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हिंदू होना केवल एक धार्मिक पहचान नहीं, बल्कि व्यापक जीवन शैली है: साध्वी संतोष भारती

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Being a Hindu is not just a religious identity, but a comprehensive way of life: Sadhvi Santosh Bharti

mahendra india news, new delhi
सिरसा। शहर के गांधी कॉलोनी के महादेव मंदिर में हिंदु सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन के संयोजक राजेंद्र बंसल ने बताया कि सम्मेलन में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान से साध्वी संतोष भारती व पूनम भारती ने बतौर मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। साध्वी संतोष भारती ने कहा कि हिंदू होना केवल एक धार्मिक पहचान नहीं, बल्कि व्यापक जीवन शैली है।

Being a Hindu is not just a religious identity, but a comprehensive way of life: Sadhvi Santosh Bharti

उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक कई लोग स्वयं को हिंदू कहने में संकोच करते थे, यह सोचकर कि इससे सौहार्द प्रभावित हो सकता है, लेकिन हिंदुत्व का मूल भाव सहिष्णुता और विविधता को स्वीकार करना है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व में विविध परंपराएं, दर्शन, योग, भक्ति, कर्म और ज्ञान के मार्ग शामिल हैं। वेद, उपनिषद और भगवद गीता जैसे ग्रंथों का इसमें महत्वपूर्ण स्थान है। पूजा-पद्धतियां क्षेत्र के अनुसार भिन्न हो सकती हैं, लेकिन मूल भाव मानव धर्म और नैतिक आचरण का है। साध्वी जी ने कहा कि उनके लिए हिंदुत्व जीवन के संस्कारों और विचारधारा का आधार है। यह दुनिया की प्राचीन परंपराओं में से एक है,

जो आत्मज्ञान, सहिष्णुता और सत्य की खोज का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि हिंदू होने का अर्थ किसी एक विचारधारा में सीमित रहना नहीं, बल्कि अनेक मार्गों को स्वीकार करना है। उन्होंने आगे कहा कि हिंदू धर्म जीवन को केवल भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रखता, बल्कि आत्मिक उन्नति पर भी बल देता है। धर्म, कर्म, मोक्ष और पुनर्जन्म जैसे सिद्धांत व्यक्ति को जीवन की दिशा देते हैं। हर कर्म का फल अवश्य मिलता है, इसलिए अच्छे विचार और श्रेष्ठ कर्म आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि भगवान शिव व राम के परिवार में संगठन था, लेकिन रावण के परिवार मे ंसंगठन नहीं था। जिसके कारण उसका पूरा परिवार बिखर गया। साध्वी जी ने कहा कि प्रहलाद राक्षस का पुत्र था, लेकिन फिर भी वह अपनी मां की शिक्षा से भगवान बन गया। जबकि रावण ब्राह्मण था, लेकिन उसके बाद भी वह ब्राह्मण नहीं बन पाया, क्योंकि उसकी माता राक्षस जाति से थी।

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इस मौके पर सम्मेलन के संयोजक राजेंद्र बंसल ने पंज परिवर्तन के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि समाज में नैतिक मूल्य युक्त परिवार हो, पर्यावरण की रक्षा के लिए लगातार प्रयास किए जाएं, सामाजिक समरसता हो, स्वदेशी जीवनशैली अपनाएं व नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी पालन करें। उन्होंने कहा कि इन पंच परिवर्तनों का हम पालन करके देश के विकास में अपना अह्म योगदान दे सकते हंै। इस मौके पर दिनेश सिंघानिया, मनमोहन मिढ़ा, योगेश मिढा, रिंकू छाबड़ा, सुरेश वत्स, दीपक फुटेला, सुनील बंसल,  मनोज भारत, अरविंद बंसल, जोगेंद्र एमसी, मनोज बंसल सहित गणमान्यजन उपस्थित थे।