नॉन-टीचिंग कर्मचारी संघ हरियाणा रजिस्ट्रड-115 की प्रदेश स्तरीय बैठक में गूंजा आक्रोश
mahendra india news, new delhi
सिरसा। हरियाणा के गैरशिक्षण कर्मचारियों में उस समय नाराजगी देखने को मिली, जब मुख्यमंत्री द्वारा यह बयान आया कि विश्वविद्यालय कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा अधिनियम में शामिल नहीं किया जाएगा। इसी विषय पर प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक कुरुक्षेत्र की सैन सभा धर्मशाला में सम्पन्न हुई।
बैठक का आयोजन रणबीर बांगड़वा ने किया और इसमें प्रदेशभर से लगभग 10-11 विश्वविद्यालयों के कर्मचारी शामिल हुए। बैठक के मुख्य अतिथि भारतीय मजदूर संघ के उत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री पवन रहे। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि विश्वविद्यालयों का गैर-शिक्षण स्टाफ/जिसमें सफाई कर्मचारी, तकनीकी कर्मचारी, क्लर्क और अन्य सभी श्रेणियां शामिल हैं, दरअसल इन संस्थानों की रीढ़ की हड्डी है।
उन्होंने कहा कि श्आज जिस शिक्षा व्यवस्था पर हम गर्व करते हैं, उसकी मजबूत नींव इन्हीं कर्मचारियों के श्रम और समर्पण पर टिकी है। उनकी सेवा सुरक्षा पर सवाल उठाना उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने जैसा है। पवन ने आगे कहा कि यह कर्मचारी केवल वेतनभोगी नहीं, बल्कि भविष्य की पीढिय़ों के निर्माण में सहभागी हैं। उन्होंने सभी कर्मचारियों से अपील की कि वे एकजुट होकर संगठन को और अधिक सशक्त बनाएं, ताकि सरकार तक उनकी सामूहिक आवाज़ प्रभावी ढंग से पहुंचे।
भारतीय मजदूर संघ हरियाणा के प्रदेश महामंत्री हवा सिंह मैहला ने कहा कि सेवा सुरक्षा अधिनियम से बाहर रखना कर्मचारियों की उम्मीदों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़ी आवश्यकता यही है कि सभी विश्वविद्यालयों का गैर-शिक्षण स्टाफ एक मंच पर एकजुट होकर संगठन को मज़बूत करें। जब संगठन मजबूत होगा तभी सरकार को भी कर्मचारियों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा। प्रांत मंत्री देवी लाल गुराना ने कहा कि विश्वविद्यालय कर्मचारी हर स्तर पर अपनी सेवाएं ईमानदारी और निष्ठा से निभा रहे हैं। चाहे कार्यालय हों, तकनीकी प्रयोगशालाएं हों, सफाई व्यवस्था हो या विद्यार्थी सेवाएं, हर जगह यही कर्मचारी कंधे से कंधा मिलाकर योगदान दे रहे हैं।
उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। गुराना ने भी संगठन को और व्यापक व सक्रिय बनाने पर बल दिया। सिरसा जिले के जिला मंत्री चरणजीत वर्मा ने कहा कि यह मुद्दा केवल कर्मचारियों की जीविका से जुड़ा नहीं, बल्कि विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली से भी संबंधित है। यदि कर्मचारी असुरक्षा में काम करेंगे तो इसका असर सीधे छात्रों और संस्थानों पर पड़ेगा। उन्होंने आह्वान किया कि हर जिला और हर विश्वविद्यालय से कर्मचारी इस संगठन से जुड़ें, ताकि सरकार तक उनकी एक मज़बूत सामूहिक आवाज़ पहुंचे। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि प्रदेश स्तर पर समन्वय और संगठन को और अधिक मज़बूत किया जाएगा।
इस अवसर पर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के संयोजक घोषित किए गए। सीडीएलयू सिरसा से जगदीश लूणा, सीबीएलयू भिवानी से कुलदीप, आईजीयू मीरपुर से देव प्रकाश, सीआरएसयू जींद से प्रवीण बुरा, केयूके कुरूक्षेत्र से रोशन लाल, गुरूग्राम से मंजीत, लुबास हिसार से सुनील, एचएयू हिसार से प्रदीप, एमवीएसयू कैथल से सीता राम, एसवीएसयू पलवल से बाल गोपाल और प्रदेश स्तरीय विश्वविद्यालय मुख्य संयोजक की जिम्मेदारी रणबीर बांगड़वा को सौंपी गई। अंत में संगठन के पदाधिकारियों द्वारा विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को आश्वस्त किया गया कि कर्मचारियों की नाराजग़ी को संगठित रूप में सरकार तक पहुंचाया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विश्वविद्यालयों के सभी वर्गों के गैर-शिक्षण कर्मचारियों को उनका हक और सम्मान मिले।
