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गीता, गंगा और गाय को महत्व देने से ही राष्ट्र का सर्वांगीण विकास निश्चित है: स्वामी विज्ञानानंद

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All-round development of the nation is assured only by giving importance to Geeta, Ganga and cow: Swami Vigyanananda

mahendra india news, new delhi          
सिरसा। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2025 के उपलक्ष्य में स्थानीय चौधरी देवी लाल यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम में संस्थान की सक्रिय भागीदारी रही। संस्थान की सिरसा शाखा से जहां नित्य प्रति साध्वी बहनों द्वारा श्री मद्भगवद गीता की पावन आरती का सुमधुर स्वरलहरियों से युक्त वाद्य यंत्रों द्वारा भाव सहित गायन किया गया।

वहीं संस्थान की ओर से दिव्य गुरु आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी विज्ञानानन्द ने आज भारतीय संस्कृति के महत्व को जाग्रत करते हुए बताया कि गीता, गंगा और गाय को महत्व देने से ही राष्ट्र का सर्वांगीण विकास होगा। जगद्गुरु भारत में भगवान श्री कृष्ण की दिव्य व अप्रतिम लीला जो उन्हें जगद्गुरु के पद पर आसीन करती है वो है महाभारत के युद्ध में अर्जुन को प्रदान किया गया गीता ज्ञान, जिसकी आधुनिक समाज में उतनी ही प्रासंगिकता है जितनी द्वापर युग में थी।

श्री मद् भगवद् गीता समस्त वेदों ग्रन्थों का सारभूत आलौकिक तात्विक ग्रन्थ है। ब्रह्मज्ञ मनीषियों के अनुसार समस्त वैदिक ग्रन्थ गाय हैं, इस गाय का दूध दोहने वाले ग्वाले साक्षात् श्री कृष्ण हैं, गाय का दूध पीने वाला गौ वत्स अर्जुन है और जो दूध निकला वही गीता ज्ञान है। स्वामी जी ने कर्म की तात्विक परिभाषा के बारे में बताते हुए कहा कि योग योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण की श्री मद भगवद् गीता कर्म की सार्थकता को पूर्णत: सिद्ध करती है कि योग: कर्मसु कौशलम भाव कि ईश्वर के तत्व रूप से योग ही कर्म में कुशलता का रूपक है।

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आवश्यकता है कि जगद्गुरु कृष्ण की तरह हमारे जीवन में भी ऐसे गुरु आएं, जो हमें अर्जुन की तरह हमारे भीतर तत्व रूप में ईश्वर का साक्षात्कार करवा दे। तभी अर्जुन की तरह हम ध्यान की गहनता में उतर कर भौतिक, मानसिक, बौद्धिक जीवन के हर युद्ध में विजय श्री का वरण कर सकते हैं। तभी जीवन और समाज की अज्ञानता, अनैतिकता और भ्रष्टाचार का हरण हो सकता है, जिससे सुदृढ़ राष्ट्र का निर्माण हो सकता है। क्योंकि मानव में क्रान्ति व विश्व में शान्ति का आधार ब्रह्म ज्ञान है और यही मानव समाज की सुषुप्त चेतना का जाग्रति में रूपांतरण कर सकता है। कार्यक्रम में साध्वी बहनों द्वारा श्री आरती का गायन कर प्रभु भक्तों में कृष्ण भक्ति रस का प्रसार किया।