ठाकुर दलीप सिंह की अगुवाई में होला मोहल्ला का विशाल त्रिवेणी संगम
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सिरसा। जीवन नगर गुरुद्वारा जीवन नगर में वर्तमान नामधारी मुखी ठाकुर दलीप सिंह के मार्गदर्शन में नामधारी सिखों द्वारा होला मोहल्ला का त्रिवेणी संगम बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। होला मोहल्ला के अंतिम दिन हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी यहां पहुंचे और साध संगत के दर्शन किए तथा गुरु माता गुरमीत कौर से आशीर्वाद प्राप्त किया।
ठाकुर दलीप सिंह की अगुवाई में आयोजित इस धार्मिक समागम के दौरान मुख्यमंत्री ने विनम्रता के साथ लंगर और गौशाला में सेवा कर सेवा और सिमरन की महान परंपरा को नमन किया। इस अवसर पर ठाकुर दलीप सिंह ने आॅडियो संदेश के माध्यम से कहा कि सिख पंथ भारतीय संस्कृति से बना है। सिख पंथ की कई परंपराएं जैसे गुरु-सिख परंपरा, चरणामृत देना-लेना, ब्रह्म ज्ञान, धर्म, मुक्ति आदि ऐसी शब्दावली और मयार्दा भारतीय संस्कृति से ही सिखों में आई है।
सिख पंथ का मूल सिद्धांत हिंदुओं से जुड़ा है क्योंकि हमारा सिख पंथ हिंदू समाज में से ही उत्पन्न हुआ है। हमारे गुरु साहिबान हिंदू परिवारों में ही प्रकट हुए, वहीं उनका विवाह हुआ और उनके नाम भी हिंदू परंपरा से जुड़े थे। ठाकुर जी ने आगे कहा कि सिख बनने के लिए अमृत छकना और केश रखना आवश्यक नहीं, बल्कि श्रद्धा आवश्यक है। परंतु अमृतधारी खालसा बनने के लिए अमृत और केश अनिवार्य हैं।
जो भी व्यक्ति सतिगुरू नानक देव जी पर श्रद्धा रखता है, वही सिख (शिष्य/मुरीद) है, क्योंकि सिखी श्रद्धा से है। सतिगुरू राम सिंह ने हमें दसवें पातशाह की मयार्दा दे कर अमृतधारी खालसा बनाया। इतिहास के संदर्भ में ठाकुर जी ने कहा कि सतिगुरू गोबिंद सिंघ जी ने हजूर साहिब में शरीर त्याग नहीं किया, श्री आदि ग्रंथ साहिब को गद्दी नहीं दी और न ही आज्ञा भई अकाल का दोहरा उच्चारण किया था। हमारे अनुसार निर्जीव गुरु नहीं हो सकता, हालांकि हम गुरु ग्रंथ साहिब का पूर्ण सम्मान करते हैं। हम नामधारी बिना केशों का स्नान किए आदि ग्रंथ की ताबिया में नहीं बैठ सकते। ठाकुर जी ने स्पष्ट किया कि हम नामधारी, आरएसएस और भाजपा का राष्ट्रवादी होने के कारण खुलकर समर्थन करते हैं, परंतु हम भाजपाई नहीं हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री सैनी ने नामधारी पंथ को धार्मिक और सामाजिक रूप से सहयोग देने का वादा किया और कहा कि उन्हें जीवन नगर की पवित्र धरती पर आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने सतिगुरू दलीप सिंह के चरणों में नमन किया। तेजिंदर सिंह ने बताया कि नामधारी सिखों को एक स्थान पर बसाने के लिए सतिगुरू प्रताप सिंह ने 1946 में कई हजार एकड़ भूमि खरीदी थी। इस में से गुरुद्वारा जीवन नगर के आसपास लगभग 130 एकड़ भूमि में से केवल 65 एकड़ जमीन ही गुरुद्वारे के पास है, जहां सतिगुरू जी के आदेशानुसार लंगर, वर्णी, गौशाला और औषधालय आदि सुचारू रूप से चलाए जा रहे हैं। समागम में स्वामी राजेश्वरा नंद महाराज, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के अध्यक्ष और गौ रक्षक मोहम्मद फैज खान,
आरएसएस राष्ट्रीय मंच से विक्रमादित्य, पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल, एडवोकेट यतींद्र सिंह और राज्यसभा सदस्य रामचंद्र जांगड़ा विशेष रूप से पहुंचे और कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इसके अलावा रेणु शर्मा, सुरिंदर आर्य, देव कुमार शर्मा, जगदीश चोपड़ा, शीशपाल कंबोज, अमीर चंद मेहता, गुरदेव सिंह राही और हनुमान कुंडू ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। ठाकुर दलीप सिंह की प्रेरणा से 269 पाठों के भोग अमृतधारी सित्रयों द्वारा डाले गए। दूर-दूर से हजारों की संख्या में संगत ने समागम में भाग लिया। इस अवसर पर राजनीतिक और धार्मिक हस्तियों के अलावा संत सर्वप्रीत सिंह (डॉक्टर), मास्टर सुखदेव सिंह, पलविंदर सिंह, तजिंदर सिंह, मोहन सिंह झब्बर, सूबा भगत सिंह, कुलविंदर सिंह, मुख्तियार सिंह, सुखराज सिंह, दलजीत कौर, सुखप्रीत कौर, संदीप कौर, गुरवंत कौर, भगवंत कौर आदि तथा विशाल संगत उपस्थित रही।
