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कुमारी सैलजा का बड़ा बयान, बोली शव के साथ प्रदर्शन पर सजा का फैसला जनविरोधी

मृत व्यक्ति के शरीर से परिजनों का अधिकार छीनने का षड्यंत्र

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मृत व्यक्ति के शरीर से परिजनों का अधिकार छीनने का षड्यंत्र

mahedra india news, new delhi

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस कार्य समिति की सदस्य, हरियाणा कांग्रेस की पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा ने बड़ा बयान जारी किया। कुमारी सैलजा ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के मृत शरीर पर उसके परिजनों का अधिकार होता है, लेकिन BJP-JJP गठबंधन सरकार ने इसे भी छीन लिया है। शव के साथ प्रदर्शन पर सजा का मंत्रिमंडल का फैसला पूरी तरह से जन विरोधी है। शव के साथ धरना-प्रदर्शन करने वालों को जेल भेजने व जुर्माना लगाने का कानून तुगलकी फरमान जैसा है।

बुधवार को कुमारी सैलजा ने जारी मीडिया  बयान में कहा कि भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार चुनावों में संभावित हार के चलते बौखला चुकी है। इसलिए ही द हरियाणा ऑनरेबल डिस्पोजल ऑफ डेड बॉडी बिल-2024 को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। इस बिल में शव के साथ प्रदर्शन, धरना या रोड जाम करने पर 06 महीने से 05 वर्ष तक कैद व एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है। 


कुमारी सैलजा ने कहा कि इससे साफ है कि सरकार नहीं चाहती कि सरकारी तंत्र की वजह से होने वाली मौत पर मृतक के परिजन न्याय के लिए अपनी आवाज उठा सकें। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अपने परिजन या रिश्तेदार के शव के साथ प्रदर्शन करना न तो स्टेट्स सिंबल है और न ही प्रदेश के लोग शव को साथ लेकर प्रदर्शन करने को अपनी शान मानते हैं। धार्मिक मान्यताओं के साथ तुरंत अंतिम संस्कार करने की बजाए शव के साथ प्रदर्शन या धरना लोग मजबूरी में देते हैं। मृतक के साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का यह सिर्फ एक तरीका मात्र है।

कुमारी सैलजा ने कहा कि कई बार लोग प्राईवेट या सरकारी अस्पताल में हुए गलत इलाज के खिलाफ आवाज उठाने के लिए शव को साथ लेकर प्रदर्शन करते हैं तो कई बार पुलिस हिरासत में हुई मौत के खिलाफ अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए ऐसा करते हैं। कितनी ही बार तो किसी न किसी सरकारी महकमे या फिर सीधे तौर पर मौत के लिए जिम्मेदार सरकारी तंत्र के खिलाफ अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने का एकमात्र माध्यम शव के साथ धरना या प्रदर्शन ही होता है। 


कुमारी सैलजा ने कहा कि किसी भी व्यक्ति से उनसे परिजन के शव को छीन कर अंतिम संस्कार करना धार्मिक मान्यताओं के भी खिलाफ है, जबकि ऐसा प्रावधान बिल में कर दिया गया है। यह कानून लागू होने के बाद लोगों पर न सिर्फ पुलिसिया अत्याचार बढ़ेगा, बल्कि अस्पतालों में भी इलाज में लापरवाही के मामले बढ़ने की संभावना है। प्रदेश सरकार को जन भावनाओं का आदर करते हुए पूरी तरह से आम जन के खिलाफ बनाए जा रहे इस कानून को अमल में लाने से तुरंत रोक देना चाहिए, अन्यथा प्रदेश की जनता चुनाव में गठबंधन सरकार को अच्छा सबक सिखाने का काम करेगी।