अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस : बुजुर्ग हमारे जीवन की धरोहर और संस्कारों की जड़ों के समान
डा. वंदना, शिक्षिका
शिक्षा विभाग,सीडीएलयू सिरसा
हमारे दादा-दादी, नाना-नानी और परिवार के सभी वृद्धजन हमें जीवन की असली सीख देते हैं, इसलिए उनका आदर करना हमारा प्रथम कर्तव्य है। "बुजुर्ग हमारे जीवन की धरोहर और संस्कारों की जड़ों के समान हैं। उनका आशीर्वाद ही हमारी सबसे बड़ी पूँजी है। नई पीढ़ी तभी सच्चे अर्थों में सफल होगी जब वह अपने बुजुर्गों का आदर करेगी और उनके मार्गदर्शन को अपनाएगी।"
"समाज की प्रगति तभी संभव है जब हम अपने बुजुर्गों की सेवा करेंगे और उनकी सुरक्षा व देखभाल की जिम्मेदारी निभाएँगे। उनके अनुभव हमें कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की प्रेरणा देते हैं। इस दिन हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हर घर में बुजुर्गों को मान-सम्मान मिले।"
बुजुर्गों का स्थान सर्वोच्च है और हमें उनकी गरिमा बनाए रखने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहना चाहिए।
