डेरा सच्चा सौदा के संत डा. गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां के एमएसजी अवतार दिवस पर साध-संगत ने देश-विदेश में लाखों पौधे रोपे, धरती को मिला हरियाली का तोहफा
mahendra india news, new delhi
पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन अवतार दिवस पर शुक्रवार को डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत ने देश-विदेश में बड़े पैमाने पर पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। सुबह 8 बजे अरदास के साथ शुरू हुए अभियान में गांवों, शहरों, खेतों और सार्वजनिक स्थानों पर लाखों छायादार, फलदार व औषधीय पौधे रोपे गए। साध-संगत ने पौधों को पेड़ बनने तक नियमित देखभाल करने का संकल्प भी लिया। डेरा सच्चा सौदा के प्रवक्ता एडवोकेट जितेंद्र खुराना इन्सां ने बताया कि 15 अगस्त को मनाए जाने वाले अवतार दिवस को साध-संगत पौधारोपण समेत 176 मानवता भलाई कार्यों के साथ मनाती है। इसी कड़ी में शुक्रवार को देश-विदेश में पौधारोपण अभियान चलाया गया।
- सुबह 8 बजे अरदास से शुरू हुआ अभियान
अभियान की शुरूआत हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश सहित देश-विदेश के विभिन्न स्थानों पर अरदास के शब्द बोलने और धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा का इलाही नारा लगाने के साथ हुई। इसके बाद दिनभर साध-संगत पौधारोपण में जुटी रही। परिवारों के सदस्यों ने सार्वजनिक स्थानों, खेतों, प्रतिष्ठानों के बाहर और अन्य उपयुक्त जगहों पर पौधे लगाए। रोपण के साथ पौधों को पानी भी दिया गया।
- डेरा परिसर में भी रोपे फलदार पौधे
शाह सतनाम जी-शाह मस्ताना जी धाम, डेरा सच्चा सौदा सिरसा की प्रबंधन समिति के सदस्यों और साध-संगत ने पौधारोपण किया। यहां अनार, आंवला, डेजी और किन्नू की विभिन्न किस्मों के पौधे रोपे गए। पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी भी ली गई।
- अब तक 35 करोड़ से अधिक पौधे रोपित
डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत पूज्य गुरु जी की शिक्षाओं पर चलते हुए अब तक देश-विदेश में 35 करोड़ 7 लाख 92 हजार से अधिक पौधे रोप चुकी है। इनमें से बड़ी संख्या में पौधे अब विशाल पेड़ों का रूप ले चुके हैं। पौधारोपण के क्षेत्र में डेरा के नाम कई विश्व रिकॉर्ड दर्ज हैं। इनमें 15 अगस्त 2009 को महज 8 घंटे में 68 लाख 73 हजार 471 पौधे रोपित करने का रिकॉर्ड प्रमुख है। साध-संगत पौधारोपण को सिर्फ अभियान तक सीमित रखने के बजाय लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल पर भी विशेष जोर देती है। इसके अलावा साध-संगत जन्मदिन, शादी की सालगिरह समेत परिवार के खुशी के मौकों पर भी नियमित रूप से पौधे रोपकर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती है।
