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विद्यार्थी मूल्यों को आत्मसात करना सीखें, सभी युवा एवं बच्चें, चाहे वो विद्यार्थी हो या नहीं हो

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All young people and children, whether students or not, should learn to imbibe student values

mahendra india news, new delhi
लेखक
नरेंद्र यादव
नेशनल वाटर अवॉर्डी
यूथ एंपावरमेंट मेंटर

कहते है मानव मूल्यों से व्यक्ति का मूल्य निर्धारित किया जाता है, और भाव से किसी भी व्यक्ति का भाव तय किया जाता है। शायद कुछ विद्यार्थियों को ये बात समझ न आई होगी, लेकिन है बड़ी साफ, बहुत सटीक, तथा बिल्कुल स्पष्ट, अर्थात जिनके पास जीवन के मूल्य है, जिनके पास नैतिक मूल्य है, उनका मोल बढ़ जाता है, और जिनके भाव उज्ज्वल वा सकारात्मक होते है, उनके भाव बढ़ जाते है। ब्रह्मचर्य काल को ही हम विद्यार्थी काल कहते है या इसे विद्यार्थी आश्रम भी कह सकते है, ये सीखने का समय है, चाहे विद्यार्थी किसी भी कक्षा में पढ़ रहे है, या किसी भी प्रकार की स्किल सीख रहे हो, या फिर सॉफ्ट स्किल सीखने का कार्य कर रहे हो, या मानव मूल्यों को आत्मसात करने में लगे हो।

हम इस समय को ब्रह्मचर्य आश्रम कहें या विद्यार्थी आश्रम कहें, किंतु ये है हर प्रकार के ज्ञान को व्यवहार में उतारने का समय है,  इसे गंवाने या समय पास करने की कौशिश न करे। विद्यार्थियों को विद्यार्थी मूल्य सीखने की आवश्यकता है, तभी कोई भी विद्यार्थी जीवन में सशक्त बनेंगे, उनका व्यक्तित्व प्रभावशाली बनेगा। अब हम विद्यार्थी मूल्यों पर विमर्श करेंगे, जिन्हे हर विद्यार्थी को आत्मसात करने की आवश्यकता है, जैसे ; शारीरिक उत्थान, मानसिक उत्थान, सामाजिक उत्थान एवं आध्यात्मिक उत्थान। जब हम ह्यूमन डेवलपमेंट की बात करते है तो शरीर से शुरू होकर आत्मिक उत्थान तक जाते है,

क्यूंकि बिना नियंत्रित भाव के या सशक्त शरीर के कोई भी व्यक्ति आत्मिक विकास नहीं कर सकते है। अगर हम छोटी कक्षा के विद्यार्थियों की चर्चा करें तो उसमें भी वो जो कार्य आसानी से कर सकते है वो शरीर से शुरू होती है जिसमें कोई विश्लेषण की अधिक जरूरत है,  जैसे शारीरिक व्यायाम, समय का प्रबंधन, भोजन की पौष्टिकता, पानी पीने के तरीके, भोजन के पौष्टिक तत्वों के विषय में जानकारी अर्थात भोजन में उपलब्ध सभी पौष्टिक तत्वों की जानकारी करना, शरीर के विभिन्न हिस्सों के सशक्तिकरण के लिए विभिन्न प्रकार के व्यायाम करना सीखना,  शारीरिक उत्थान के लिए आवश्यक है। मानसिक स्तर पर जाने से पहले शारीरिक स्तर के विकास को जानना आवश्यक है, इसकी स्किल्स को जानना आवश्यक है, क्योंकि बिना स्वस्थ्य शरीर के मन को नियंत्रित या स्वस्थ नहीं किया जा सकता है, विवेक को जगाया नहीं जा सकता है, इसलिए हम इन चारों आयामों को बेहतर ढंग से विकसित करने के लिए कुछ जरूरी मूल्यों का सहारा लेते है,

