पंडित जी का जीवन कांग्रेस की विचारधारा, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनसेवा की भावना

का प्रेरणादायक उदाहरण है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जितेन्द्र भारद्वाज भी पंडित जी को श्रद्धासुमन अर्पित करने पहुंचे। उन्होंने कहा कि शर्मा जी कांग्रेस के मजबूत स्तंभ थे, उनकी कमी
पार्टी को हमेशा खलेगी। सभी ने पंडित होशियारी लाल शर्मा के साथ बिताए समय और उनके सामाजिक एवं राजनीतिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व हमेशा
लोगों को प्रेरणा देता रहेगा। इस मौके पर अशोक तंवर पूर्व सांसद अजय सिंह चौटाला, पूर्व सांसद रणजीत सिंह चौटाला, डॉक्टर केवी सिंह पूर्व ओसीडी,चरणजीत सिंह रोड़ी पूर्व सांसद, सुशील इंदौरा पूर्व सांसद, कुलदीप शर्मा पूर्व स्पीकर, गोविंद कांडा, प्रहलाद सिंह गिलाखेड़ा पूर्व विधायक, स.निशान सिंह, मनीष सिंगला, जगदीश चोपड़ा, नवीन केडिया,वीरभान मेहता, वीर शांति स्वरूप अध्यक्ष नगर परिषद ,सरबजीत सिंह विर्क, महेश बंसल अध्यक्ष कालांवाली नगरपालिका, रेनू शर्मा अध्यक्ष भाजपा डबवाली, अशोक वर्मा, सुरेंद्र आर्य , गोपी राम चाडीवाल राजेश चाडीवाल, सुभाष जोधपुरिया, संदीप नेहरा, डॉ राधेश्याम शर्मा, रणधीर सिंह धीरा पूर्व नप अध्यक्ष, प्रदीप सैनी, श्यामलाल वर्मा, संजीव जैन, डॉ वाईके चौधरी, बलविंदर नेहरा, ज्ञानी करनैल सिंह, जयप्रकाश भोलू सरिया सहित सरपंच, पूर्व सरपंच, पार्षद, पूर्व पार्षद सहित हजारों की संख्या में लोगों ने पंडित जी को श्रद्धासुमन र्पित किए।
*पिता की सीख को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि: राजकुमार शर्मा*
पंडित होशियारी लाल शर्मा के पुत्र राजकुमार शर्मा ने कहा कि उनके पिता का पूरा जीवन समाज और आमजन की सेवा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कभी राजनीति को व्यक्तिगत
स्वार्थ या लाभ का माध्यम नहीं माना, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति की आवाज बनना ही अपना धर्म समझा। राजकुमार शर्मा ने कहा कि पिता जी ने परिवार को भी हमेशा सादगी,
ईमानदारी, संस्कार और सेवा का रास्ता अपनाने की सीख दी। उनका मानना था कि व्यक्ति के पास पद और प्रतिष्ठा भले ही न रहे, लेकिन यदि समाज का विश्वास उसके साथ है तो यही
उसकी सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि पंडित जी ने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। आम लोगों के दुख-दर्द को अपना समझकर उनके
साथ खड़े रहना उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी। उनकी पांचवीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि पंडित जी आज भी लोगों के दिलों में
जीवित हैं। उन्होंने कहा कि परिवार का प्रयास रहेगा कि पिता जी द्वारा स्थापित सेवा, संस्कार और जनहित की परंपरा को आगे बढ़ाया जाए।
*दादा जी का जीवन हमारे लिए प्रेरणा: मोहित शर्मा*
पंडित होशियारी लाल शर्मा के पौत्र मोहित शर्मा ने कहा कि दादा जी का व्यक्तित्व परिवार के साथ-साथ पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत रहा है। उन्होंने बचपन से ही दादा जी को लोगों
की मदद करते, जरूरतमंदों की समस्याएं सुनते और जनहित के मुद्दों के लिए संघर्ष करते देखा। मोहिती शर्मा ने कहा कि दादा जी ने हमेशा सिखाया कि जीवन में सफलता केवल
