कोर्ट के फैसलों पर दोबारा सुनवाई के नाम पर अतिथि अध्यापकों को परेशान न करे सरकार : संघ
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हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ की कौर कमेटी की आनलाइन मीटिंग में लिए फैसले की जानकारी देते हुए राज्य महासचिव रामपाल शर्मा ने अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण के संबंध में शिक्षा विभाग द्वारा अपनाई जा रही प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि 24 सितंबर 2026 को अतिरिक्त मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग तथा निदेशकों के साथ हुई वार्ता में जिन बातों पर सहमति बनी थी, वर्तमान में अपनाई जा रही व्यक्तिगत सुनवाई की प्रक्रिया उससे अलग दिखाई दे रही है। संघ इस पर अपना विरोध दर्ज करवाएगा तथा जिला स्तर पर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेगा। मीटिंग राज्य प्रधान प्रभु सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई । मीटिंग में संजीव सिंगला, गुरमीत सिंह, निशा व कृष्ण नैन उपस्थित रहे।
प्रभु सिंह ने कहा कि वर्ष 2005-06 में अतिथि अध्यापकों की नियुक्ति विभाग द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों, विज्ञापन, निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, चयन प्रक्रिया तथा संबंधित अधिकारियों/चयन समितियों के माध्यम से की गई थी। बाद में अतिथि अध्यापकों की सेवा शर्तों में परिवर्तन करते हुए उन्हें अनुबंध आधार पर सेवा में लिया गया। इसके बाद राज्य सरकार द्वारा 16 एवं 18 जून 2014 की नीति के माध्यम से निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने की नीति बनाई गई थी।
कृष्ण नैन महासचिव सर्व कर्मचारी संघ ने कहा कि नियमितीकरण से संबंधित न्यायिक कार्यवाही में नियुक्ति प्रक्रिया, पात्रता और नीति से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर न्यायालयों के समक्ष पक्ष रखे जा चुके हैं। इसलिए संघ की स्पष्ट मांग है कि अब नियमितीकरण की प्रक्रिया को फिर से मूल चयन प्रक्रिया की जांच के रूप में न चलाया जाए। उपलब्ध सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों में भी पात्रता संबंधी दस्तावेजों के सत्यापन के बाद पात्र पाए गए अभ्यर्थियों के संबंध में नियमितीकरण की कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
भर्ती प्रक्रिया की दोबारा जांच के बजाय व्यक्तिगत अभिलेखों का सत्यापन हो
वक्ताओं ने कहा कि विभाग यदि किसी शिक्षक की पात्रता और नियमितीकरण की शर्तों की जांच करना चाहता है तो उसके लिए संबंधित शिक्षक के व्यक्तिगत दस्तावेज—शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, सेवा अवधि तथा नीति में निर्धारित अन्य आवश्यक अभिलेख—का सत्यापन किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2005-06 में विभाग द्वारा जारी आदेश, विज्ञापन, चयन समिति के अभिलेख, अधिकारियों को दी गई शक्तियों के आदेश, आरक्षण संबंधी रिकॉर्ड, मेरिट सूची तथा नियुक्ति से संबंधित सरकारी रिकॉर्ड विभाग के पास उपलब्ध हैं। इन अभिलेखों की जांच विभाग स्वयं अपने रिकॉर्ड से कर सकता है। अतिथि अध्यापकों से वर्षों पुरानी विभागीय चयन प्रक्रिया का दोबारा विवरण पूछना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि न्यायालय के निर्णय की वैधता पर प्रशासनिक स्तर पर पुनर्विचार करना और नियमितीकरण की पात्रता की जांच करना दो अलग-अलग बातें हैं। संघ व्यक्तिगत दस्तावेजों के नियमानुसार सत्यापन का विरोध नहीं करता, लेकिन इसे वर्ष 2005-06 की चयन प्रक्रिया की पुनः सुनवाई का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
“प्रशासन कोर्ट की भूमिका में न आए”
संजीव सिंगला ने कहा कि अतिथि अध्यापकों को सुनवाई के दौरान उनकी पुरानी चयन प्रक्रिया, विज्ञापन, मेरिट तथा चयन समिति से जुड़े ऐसे प्रश्नों में उलझाना, जिनका रिकॉर्ड स्वयं विभाग के पास उपलब्ध है, नियमितीकरण की प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा कर सकता है।
उन्होंने कहा, “प्रशासन का काम न्यायालय के निर्णयों को लागू करना और निर्धारित शर्तों के अनुसार दस्तावेजों का सत्यापन करना है। प्रशासन को ऐसी प्रक्रिया नहीं अपनानी चाहिए जिससे यह प्रतीत हो कि न्यायालय द्वारा पहले से विचार किए जा चुके विषयों की फिर से जांच की जा रही है।”
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ ने मांग की है कि निदेशालय स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे, आवश्यक कमेटियां गठित करे, प्रत्येक शिक्षक के व्यक्तिगत दस्तावेजों का निर्धारित मानदंडों के अनुसार सत्यापन करवाए और पात्र पाए जाने वाले अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण की कार्रवाई निर्धारित समय-सीमा में पूरी करे।
सरकार की नीयत पर सवाल उठने वाली प्रक्रिया से बचे विभाग
गुरमित सिंह ने कहा कि अतिथि अध्यापक लंबे समय से सरकारी विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं। यदि सरकार और विभाग न्यायालय के निर्णयों को लागू करने के प्रति गंभीर हैं तो प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाना चाहिए। अनावश्यक सुनवाई, बार-बार दस्तावेज मांगने और पहले से उपलब्ध विभागीय रिकॉर्ड की जिम्मेदारी शिक्षकों पर डालने से असमंजस की स्थिति पैदा होगी।
उन्होंने कहा कि संघ सरकार और विभाग से मांग करता है कि कोर्ट के निर्णयों को लागू करने में टालमटोल के बजाय निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पात्र अतिथि अध्यापकों को नियमित करने की कार्रवाई की जाए।
2 अक्टूबर को जिला मुख्यालयों पर अनशन
रामपाल ने बताया कि इस मुद्दे पर व टेट अनिवार्यता, स्कूल मर्जर आदि मुद्दों पर 2 अक्टूबर 2026 को प्रदेश के सभी जिलों में जिला स्तरीय अनशन आयोजित किए जाएंगे और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। यदि सरकार ने उचित प्रक्रिया अपनाकर नियमितीकरण की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाने का निर्णय लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि संगठन द्वारा 10 अक्टूबर तक जिला कन्वेंशन तथा 6 नवंबर तक ब्लॉक कन्वेंशन आयोजित कर शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच व्यापक जनसंपर्क किया जाएगा। इसके बाद आंदोलन को प्रदेश स्तर पर और व्यापक किया जाएगा।
वक्ताओं ने नियमित तथा अतिथि अध्यापकों से अपील की कि वे 2 अक्टूबर के जिला स्तरीय अनशनों में बढ़-चढ़कर भाग लें और न्यायालय के निर्णयों की भावना के अनुरूप नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करवाने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करें।
