80 के दशक के फोटो ट्रेंड में कहीं चेहरा न बन जाए साइबर ठगी का जरिया : AI ऐप पर फोटो अपलोड करने से पहले रहें सावधान
mahendra india news, new delhi
सिरसा। सोशल मीडिया पर इन दिनों 80 के दशक के पुराने अंदाज में अपनी फोटो बनवाने का ट्रेंड खूब जोर पकड़ रहा है। मोबाइल में फोटो डालते ही एआई ऐप कुछ ही सेकंड में कपड़े, हेयर स्टाइल और पूरा लुक बदलकर तस्वीर को पुराने जमाने का बना देते हैं। ट्रेंड देखकर लोग अपनी ही नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों और दोस्तों की तस्वीरें भी अलग-अलग एआई ऐप व वेबसाइट पर अपलोड कर रहे हैं। देखने में यह सब मौज-मस्ती और मनोरंजन का हिस्सा लगता है, लेकिन अनजान प्लेटफॉर्म पर फोटो डालना आगे चलकर परेशानी का सबब बन सकता है।
पुलिस अधीक्षक दीपक सहारन ने आमजन के लिए विशेष एडवाइजरी जारी करते हुए सलाह दी है कि सोशल मीडिया के किसी भी ट्रेंड को आंख मूंदकर फॉलो न करें। उन्होंने कहा कि मनोरंजन के लिए किसी ऐप पर डाली गई तस्वीर का भविष्य में गलत इस्तेमाल हो सकता है। इसलिए फोटो अपलोड करने से पहले ऐप या वेबसाइट की विश्वसनीयता और उसकी प्राइवेसी पॉलिसी जरूर जांचें।फोटो डालने से पहले जान लें, डाटा जा कहां रहा हैपुलिस के अनुसार, किसी एआई प्लेटफॉर्म पर फोटो अपलोड करने से पहले यह देखना जरूरी है कि वह फोटो को कहां और कितने समय तक स्टोर करता है। साथ ही यह भी समझें कि फोटो का इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है। अक्सर लोग ऐप की शर्तें पढ़े बिना ही ‘एग्री’ पर क्लिक कर फोटो अपलोड कर देते हैं।सोशल मीडिया पर पहले से मौजूद नाम, मोबाइल नंबर और अन्य निजी जानकारी के साथ चेहरे से जुड़ी डिजिटल जानकारी भी जुड़ जाए तो किसी व्यक्ति की डिजिटल प्रोफाइल और विस्तृत हो सकती है। साइबर अपराधियों द्वारा इसका गलत इस्तेमाल कर फर्जी पहचान या भ्रामक सामग्री तैयार करने का प्रयास किया जा सकता है।
आवाज के बाद अब चेहरे के दुरुपयोग का खतरा
साइबर ठग भी समय के साथ ठगी के तरीके बदल रहे हैं। एआई की मदद से आवाज की नकल कर परिचित बनकर पैसे मांगने जैसी घटनाओं के बाद अब तस्वीरों और एआई से तैयार सामग्री के दुरुपयोग का खतरा भी सामने आ रहा है। हालांकि, केवल फोटो अपलोड करने से मोबाइल का फेस लॉक अपने आप खुल जाना मानकर डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन तस्वीर का इस्तेमाल फर्जी अकाउंट, भ्रामक पोस्ट या पहचान से जुड़ी धोखाधड़ी में किया जा सकता है।
फोटो का ऐसे हो सकता है गलत इस्तेमाल
आपके नाम और फोटो से फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाया जा सकता है।
फोटो में बदलाव कर भ्रामक या फर्जी सामग्री तैयार की जा सकती है।
चेहरे और आवाज की नकल कर परिचित बनकर ठगी का प्रयास हो सकता है।
एआई से फोटो में छेड़छाड़ कर धमकाने या ब्लैकमेल करने की कोशिश हो सकती है।
फोटो और दूसरी निजी जानकारियों को जोड़कर डिजिटल प्रोफाइल तैयार की जा सकती है।
किसी व्यक्ति के चेहरे को किसी फर्जी बयान या गतिविधि से जोड़कर गलत सामग्री फैलाई जा सकती है।
वायरल है तो सुरक्षित है, यह सोच बिल्कुल न रखें
एसपी दीपक सहारन ने कहा कि एआई तकनीक का इस्तेमाल करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन अनजान ऐप और वेबसाइट पर निजी तस्वीरें डालने से पहले सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। केवल इसलिए किसी प्लेटफॉर्म को सुरक्षित न मानें कि वह सोशल मीडिया पर वायरल है या बहुत लोग उसका इस्तेमाल कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐप की प्राइवेसी पॉलिसी पढ़ें,
अनावश्यक परमिशन देने से बचें और ऐसी तस्वीरें अपलोड न करें जिनमें घर का पता, दस्तावेज, पहचान पत्र या अन्य निजी जानकारी दिखाई दे रही हो। ट्रेंड के चक्कर में अपनी डिजिटल सुरक्षा को दांव पर न लगाएं। एसपी ने आमजन से अपील की कि साइबर अपराध से बचने का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता और सावधानी है। कुछ सेकंड की मौज-मस्ती के लिए अपनी निजी जानकारी से समझौता न करें। किसी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि या ठगी का मामला सामने आने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर सूचना दें सकतें है ।