अपने लिए आगे बढऩे में नहीं, बल्कि दूसरों के काम आने में है। उनकी सादगी, अनुशासन और सभी के प्रति सम्मान का भाव आज भी परिवार के लिए सबसे बड़ी सीख है। उन्होंने
कहा कि पांचवीं पुण्यतिथि पर हजारों लोगों का पहुंचना इस बात को दर्शाता है कि दादा जी ने अपने जीवन में लोगों के दिलों में जो स्थान बनाया, वह किसी पद या राजनीतिक
उपलब्धि से कहीं बड़ा है। परिवार उनके बताए रास्ते पर चलने का प्रयास करता रहेगा।
यह रहा पंडित होशियारी लाल शर्मा का सियासी सफर
दरअसल पंडित होशियारी लाल शर्मा नका राजनीतिक सफर वर्ष 1974 में वार्ड प्रधान बनने से शुरू हुआ। इसके बाद 1980 में ब्लॉक प्रधान, 1983 में यूथ कांग्रेस जिला प्रधान, 1988
में जिला कांग्रेस महासचिव, 1996 में प्रदेश कांग्रेस संगठन सचिव, 1998 में कांग्रेस सेवादल जिला प्रधान, 2005 में जिला कांग्रेस अध्यक्ष और 2010 में कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता जैसे
महत्वपूर्ण पदों पर उन्होंने कार्य किया। यह यात्रा किसी राजनीतिक विरासत का परिणाम नहीं थी, बल्कि चार दशकों तक निरंतर किए गए संघर्ष, संगठन के प्रति समर्पण और जनता के
विश्वास का परिणाम थी। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। चाहे सरकार किसी भी दल की रही हो, यदि जनता के अधिकारों पर आंच आई तो
उन्होंने खुलकर विरोध किया। किसानों, व्यापारियों, मजदूरों, गरीबों और आम नागरिकों की समस्याओं को लेकर उन्होंने हमेशा आवाज उठाई। शहर में अवैध कॉलोनियों का मुद्दा हो,
गरीब परिवारों को प्लॉट दिलाने की मांग हो, पेयजल संकट, सडक़, सफाई व्यवस्था या अन्य जनसमस्याएं—हर विषय पर उन्होंने लगातार संघर्ष किया।
*चौटाला तक निकाली थी पैदल यात्रा*
वर्ष 1988 उनके राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। उस समय सरकार के खिलाफ आवाज उठाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कालांवाली से चौटाला तक पैदल
यात्रा निकालकर जनता की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया। यह यात्रा केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि जनभावनाओं को अभिव्यक्त करने का माध्यम
बनी। इस आंदोलन ने उन्हें सिरसा ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में एक संघर्षशील नेता के रूप में स्थापित किया। इसके बाद भी उन्होंने अनेक जन आंदोलनों का नेतृत्व किया। विभिन्न
मुद्दों को लेकर धरने दिए, प्रदर्शन किए, रैलियां निकालीं और कई बार गिरफ्तारियां भी दीं। जेल जाने के बावजूद उनके हौसले कभी कमजोर नहीं पड़े। उनका मानना था कि यदि संघर्ष
जनता के हित में हो तो कठिनाइयों से डरना नहीं चाहिए। यही कारण था कि उनके नेतृत्व में हुए आंदोलनों को हमेशा व्यापक जनसमर्थन मिला। कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में
उनका योगदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने जिला स्तर पर संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ प्रदेश स्तर पर भी कार्यकर्ताओं को जोडऩे का काम किया। कार्यकर्ताओं की
समस्याओं को सुनना, उन्हें आगे बढऩे के अवसर देना और संगठन में नई ऊर्जा का संचार करना उनकी विशेषता थी। वे छोटे से छोटे कार्यकर्ता का भी उतना ही सम्मान करते थे जितना
बड़े नेता का।
