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Haryana News: हरियाणा का ये है सबसे गरीब जिला, भेड़-बकरियों का दूध बेचकर करते हैं लोग गुजारा

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 Haryana News: हरियाणा का ये है सबसे गरीब जिला, भेड़-बकरियों का दूध बेचकर करते हैं लोग गुजारा 
Haryana News: हरियाणा के लोग बहुत ठाठ-बाठ से रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हरियाणा में एक ऐसा जिला भी है जहां लोगों को दो वक्त की रोटी बहुत मुश्किल से नसीब होती है। रोजाना दो वक्त की रोटी के लिए उन्हें जद्दोदहद करनी पड़ती है।

क्या आप जानते हैं कि हरियाणा का सबसे गरीब जिला कौनसा है। इस जिले का नाम जानकर आप हैरान रह जाएंगे। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार यह जिला देश के सबसे पिछड़े हुए जिलों में से एक है आइए जानते हैं इसके बारे में

साल 2018 में आई नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार नूंह देश के आर्थिक रूप से सबसे पिछड़े जिलों में से एक है. सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट जारी करते हुए कहा कि नूंह में घोर बेरोजगारी है.

यहां के लोगों की कमाई का जरिया सिर्फ खेती और भेड़ ब​करियां और दूध है. एजुकेशन के मोर्चे पर भी पिछड़ा होने की वजह से गुरुग्राम के नजदीक होने के बाद भी यहां पर गरीबी अपने पांव पसारे हुए है.

कैसे होती है आम लोगों की कमाई

वैसे जिले के लोगों की कमाई का प्रमुख सोर्स कृषि है, इससे जुड़े हुए काम हैं. कुछ ही इलाके ऐसे हैं जहां पर नहर से सिंचाई होती है. जबकि पूरा जिले में कृषि वर्षा पर आधारित है. राज्य के बाकी हिस्सों की तुलना में यहां पर प्रति हेक्टेयर फसल की पैदावार कम है.

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नूंह भारत के उन 33 जिलों में से एक है जहां मुसलमानों की आबादी आधी से अधिक है. 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, मुसलमानों की आबादी 79.2 फीसदी है, और हिंदू 20.4 फीसदी हैं.

नूंह हरियाणा का सबसे गरीब जिला भी है. नीति आयोग के मुताबिक, वहां की चालीस फीसदी आबादी मल्टीडायमेंशियल रूप से गरीब है. मल्टी डायमेंशियल गरीबी तीन फैक्टर डिपेंड होती है, पहला हेल्थ, दूसरा एजुकेशन और तीसरा लाइफस्टाइल. इन तीनों कैटेगिरीज में न्यूट्रिशन, बाल और किशोर मृत्यु दर, स्कूल एजुकेशन के साल, स्वच्छता, आवास, संपत्ति आदि जैसे दूसरे पैरामी​टर्स भी आते हैं.

भेड़ बकरियां और दूध से भी होती है कमाई

पशुपालन से होने वाली कमाई यहां की सेकंड्री इनकम का सोर्स है. यहां की अरावली की पहाड़ियों के पस भेड़ बकरियां भी पाली जाती हैं. अगर बात दूध की करें तो अच्छा प्रोडक्शन देखने को मिलता है. लेकिन भारी कर्ज के कारण दूध से होने वाली इनकम बहुत कम हो जाती है.

कई किसानों को दूध सामान्य कीमत से कम कीमत पर कर्ज देने वाले को बेचना पड़ता है. मेवात में मुर्गीपालन की संख्या बाकी हरियाणा की तुलना में बहुत कम है. यह भी कारण है जिसकी वजह से यहां के लोगों की कमाई कम होती है.

मौजूदा हालात और भी खराब

अगर मौजूदा समय की साल 2018 से नूंह की तुलना करें तो स्थिति और भी खराब हो चुकी है. मई 2023 में जिला एजुकेशन, कृषि और बेसिक इंफ्रा के मामले में और खराब हो गया. अप्रैल 2018 की बेसलाइन की तुलना में, एजुकेशन में 43.8 फीसदी की गिरावट आई है. कृषि में 14.2 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है. बेसिक इंफ्रा में 18.1 फीसदी की गिरावट देखने को मिल रही है.