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चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में “बेटियों की लोहड़ी” का हर्षोल्लास से आयोजन

 
Chaudhary Devi Lal University celebrated "Daughters' Lohri" with great enthusiasm
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 Chaudhary Devi Lal University celebrated "Daughters' Lohri" with great enthusiasm

mahendra india new delhi
चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा में पंजाबी विभाग व गुरु तेग बहादुर रिसर्च चेयर के संयुक्त तत्वाधान में पारंपरिक लोक पर्व “बेटियों की लोहड़ी” को बड़े उत्साह एवं सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर में किया गया। पारंपरिक वेशभूषा में विद्यार्थियों ने गिद्दा व भंगड़ा करते हुए कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार का स्वागत किया।


इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने पवित्र अग्नि को ज्वलित किया और तिल डालकर पूजा की गई। उन्होंने सभी को “बेटियों की लोहड़ी” की शुभकामनाएं देते हुए अपने आशीर्वचन में कहा कि बेटियों की लोहड़ी हमारी समृद्ध लोक-संस्कृति, नारी शक्ति और सामूहिक आनंद का पर्व है। ऐसे पारंपरिक आयोजनों से विश्वविद्यालय परिवार में आपसी सौहार्द, सकारात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक चेतना का संचार होता है। मैं सभी के सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूँ।


कुलसचिव डॉ सुनील कुमार ने इस अवसर पर कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों से हमारी लोक परंपराओं को संजोने और नई पीढ़ी को उनसे जोड़ने का अवसर मिलता है। यह पर्व महिलाओं के सशक्तिकरण, भाईचारे और सामाजिक समरसता का प्रतीक है।


कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक लोक गीतों, गिद्दा एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को आनंदमय बना दिया। तिल, रेवड़ी, मूंगफली एवं लोहड़ी से जुड़ी पारंपरिक सामग्रियों के साथ लोक परंपराओं का निर्वहन किया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने एक-दूसरे को लोहड़ी की शुभकामनाएं दीं और आपसी सौहार्द एवं सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया।

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कार्यक्रम का संचालन पंजाबी विभाग व पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. सेवा सिंह बाजवा ने किया। उन्होंने कहा कि आयोजन का उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखना और सामूहिक आनंद के माध्यम से आपसी संबंधों को मजबूत करना रहा। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिवार की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। इस अवसर पर गुरु तेग बहादुर रिसर्च चेयर के उप निदेशक पंजाबी विभाग के प्राध्यापक गुरसाहिब सिंह, डॉ चरणजीत, डॉ हरदेव, डॉ अमरीक आदि ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंच का संचालन डॉ चनप्रीत द्वारा किया गया। इस अवसर पर विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता व विभागों के प्रमुख भी उपस्थित थे।