द्वितीय शनिवार की छुट्टी में एफएलएन प्रशिक्षण का कार्यक्रम जारी करना शिक्षकों के अवकाश अधिकार और विद्यालयी व्यवस्था पर गंभीर सवाल
mahendra india news, new delhi
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ, जिला सिरसा ने निपुण हरियाणा मिशन के अंतर्गत 05 अक्टूबर से 10 अक्टूबर 2026 तक प्रस्तावित छह दिवसीय एफएलएन प्रशिक्षण के कार्यक्रम में 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को प्रशिक्षण निर्धारित किए जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज की है। जिला प्रधान विजय शर्मा ने बताया कि सभी खंड शिक्षा अधिकारी, कार्यालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार प्रशिक्षण 05 अक्टूबर से 10 अक्टूबर 2026 तक प्रात: 8:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक आयोजित किया जाना है।
उपलब्ध सरकारी/अधिकृत अवकाश संबंधी जानकारी के अनुसार 10 अक्टूबर 2026 द्वितीय शनिवार है और हरियाणा के 2026 अवकाश कैलेंडर में इसे अवकाश के रूप में दशार्या गया है। प्रधान शर्मा ने सवाल किया कि जब द्वितीय शनिवार नियत अवकाश है, तो उसी दिन अनिवार्य प्रशिक्षण का कार्यक्रम निर्धारित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? यदि छह दिवसीय प्रशिक्षण आवश्यक है, तो इसे निर्धारित कार्यदिवसों में समायोजित करने की योजना क्यों नहीं बनाई गई? उनका कहना है कि इस वर्ष पहले ही विभिन्न गैर शैक्षणिक कार्यों के चलते अनेक राजपत्रित अवकाश कार्यदिवसों में परिवर्तित किए जा चुके हैं।
सत्र के आरम्भ से लेकर जून की छुट्टियों तक में सभी रविवार सहित अन्य राजपत्रित अवकाश के दिनों में अध्यापकों से जनगणना का कार्य लेना हो, वोटर विशेष पुनरीक्षण अभियान के तहत अध्यापकों को शनिवार व रविवार को भी सम्बन्धित बूथ पर बैठने के आदेश देना हो, उल्लास के नाम पर 20 सितम्बर रविवार के दिन सभी विद्यालयों में अध्यापकों को बुलाना हो, सेवा संकल्प दिवस के नाम पर विद्यालय समय के बाद शाम को अध्यापकों को विद्यालयों में उपस्थित रहने के आदेश देना हो इसके अतिरिक्त 15 अगस्त विद्यालयी कैलेंडर में राजपत्रित अवकाश होने के बावजूद हर वर्ष विद्यालयों में धूम धाम से आयोजित किया जाता है और बदले में अगले दिन प्रतिपूर्ति अवकाश का प्रावधान है लेकिन इस बार वह प्रतिपूर्ति अवकाश भी विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ चुका है और अब प्रशिक्षण शिविरों के नाम पर राजपत्रित अवकाशों की बलि चढ़ाना न केवल सीधे-सीधे प्राथमिक अध्यापकों के अधिकारों का हनन है बल्कि विभागीय अधिकारियों द्वारा जानबूझकर अध्यापकों के धैर्य की परीक्षा ली जा रही है।
ऐसे में शिक्षक संगठन की मांग है कि इस तुगलकी फरमान वापस लिया जाए। चौपटा प्रधान सुधीर सुथार ने कहा कि शिक्षकों को प्रशिक्षण से कोई आपत्ति नहीं है। एफएलएन प्रशिक्षण आवश्यक है और शिक्षक गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के पक्षधर हैं, लेकिन प्रशिक्षण के नाम पर निर्धारित अवकाश दिवस को भी कार्यदिवस में बदल देना उचित नहीं माना जा सकता। इससे पहले उल्लास , सेवा संकल्प , ग्राम सभा ,स्वच्छ ग्राम संकल्प, बालविवाह मुक्त गांव आदि कार्यक्रमों में शिक्षकों को झोंका ही जा रहा है। स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्रता दिवस के अगले दिन प्रतिपूर्ति अवकाश पहले नियत होता था पर अब कभी भी प्रतिपूर्ति अवकाश हेतु पत्र जारी नहीं होता।
विभाग से ये की मांग:
संघ महासचिव विजय सहारण ने विभाग से मांग की कि 10 अक्टूबर 2026, द्वितीय शनिवार को निर्धारित एफएलएन प्रशिक्षण तत्काल स्थगित किया जाए। प्रशिक्षण को किसी नियमित कार्यदिवस में पुनर्निर्धारित किया जाए। भविष्य में प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाते समय सरकारी अवकाश एवं घोषित छुट्टियों को ध्यान में रखा जाए। शिक्षकों पर लगातार डाले जा रहे गैर-शैक्षणिक कार्यों की समीक्षा की जाए, ताकि उनका मूल दायित्व—बच्चों को नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना—प्रभावित न हो।
5. विभाग यह स्पष्ट करे कि यदि विद्यालयी कार्यदिवसों में प्रशिक्षण कराने का उद्येश्य बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता है, तो जनगणना, इछड, रकफ एवं अन्य विभागीय कार्यों के दौरान होने वाले शिक्षण-व्यवधान के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है।
द्वितीय शनिवार के प्रशिक्षण का बहिष्कार:
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने स्पष्ट किया कि 10 अक्टूबर 2026 को द्वितीय शनिवार के निर्धारित अवकाश के दिन आयोजित एफएलएन प्रशिक्षण में शिक्षक सहभागिता नहीं करेंगे और इस प्रशिक्षण का बहिष्कार किया जाएगा। संघ ने विभागीय अधिकारियों को आगाह करते हुए कहा कि शिक्षकों के अवकाश और सेवा-संबंधी अधिकारों की अनदेखी करके आदेश जारी करने की प्रवृत्ति पर पुनर्विचार किया जाए। शिक्षक प्रशिक्षण और विभागीय लक्ष्यों में सहयोग के लिए सदैव तैयार हैं, लेकिन इसके लिए नियमित कार्यदिवसों और अवकाश दिवसों के बीच संतुलन तथा स्पष्ट प्रशासनिक व्यवस्था आवश्यक है।
