लघुकथा एवं उपन्यास लेखन विषय पर प्रथम अंतर्राष्ट्रीय एक्सचेंज व्याख्यान का आयोजन
चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा में विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय संबंध एवं विदेश मामले कार्यालय तथा अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विभाग के संयुक्त तत्वाधान में इंडोनेशिया के पामुलांग विश्वविद्यालय, जकार्ता के सहयोग से लघुकथा एवं उपन्यास लेखन विषय पर प्रथम अंतर्राष्ट्रीय एक्सचेंज व्याख्यान का आयोजन किया गया।
इस संबंध में जानकारी देते हुए अंतर्राष्ट्रीय संबंध एवं विदेश मामलों की अधिष्ठाता प्रो. अनु शुक्ला ने बताया कि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार के दिशा निर्देशन में विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक आदान-प्रदान के महत्व को रेखांकित करने के लिए यह व्याख्यान आयोजित किया गया। इस व्याख्यान में इंडोनेशिया की प्रख्यात लघुकथा लेखिका एवं पामुलांग विश्वविद्यालय में अंग्रेजी साहित्य की प्रोफेसर नी कोमांग अरियानी मुख्य वक्ता रही। उन्होंने प्रो. अरियानी का स्वागत करते हुए उनका विस्तृत परिचय करवाते हुए बताया कि वे एक प्रतिष्ठित साहित्यकार हैं जिनकी रचनाएं इंडोनेशिया के प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी लघु उपन्यासिका न्यानी सुनी चेला तेबिंग को वर्ष 2007 में फेमिना पत्रिका की धारावाहिक कथा प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ था। उनकी लघुकथाएं तीन बार प्रतिष्ठित कोम्पास श्रेष्ठ लघुकथा संकलन में सम्मिलित हो चुकी हैं।'
प्रो. अरियानी ने अपने व्याख्यान में लघुकथा लेखन की कला पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने लघुकथा और उपन्यास के बीच संरचनात्मक भिन्नताओं को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि दैनिक जीवन प्रेरणा का अक्षय स्रोत है और नवोदित लेखकों को जिज्ञासु एवं सूक्ष्मदर्शी बनना चाहिए। उन्होंने दो मूल सिद्धांत साझा किए, खूब पढ़ो और जिज्ञासु बने रहो तथा इनपुट नहीं तो आउटपुट नहीं। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि लघुकथा का आरंभ प्रभावशाली होना चाहिए। उनका कहना था आरंभ बम की तरह होना चाहिए।
अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विभाग के प्रो. उमेद सिंह ने वक्ता के विचारों की सराहना करते हुए युवा लेखकों के लिए इस प्रकार की चर्चाओं की प्रासंगिकता पर बल दिया। व्याख्यान में दोनों विश्वविद्यालयों के अंग्रेजी विभाग के विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों एवं शोधार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने एकमत से स्वीकार किया कि इस सत्र से साहित्यिक सृजनात्मकता की उनकी समझ व्यापक हुई। कार्यक्रम के समापन पर अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विभाग के अध्यक्ष प्रो. पंकज शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए आशा व्यक्त की कि विद्यार्थियों के हितार्थ भविष्य में ऐसे और भी अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक आयोजन किए जाएंगे।