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जैसे;
1. शारीरिक उत्थान के लिए हमे सात प्रकार के विद्यार्थी मूल्यों का पालन करना है। इनमें पहला मूल्य समय का पालन है जिसे बिना किसी विशेष ज्ञान के किया जा सकता है, कोई भी विद्यार्थी समय निष्ठा को समझते है, उन्हें इसके लिए केवल अभ्यास की जरूरत है, दूसरा अपनी दिनचर्या को बनाना है ताकि उनके सभी कार्य समय पर हो सकें, घड़ी को देखकर अपने कार्यों को निर्धारित करना है। तीसरा कार्य भोजन को जानना है, उसके पौष्टिक तत्वों की जानकारी लेनी है, पांचवां शारीरिक व्यायाम को जानना है, आसन को जानना है, शारीरिक अवस्था को जानना है। अपने हर कार्य को समय सीमा में बांधने का कार्य करना है। छठा कार्य उठना, बैठना, खड़े होने की स्थिति, चलना, अपने टीचर व बड़ों के सामने खड़े होने की स्थिति को जानना है। सातवां कार्य अपने जीवन को जागरूक करना है ताकि हर प्रकार के ज्ञान से अवगत बन सके, जैसे हर दिन एक बार न्यूज पेपर पढ़ना, अच्छी मैगजीन पढ़ना आदि आदि, जिससे जीवन में अनुशासन विकसित हो सकें, क्योंकि पहले आयाम का मुख्य उद्वेश्य अपनी दिनचर्या में अनुशासन को लाना ही है।


2. मानसिक उत्थान के लिए हमारे विद्यार्थियों को पांच मूल्यों पर गहन कार्य करना है। इसमें पहला मूल्य, योग को जीवन में उतारने का अभ्यास करना, बैठकर सूखाआसन लगा कर आंख बंद करने का अभ्यास करना है। दूसरा कार्य प्राणायाम करने का अभ्यास करना है, मौन का अभ्यास करना, अपनी सांसों पर ध्यान लगाने का धीरे धीरे अभ्यास करना है। तीसरा कार्य मोबाइल से दूर रहने का अभ्यास करना शुरू कर देना चाहिए। चौथा कार्य अपनी संगत को परखना तथा उसमें बेहतरीन की तलाश करनी होगी। पांचवां कार्य खुद को एकांत में रहना सिखाएं तथा विनम्रता का भाव लेकर आना सीखें।
3. सामाजिक उत्थान करना हर विद्यार्थी के लिए जरूरी आयाम है, क्योंकि व्यक्तित्व विकास के लिए सामाजिक रूप से बच्चों या युवाओं का उत्थान होना आवश्यक है। इसमें तीन मूल्य बेहद जरूरी है, जिसमें पहला कार्य किसी भी विद्यार्थी को अपने माता पिता, टीचर्स तथा बड़े बुजुर्गो को नमस्कार करना सीखना चाहिए। दूसरा कार्य हर विद्यार्थी को घर  के हर सामूहिक कार्यों में आगे आकर हिस्सा बनना जरूरी है, जैसे शादी विवाह, धार्मिक कार्यों में, किसी भी प्रकार के घरेलू सामाजिक कार्यों में भी आगे बढ़ कर भाग लेना चाहिए। इसी प्रकार तीसरा कार्य समाज के बड़े कार्य को करने के लिए आगे आना चाहिए, जैसे कोई कम्युनिटी कार्य है, यानी वृक्षारोपण, जल संरक्षण, स्वच्छता अभियान, मेडिकल कैंप का आयोजन है, खेलकूद कार्यक्रम है या फिर सांस्कृतिक कार्यक्रम है या फिर पाठ्यक्रम से संबंधित पुस्तके इक्कठे करना, जरूरतमंदों के लिए वस्त्र आदि इक्कठे करने के कार्य में भी विद्यार्थियों को लगना चाहिए।


4. आध्यात्मिक उत्थान के क्षेत्र में विद्यार्थियों को तीन कार्य अवश्य करने चाहिए, जिन्हें हम तीन महत्वपूर्ण मूल्य कह सकते है। इसमें पहला मूल्य नैतिक मूल्यों को जीवन में धारण करने की जरूरत है, यानी सत्य, निर्भय, न्याय, अहिंसा, साहस, समानता समरसता का ध्यान रखना चाहिए। दूसरा कार्य हर विद्यार्थी खुद को मूलाधार से उठाकर सहस्त्र चक्र तक लेकर जाना है। खुद को इच्छा से विवेक तक उठाने का कार्य करना है, तर्कशील भी बनने का अभ्यास करना है, तथा जीवन को सहज करने का कार्य करना है।
  ये सभी मूल्य विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु बेहद जरूरी है। विद्यार्थी जीवन को किसी भी प्रकार के दबाव, चिंता, प्रेशर, हीनभावना तथा अवसाद से मुक्त करने के लिए इन सभी मूल्यों का दिन प्रतिदिन अभ्यास करना जरूरी है ताकि विद्यार्थी हर स्किल से संपन्न हो जाए।
जय हिंद, वंदे मातरम
लेखक
नरेंद्र यादव
नेशनल वाटर अवॉर्डी
यूथ एंपावरमेंट मेंटर