home page

आंतरिक कलह के चक्रव्यूह में उलझकर सम्राट पृथ्वीराज चौहान जैसे पराक्रमी योद्धा हुए वीर गति को प्राप्त: डा. विज्यन्त जोशी

 | 
Caught in the web of internal strife, mighty warriors like Emperor Prithviraj Chauhan attained martyrdom: Dr. Vijayant Joshi

mahendra india news, new delhi
आंतरिक कलह के चक्रव्यूह में उलझकर सम्राट पृथ्वीराज चौहान जैसे पराक्रमी योद्धा हुए वीर गति को प्राप्त: डा. विज्यन्त जोशी
सिरसा। दृढ़ इच्छा शक्ति और मातृभूमि के प्रति पूर्ण समर्पण के कारण ही पृथ्वीराज चौहान ने 16 बार विदेशी आक्रांता मोहम्मद गौरी को रणभूमि में मात दी। उल्लेखनीय है कि चौहान वंश के प्रसिद्ध व प्रतापी राजा जैसे अजयराज चौहान, विग्रह राज चौहान, अरिणव राज चौहान आदि चौहान वंश के राजाओं के श्रृंखला में पृथ्वीराज चौहान ने भारत भू (दिल्ली) पर शासन किया।

भारतीय इतिहास संकलन समिति हरियाणा, शाखा जिला सिरसा की आयोजित मासिक बैठक में उपरोक्त जानकारी डा. विज्यंत जोशी ने दी। संस्था के उपप्रधान व प्रवक्ता गंगाधर वर्मा ने बताया कि बैठक की अध्यक्षता संस्था के प्रधान रमेश जिंदगर ने की। सान्निध्य प्रांत कार्यकारी प्रधान रामसिंह यादव एवं प्रांत सहसंगठन सचिव सुभाष शर्मा का रहा। मुख्यातिथि बृजमोहन शर्मा रहे। डा. जोशी ने चौहान वंश के बारे में बताया कि हालांकि चौहान वंश के शासक बहुत ही वीर और वीर योद्धा थेए लेकिन समाज की आंतरिक कलहके कारण ही एक अन्य मनसबदार जयचंद ने अपनी दुश्मनी निकालने के लिए विदेशी आक्रांता मोहम्मद गौरी को अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए पृथ्वीराज चौहान से लडऩे के लिए बुलाया।

इनमें महाराजा पृथ्वीराज चौहान ने बहुत लड़ाइयां लड़ी,, लेकिन सन् 1182 में बुंदेलखंड के शासक परवर्दी देव चंदेल के विरूद्ध महोबा का युद्ध लड़ा और विजय प्राप्त की। सन् 1191 ई. में तराई के युद्ध में मोहम्मद गौरी को बुरी तरह परास्त किया और उन्हें भारी नुकसान हुआ। सन् 1192 ई. में मोहम्मद गौरी फिर तराईन के मैदान में पुन: लडऩे के लिए आया और आंतरिक कलह, नैतिकता और आक्रांताओं के चक्रव्यूह से एक राष्ट्र नायक पराक्रमी योद्धा को धोखे से बंदी बना लिया और अफगानिस्तान ले गए। उल्लेखनीय है कि पृथ्वीराज चौहान के दरबारके राज कवि चंद्र बरदाई अपनी महाकाव्य पृथ्वीराज रासों में लिखते हैं कि उन्होंने अफगानिस्तान जाकर मुगल शासक से मिलकर पृथ्वीराज चौहान से कारागार में मिलने की ईच्छा प्रकट की और बहुत ही गुप्त तरीके से बनाई गई एक योजना के तहत मोहम्मद गौरी को जाकर कहा कि मेरा मित्र बहुत ही धर्नुधर है और शब्द भेदी बाण चलाने में माहिर है।

WhatsApp Group Join Now

जब ये बात मोहम्मद गौरी ने सुनी तो उसने कहा कि इसकी परीक्षा ली जाएगी और अपने दरबार में योजना के अनुसार चंद्र बरदाई ने मोहम्मद गौरी के सिंघासन के सामने एक मचान बनवाई तथा मोहम्मद गौरी ठीक सिंघासन के पीछे तीन तवे टंगवाए। इससे पूर्व यह बताया जाना बहुत जरूरी है कि मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज पर बहुत जुल्म किए और लोहे की सलाखों से पृथ्वीराज की दोनों आंखें निकाल ली थी। जब चंद्र बरदाई पृथ्वीराज को लेकर दरबार में पहुंचे तो उन्होंने कहा कि महाराज इस मौके पर मैं एक दोहा सुनाना चाहता हूं और उसके बाद मेरा मित्र जब आप अनुमति दोगे तब मेरा मित्र तीर चलाएगा। चंद्र बरदाई ने दरबार में दोहा सुनाया, चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण, ता ऊपर सुलतान है मत चूके चौहान।


ज्यों ही मोहम्मद गौरी ने बाण चलाने का आदेश दियाए पृथ्वीराज चौहान ने शब्द भेदी बाण के अचूक निशाने से उसकी गर्दन धड़ से अलग कर दी। जिससे दरबार में हाहाकार मच गया। चंद्र बरदाई जो पहले से ही दो कटार अपने साथ लेकर गया थाए एक कटार पृथ्वीराज के हाथ में देते हुए कहा कि ये कटार मेरे पेट में मार दो और ऐसा ही पृथ्वीराज ने किया। जैसे ही पृथ्वीराज ने चंद्र बरदाई के पेट में कटार घोंपी, चंद्र बरदाई ने पृथ्वीराज के पेट में भी उसी दौरान कटार घोंप दी, जिससे दोनों वीर योद्धाओं ने मातृभूमि की बलि बेदी पर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। भारत भू पर जिन असंख्य योद्धाओं ने अपना बलिदान दियाए उनमें पृथ्वीराज चौहान और चंद्र बरदाई सूर्य की मानिंद चमकते रहेंगे और युवाओं को प्रेरणा देते रहेंगे। इस अवसर पर सुरेंद्र बांसल, सुभाष वर्मा, गुरबक्श खुराना, सुभाष बजाज, जयभगवान यादव, पुनीत सोनी, विक्रम, दिनेश राय टांटिया एडवोकेट, चन्द्रमोहन शर्मा, सतपाल जोत, भगवान दास बंसल, पवन कुमार छिम्पा, दीनानाथ अग्रवाल, डा. प्रवीण कुमार, सतीश मित्तल, यशवर्धन जोशी, कृष्ण मलिक, सुभाष बंसल सहित अन्य समिति सदस्य उपस्थित थे।