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सही डोमेन पहचानें और हर डिजिटल लेनदेन से पहले सावधानी बरतें: डा. पीयूष शर्मा

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Identify the right domain and exercise caution before every digital transaction: Dr. Piyush Sharma

mahendra india news, new delhi
सिरसा। डिजिटल बैंकिंग आज भारत की जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराधों में भी अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की जा रही है। फर्जी बैंक वेबसाइटों, संदिग्ध लिंक, नकली ऐप्स और फिशिंग मैसेज के कारण हर साल लाखों लोग आर्थिक ठगी का शिकार बन रहे हैं। इसी बढ़ते साइबर जोखिम को देखते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सभी बैंकों को अपनी नेट बैंकिंग वेबसाइट्स को विशेष सुरक्षा वाले डोमेन बैंक डॉट इन पर स्थानांतरित करने का निर्देश जारी किया था।

इस परिवर्तन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2025 तय की गई थी और अब बैंक धीरे-धीरे इस बदलाव को लागू कर रहे हैं। एसबीआई, आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, एक्सिस, कोटेक महिंद्रा और पीएनबी जैसे प्रमुख बैंक इस नए डोमेन पर शिफ्ट होना शुरू भी कर चुके हैं। बैंक डॉट इन एक विशेष, सुरक्षित और अधिकृत डोमेन है,, जो केवल भारतीय बैंकों के लिए ही उपलब्ध होता है। इस डोमेन का संचालन आईडीआरबीटी द्वारा किया जाता है, जिसे निक्सी और माइटी की अनुमति प्राप्त है। यह डोमेन पारंपरिक डोमेनों की तुलना में कहीं अधिक नियंत्रित, सुरक्षित और निगरानीयुक्त है, जिससे साइबर अपराधियों द्वारा नकली या क्लोन बैंकिंग वेबसाइट तैयार करना लगभग असंभव हो जाता है। इस बदलाव के साथ ग्राहकों के डेटा, लेनदेन और संपूर्ण डिजिटल बैंकिंग अनुभव की सुरक्षा और मजबूत होने की उम्मीद है।

इस विषय पर देश के ख्याति प्राप्त साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डा. पीयूष शर्मा ने आम जनता को जागरूक करते हुए कहा कि डिजिटल दुनिया में सुरक्षा का पहला नियम सतर्कता है। उन्होंने साफ  शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि हर व्यक्ति सिर्फ  बैंक डॉट इन डोमेन पर ही भरोसा करे, क्योंकि असली और नकली बैंकिंग वेबसाइटों की पहचान का सबसे आसान और विश्वसनीय तरीका यही है। डा. शर्मा ने बताया कि साइबर अपराधी बिल्कुल असली जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइटें तैयार कर लेते हैं और लोग अनजाने में उन पर अपनी संवेदनशील जानकारी सांझा कर बैठते हैं।

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आरबीआई के इस कदम से बैंकिंग वेबसाइटों की विश्वसनीयता पहचानना अब और आसान हो जाएगा, परंतु इसके सफल होने का सबसे बड़ा आधार जनता की जागरूकता ही है। उन्होंने अपील की कि लोग हमेशा बैंक की वेबसाइट खुद टाइप करके खोलें, किसी लिंक या व्हाट्सएप मैसेज पर क्लिक न करें, क्यूआर कोड स्कैन करने से पहले दो बार सोचें और ओटीपी, यूपीआई पिन, सीवीवी, पासवर्ड जैसी जानकारी किसी भी व्यक्ति को न बताएं, चाहे वह खुद को बैंक अधिकारी ही क्यों न बताए। आगे उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल सुरक्षा का सबसे मजबूत स्तंभ तकनीक नहीं,, बल्कि जनता की जागरूकता है।

आरबीआई ने सुरक्षा का ढांचा तैयार कर दिया है, अब नागरिकों को अपनी वित्तीय सुरक्षा के लिए खुद भी उतना ही सतर्क रहना होगा। आरबीआई का यह निर्णय न सिर्फ  डिजिटल बैंकिंग को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएगा, बल्कि भारत के साइबर सुरक्षा ढांचे को भी एक नई मजबूती प्रदान करेगा। हालांकि, असली सुरक्षा तब ही सुनिश्चित होगी जब लोग सही जानकारी रखें, सही डोमेन पहचानें और हर डिजिटल लेनदेन से पहले सावधानी बरतें।