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SIRSA में जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए बृजलाल सुथार ने बाबा साईं नाथ बुक बैंक में दान की 110 पुस्तकें

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Brijlal Suthar donated 110 books to the Baba Sai Nath Book Bank in Sirsa for needy students

MAHENDRA INDIA NEWS, NEW DELHI

सिरसा। जरूरतमंद एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से गुरदीप जी सैनी द्वारा संचालित बाबा साईं नाथ बुक बैंक में गांव बिजली सुधार, हर्निया वाली निवासी बृजलाल सुथार ने 110 पुस्तकें दान कीं। इनमें कक्षा 11वीं से लेकर बीएससी, एमएससी तथा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से संबंधित पुस्तकें शामिल हैं।

पुस्तकें भेंट करते हुए बृजलाल सुथार ने कहा कि उनके एक बेटा और एक बेटी हैं तथा दोनों ही बिना किसी सिफारिश के सरकारी सेवा में चयनित हुए हैं। उन्हें अपने बच्चों की सफलता पर गर्व है। इसी खुशी से प्रेरित होकर उन्होंने अपनी इच्छा से पुस्तकें दान की हैं, ताकि इनका लाभ किसी जरूरतमंद एवं पढ़ाई के प्रति जिज्ञासु विद्यार्थी को मिल सके।

उन्होंने कहा कि उनकी ईश्वर से प्रार्थना है कि इन पुस्तकों को पढ़ने वाला प्रत्येक विद्यार्थी जीवन में सफलता प्राप्त करे और सरकारी सेवा में जाकर अपने परिवार का नाम रोशन करे। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार उनके बेटे और बेटी ने परिवार का नाम रोशन किया है, उसी प्रकार इन पुस्तकों से लाभ लेने वाले विद्यार्थी भी आगे बढ़कर अपने परिवार और समाज का नाम रोशन करें। उन्होंने बुक बैंक के संचालक गुरदीप जी सैनी का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।

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इस अवसर पर डॉ. रामकृष्ण खोथ ने कहा कि पुस्तक दान करना ज्ञान के दान के समान है। एक पुस्तक कई विद्यार्थियों के भविष्य को दिशा दे सकती है। उन्होंने कहा कि बृजलाल सुथार द्वारा अपनी संतान की सफलता की खुशी को समाज के जरूरतमंद विद्यार्थियों के साथ साझा करते हुए पुस्तकें दान करना सराहनीय पहल है। ऐसे प्रयास विद्यार्थियों में पढ़ने की रुचि बढ़ाने के साथ-साथ समाज में सहयोग और सेवा की भावना को भी मजबूत करते हैं।

डॉ. खोथ ने कहा कि बाबा साईं नाथ बुक बैंक के माध्यम से जरूरतमंद विद्यार्थियों तक उपयोगी पुस्तकें पहुंचाने का प्रयास शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने समाज के अन्य लोगों से भी अपील की कि उनके पास ऐसी पुस्तकें हैं जिनका वे स्वयं उपयोग नहीं कर रहे हैं, तो वे उन्हें बुक बैंक में दान करें, ताकि उनका सदुपयोग किसी विद्यार्थी के भविष्य को संवारने में हो सके।