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CDLU में एनआरआई मैरिजेज़: डूज एंड डोंट्स – ए वे फॉरवर्ड इन द स्टेट ऑफ हरियाणा’ विषय पर तृतीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

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CDLU organised 3rd awareness programme on 'NRI Marriages: Do's and Don'ts – A Way Forward in the State of Haryana

mahendra india news, new delhi
राष्ट्रीय महिला आयोग एवं डॉ. बी.आर. अंबेडकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, सोनीपत द्वारा, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के विधि विभाग के सहयोग से ‘एनआरआई मैरिजेज़: डूज एंड डोंट्स – ए वे फॉरवर्ड इन द स्टेट ऑफ हरियाणा’ विषय पर तृतीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य एनआरआई विवाहों से जुड़े कानूनी, सामाजिक एवं व्यवहारिक पहलुओं पर जन-जागरूकता बढ़ाना था। यह कार्यक्रम सी.वी. रमन भवन, सेमिनार हॉल में आयोजित हुआ।

विधि विभाग की प्राध्यापक डॉ. ज्योत्स्ना चौधरी ने मंच संचालन किया तथा डॉ. अनिल घणघस ने सभी मेहमानों का स्वागत किया।


विधि विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. मुकेश गर्ग ने बताया कि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार के दिशा-निर्देशन में विद्यार्थियों के बहुआयामी विकास हेतु विभाग ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विधि विभाग के चेयरपर्सन प्रो. उमेद सिंह के रूप में उनका प्रोत्साहन सदैव मिलता रहता है और समय-समय पर इस प्रकार के कार्यक्रम होते रहते हैं। कार्यक्रम में सीडीएलयू के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार तथा बीआरएएनएलयू, सोनीपत के कुलगुरु प्रो. देवेंद्र सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। विशिष्ट अतिथि के रूप में डीएसपी (ट्रैफिक) सिरसा, संजीव बलहारा उपस्थित रहे।


बीआरएएनएलयू के कुलगुरु प्रो. देविंदर सिंह ने कहा कि एनआरआई विवाह संबंधी विवाद व्यक्तिगत स्तर से आगे बढ़कर सामाजिक व कानूनी चुनौती का रूप ले लेते हैं। पीड़ित महिलाओं को सीमाओं, प्रक्रियाओं और भाषा संबंधी कठिनाइयों के कारण न्याय हेतु अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। अतः सावधानी, पारदर्शिता और कानूनी सलाह का संतुलन सुरक्षित विवाह की अनिवार्य शर्त है।
सीडीएलयू के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने कहा कि एनआरआई विवाहों में दस्तावेजों की सत्यता, कानूनी प्रक्रियाओं की समझ और तथ्यों की जांच अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कई परिवार आकर्षण के कारण आवश्यक सत्यापन को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके गंभीर परिणाम सामने आते हैं। उन्होंने इस कार्यक्रम को छात्रों, शोधार्थियों, महिलाओं और अभिभावकों के लिए अत्यंत लाभकारी बताया।

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बीआरएएनएलयू की विधि विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर पारुल वशिष्ट ने एनआरआई विवाहों में सूचना पारदर्शिता, आवश्यक दस्तावेजों की जांच और कानूनी अधिकारों की जानकारी की महत्ता पर प्रकाश डाला। बीआरएएनएलयू के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रखार साहू एवं आकाश शर्मा ने भी एनआरआई वैवाहिक विवादों, धोखाधड़ी, शिकायत निस्तारण और सावधानियों पर अपने विचार व्यक्त किए। डीएलएसए कार्यालय से देवेंद्र कौर ने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पीड़ितों को निःशुल्क कानूनी सहायता एवं समयबद्ध परामर्श उपलब्ध कराता है। अधिवक्ता गुरतेज सिंह ने भी विषय पर अपने विचार साझा करते हुए कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डाला।


कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिनमें बलकार सिंह (जोश प्रचारक, सिख पंथ), सरदार भजन सिंह (ग्रंथी, गुरुद्वारा साहिब), अधिवक्ता अमित गोयल, अधिवक्ता विजय शर्मा, सुनीता रानी (एसएचओ, महिला थाना), अधिवक्ता के.एस. गिल, रीटा कसनिया (सरपंच, नाथूसरी चौपटा), कल्पना झोरड़ (सामाजिक कार्यकर्ता), मीनू कालीरावां (पर्वतारोही) उल्लेखनीय रूप से शामिल रहे। सीडीएलयू के विधि विभाग से प्राध्यापक डॉ नरेश लता, डॉ नरेंद्र कुमार, डॉ वकील, डॉ प्रदीप कम्बोज, डॉ गुरविंदर तथा डॉ निशा रानी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सीडीएलयू एवं बीआरएएनएलयू के विद्यार्थियों सहित अनेक गणमान्य लोग सम्मिलित हुए।