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पर्यावरण संरक्षण: हॉस्पिटल फॉरेस्ट्री में कौन कौन से पौधे तथा पेड़ लगाने चाहिए, इससे पॉजिटिव एनर्जी तथा अधिक ऑक्सीजन मिले

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स्नेक प्लांट, मनी प्लांट, एरी का पाम तथा गुलदाऊदी

mahendra india news. new delhi

लेखक

नरेंद्र यादव
नेशनल वाटर अवॉर्डी
यूथ डेवलपमेंट मेंटर
आज के वक्तमें पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना बहुत ही जरूरी हो गया है। इसके लिए अधिक से अधिक से पौधे हर जगह लगाने जरूरी है। 
आज मैं एक ऐसा विषय लेकर आया हूं जो शायद आपको लगे कि ये कौन सा महत्वपूर्ण विषय हैं, युवा दोस्तों मैं आपसे इस लिए कहना चाहता हूं क्योंकि तुम्हे ही ज्यादा लंबे समय तक इस धरती पर रहना है और वैसे भी आपके घुटनों में भी दम हैं, आपका दिमाग भी तेज गति से कार्य करता हैं, आप किसी भी विपरित परस्थिति को बदलने की ताकत रखते हैं। इसीलिए मैं अक्सर युवाओं को ही संबोधित करता हूं। कुछ लोग समझते होंगे कि ये क्या सब्जेक्ट है, हॉस्पिटल फॉरेस्ट्री इसका क्या अर्थ है क्योंकि कुछ लोगों को तो इसका मतलब भी समझना मुश्किल हैं,

जैसे हम कम्युनिटी फॉरेस्ट्री की अकसर बात करते है, हम फॉरेस्ट्री से सामुदायिक वानिकी तक पहुंच गए परंतु हम इससे आगे नहीं बढ़ पाए। हमारे वनों को जैसे जैसे काटना शुरू किया और वनों का प्रतिशत इतना कम कर दिया कि हमे कम्युनिटी फॉरेस्ट्री याद आने लगी। क्या है सामुदायिकी वानिकी, इसका सीधा सा अर्थ है, जो पौधे समुदाय में , गांव में, शहर में, स्कूलों में , कॉलेज में, विश्वविद्यालयों में, खेल के मैदानों में, या फिर कही पर भी खाली पड़ी जमीन पर अर्थात खेतों में रोपण करते है उसी को सामुदायिक वानिकी कहते हैं। हमने सघन वनों को खत्म करके सामुदायिक वानिकी की तरफ कदम रखा, और सोचा कि हम वनों में जितने पेड़ थे उनकी पूर्ति समुदाय में लगा कर पूरा कर देंगे लेकिन ये कभी भी संभव नहीं हो सकता हैं। वन का विकास नेचुरली होता हैं,

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इसके विपरित समुदायिक वानिकी में हम खुद पौधे लगाते है जिसमे से लगभग 70 से 80 प्रतिशत पौधे मर जाते हैं तथा दूसरी तरफ वन का वातावरण और भूमि अलग होती हैं, कि पौधे अपने आप ही ग्रो करते रहते है। वनों में आद्रता रहती है, भूमि में प्राकृतिक नमी रहती है, खाद भी वही से मिलता है, जिससे वन में पेड़ जल्दी विकसित होते हैं। मैं यहां सामुदायिक वानिकी से एक कदम आगे बढ़ कर बात कर रहा हूं, शायद किसी ने इस विषय में अभी तक सोचा भी नहीं होगा, परंतु ये आने वाले समय का जवलंत मुद्दा होगा, जिस प्रकार से हमारे अस्पतालों का एनवायरनमेंट प्रदूषित होता जा रहा है उससे निजात पाने के लिए अन्यत्र विचार करना पड़ेगा। यही नहीं हमे तो स्कूल फॉरेस्ट्री, विश्वविद्यालय फॉरेस्ट्री तथा पार्क फॉरेस्ट्री के विषय में भी विचार करना पड़ेगा। चलो अभी तो हम एक विषय जो हमारे स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने के लिए जरूरी है तथा अगर हम बीमार भी हो तो उससे जल्दी रिकवर कर सकें, यही हमारा लक्ष्य है, यही हमारा प्रयोजन है।

मैं इस लेख के माध्यम से पांच प्रश्न पूछना चाहता हूं, जो हमारे जीवन से जुड़े हुए है,  वह निम्न से हैं , जैसे ;
1. क्या आपने कभी वन देखे है ?
2. क्या आप लोगों ने विभिन्न अस्पतालों में रोपित पौधों तथा वहां खड़े हुए पेड़ों पर ध्यान दिया है ?
3. क्या आपने कभी अस्पताल के भीतर रखे गमलों की ओर गौर किया है ?
4. क्या आप लोगों ने कभी पेड़ के बारे में जानकारी ली है कि कौन से पेड़ स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं ?
5. क्या आपने कभी किन्ही भी पेड़ो के औषधीय गुणों के बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया है ? या कौन से पेड़ पौधे ज्यादा ऑक्सीजन देते है।
   

