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स्कूल बसों में जीपीएस, सीसीटीवी, फस्र्ट एड, स्पीड गवर्नर और अटेंडेंट का होना अनिवार्य

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It is mandatory for school buses to have GPS, CCTV, first aid, speed governor and attendant

Mahendra india news, new delhi
स्कूलों में विद्यार्थी पूरी तरह सुरक्षित रूप से पहुंचे, इसके लिए जरूरी है कि सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी की अनुपालना हर हाल में होनी चाहिए। समय-समय पर जांच के साथ ही उन वाहनों को इंपाउंड या चालान किया जाए, जो पॉलिसी के मापदंड के अनुरूप नहीं है।


ये निर्देश हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य अनिल कुमार व श्याम शुक्ला ने सुरक्षित वाहन पॉलिसी को लेकर लघु सचिवालय के सभागार में अधिकारियों के साथ बैठक में दिए। इस बैठक में एसडीएम डबवाली अर्पित संगल, एसडीएम सिरसा राजेंद्र कुमार, डीएसपी राजेश कुमार, सीडब्ल्यूसी की चेयरपर्सन अनीता वर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग की उप निदेशक डा. दर्शना सिंह, रोडवेज जीएम अनित कुमार यादव, जिला शिक्षा अधिकारी सुनीता साईं, रोडवेज यातायात प्रबंधक सुधीर कुमार, आरटीए से सहायक सचिव राकेश कुमार, डिप्टी डीईओ सुभाष फुटेला, अमित मनहार, ट्रैफिक एसएचओ इंस्पेक्टर शमशेर सिंह, सीडब्ल्यूसी मेंबर प्रियंका, आरएसओ सौरभ कुमार, संरक्षण अधिकारी डा. अंजना डूडी उपस्थित रहे।


आयोग के सदस्य अनिल कुमार ने कहा कि स्कूल बस के अंदर ही आरसी, इंश्योरेंस, लाइसेंस बस चालक के पास होना चाहिए। सभी बसों में स्पीड गवर्नर, सीसीटीवी कैमरे, फस्र्टएड बॉक्स, जीपीएस, फायर उपकरण हर हालत में उपलब्ध होना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हो तो बस को इंपाउंड या चालान कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्कूली विद्यार्थियों को यातायात सुविधा देने वाले हर वाहन की सही चेकिंग हो, परमिशन या परमिट होना चाहिए। जिन बस में एक बच्ची भी सवार है, उस बस के अंदर महिला अटेंडेंट का होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्राय: देखने में आया है कि सीसीटीवी कैमरे का लिंक ड्राइवर के पास होता है, जो पूरी तरह से गलत है। सीसीटीवी का लिंक स्कूल प्रशासन के पास हो, साथ ही तीन माह तक की रिकॉर्डिंग भी स्कूल को रखनी होगी।

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आयोग के सदस्यों ने जोर दिया कि जिला स्तर पर सुरक्षित वाहन पॉलिसी के तहत हर माह बैठक होनी चाहिए। इसमें वाहनों की जांच के दौरान जो खामियां पाई गई है, उन पर चर्चा हो और उन्हें दुरुस्त करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी जाए। उपमंडल स्तर पर भी ऐसी ही समीक्षा बैठक आरटीए की ओर से एसडीएम की अध्यक्षता में करवाई जाएगी। स्कूल संचालक ड्राइवर की पुलिस वैरिफिकेशन जरूर करवाएं, उन्होंने पुलिस को निर्देश दिए कि स्कूल ट्रांसपोर्ट में लगे वाहनों की मॉडिफिकेशन न हो और ऐसा करना दंडनीय कार्रवाई में आता है। उन्होंने यह भी कहा कि कई स्कूल बसों में गियर बॉक्स के साथ सीट बना दी जाती है, ये गलत है, ऐसी बसों को रोका जाए।


आयोग के दोनों सदस्यों ने कहा कि तीन साल बाद बस चालकों का रिफ्रेशर कोर्स करवाया जाए, बस चालक नशे की हालत में न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। स्कूल की चारदीवारी के अंदर ही पार्किंग की सुविधा होनी चाहिए, यहां से विद्यार्थियों को बसें लाने व ले जाने का काम करें। उन्होंने अधिकारियों से अब तक जांची गई बसों का विवरण भी मांगा। पुलिस विभाग की ओर से बसों की जांच और चालान करने के संबंध में जानकारी दी गई और जो खामियां सामने आई हैं, उनका भी उल्लेख किया गया।