 मैं ये सब क्यों पूछ रहा हूं, मेरा मकसद यहां कोई आपके ज्ञान का इम्तिहार लेना नही है। मेरा मकसद केवल इतना है कि हम अपने वानिकी जगत के बारे में कितने जागरूक हैं, हो सकता है हमे ये तो बताया गया होगा, कि शनि ग्रह आपके लिए कितना खतरनाक है, राहु केतु ग्रह आपके जीवन पर  कितना और कब असर करेंगे लेकिन हमे कभी भी ये नही बताया गया , कि जो पौधे और पेड़ हमारे आस पास खड़े है वो हमारे लिए कितने औषधीय है और कितने जहरीले है तथा कौन से पौधे और पेड़ हमारे लिए अमृत तुल्य है, हम कभी भी अपने आस पास के घटकों पर ध्यान नहीं देते हैं। ह्यूमन बीइंग भी एक स्पेसीज है, जैसे पक्षी है, जैसे पशु है, जैसे पेड़ पौधे है, जैसे कीड़े मकोड़े है, जैसे कीट पतंगे है, घास है, झाड़ियां है, सभी रेंगने वाले जीव है, सागर हैं , नदियां, सरोवर है, जोहड़ तालाब है, और अनेक प्रकार के जीव जंतु है, उन सबसे मिलकर ही तो संसार बनता हैं। ये सब इस पृथ्वी नमक ग्रह के स्टेकहोल्डर है, जिनका अधिकार भी मनुष्य जितना ही बनता हैं। परंतु हमे इनकी चिंता नहीं है, हमे तो जो लाखों मील दूर दूसरे ग्रह है केवल उनकी चिंता है, कि कहीं वो तो हमारे ऊपर बुरी दृष्टि  नही रखे हुए  हैं। आओ हम आज केवल हॉस्पिटल फॉरेस्ट्री की बात करें। हमे अस्पताल में उगे हुए पौधो तथा पेड़ों पर ध्यान देकर , उन्हे विस्थापित करें जो पेड़ पौधे स्वास्थ्य के लिए ज्यादा लाभदायक नही है और विदेशी गुण के है या जिनसे ऐसे बारीक पदार्थ निकलते है जो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते है उन्हे अस्पताल से हटाना चाहिए। मैं कुछ पौधे तथा पेड़ों की सलाह दे रहा हूं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए औषधि का काम करते है और हमारे स्वस्थ होने के चांस बढ़ा देते हैं, जैसे ;


1. अस्पताल के अंदर गमलों में तुलसी के पौधे लगाने चाहिए क्योंकि तुलसी कीट नाशक होती है तथा ऑक्सीजन भी ज्यादा देती हैं।
2. अशोक के पेड़ ज्यादा कार्बन मोनोऑक्साइड को ग्रहण करते है और वातावरण को शुद्ध करते हैं।
3. नीम के पेड़ कीटनाशक होने कारण वातावरण को शुद्ध रखते है, और टी बी जैसे इलाज के लिए नीम के पेड़ बहुत ही लाभदायक हैं।
4. कबूली कीकर, देशी कीकर को अस्पताल में नही लगाना चाहिए।
5. सफेदें के पौधे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते है, इसलिए अस्पताल में ये पेड़ नही लगाने चाहिए।
6. हर अस्पताल में जहां पर खाली स्थान है वहां पीपल के पेड़ जरूर लगाएं क्योंकि ये पेड़ चौबीस घंटे ऑक्सीजन देते हैं।


7. बेल के पेड़ भी बहुत लाभदायक है इन्हे अस्पताल में जरूर रोपित करें।
8. इंडोर प्लांट में स्नेक प्लांट, मनी प्लांट, एरी का पाम तथा गुलदाऊदी को लगाना चाहिए , जो ज्यादा ऑक्सीजन देते हैं।
9. अस्पताल में कोई भी झाड़ी नही होनी चाहिएं तथा चीड़ के पेड़ नही लगाने चाहिए।
10. अस्पतालों में बरगद, अर्जुन तथा जामुन के पेड़ भी लाभदायक है।


   युवा साथियों, हमे एक अभियान चलाना होगा, जो सरकारी अस्पतालों की वानिकी का ध्यान रखने के लिए होगा। इस अभियान में लाभदायक पौधे लगाए जायेंगे और जो पेड़ या पौधे नुकसान करते है उन्हे वहां से हटाना होगा। आओ सभी नागरिक मिलकर इस अभियान में भाग ले तथा सभी अस्पतालों को मेडिशनल वैल्यू वाले पेड़ पौधों से सजाएं।
जय हिंद, वंदे मातरम