12वें त्रिवेणी युवा महोत्सव के तीसरे दिन मंच पर प्रस्तुत लोकनृत्य, नाटक, गीत, वाद्य संगीत और लोकगीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया
| Nov 12, 2025, 16:55 IST
Mahendra india news, new delhi
चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा में चल रहे 12वें त्रिवेणी युवा महोत्सव के तीसरे दिन विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। मंच पर प्रस्तुत लोकनृत्य, नाटक, गीत, वाद्य संगीत और लोकगीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विश्वविद्यालय परिसर उत्सव के उल्लास से सराबोर रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हरियाणवी लोककला से गहरा जुड़ाव रखने वाले विष्णु दत्त, (लोककवि लख्मी चंद के पौत्र) ने शिरकत की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में हिसार आकाशवाणी के जाने-माने उद्धघोषक आज़ाद दुहन उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि विष्णु दत्त द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर युवा कल्याण निदेशक डॉ मंजू नेहरा, प्रो. उमेद सिंह, प्रो. विष्णु भगवान, डॉ आनंद शर्मा, प्रो. हुकुमचंद, प्रो. मोनिका वर्मा सहित निर्णायक मंडल के सदस्य उपस्थित थे।
मुख्य अतिथि विष्णु दत्त ने कहा कि युवा ऊर्जा तभी सार्थक होती है जब उसमें सृजनशीलता और संस्कृति का समन्वय हो। उन्होंने कहा कि त्रिवेणी युवा महोत्सव युवा मन की उस सकारात्मक शक्ति का प्रतीक है, जो समाज में एकता, सहयोग और सांस्कृतिक गौरव की भावना को जगाती है। प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति शिक्षा का अभिन्न हिस्सा है, जो विद्यार्थियों को संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाती हैं। उन्होंने अपने दादा लोककवि लख्मीचंद के जीवन के प्रेरक संस्मरण साँझा करते हुए कहा कि लोककला और लोकसंस्कृति समाज की आत्मा होती हैं। लख्मी चंद जैसे महान कलाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जन-जागरण और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को इन मूल्यों को आत्मसात कर आगे बढ़ना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि आज़ाद दुहन ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के बिना समाज की प्रगति अधुरी है। आज की नारी हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही है, और ऐसे मंच उन्हें आत्मविश्वास तथा नेतृत्व क्षमता प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक गतिविधियाँ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में आत्म-अनुशासन, टीम भावना और सकारात्मक दृष्टिकोण का संचार करती हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को इस भव्य आयोजन के लिए बधाई दी और प्रतिभागियों को जीवन में निरंतर उत्कृष्टता के लिए प्रेरित किया। उन्होंने चुटकुले सुना कर युवाओं को अपनी एनर्जी चैनेलाइज करने के लिए भी प्रेरित किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार के टेक्निकल एडवाइजर प्रो. पंकज शर्मा ने मुख्य अतिथि को पटका पहनाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में प्रो. अशोक शर्मा, कल्चरल ककोऑर्डिनेट प्रोफेसर रणजीत कौर, जनसम्पर्क निदेशक डॉ अमित सांगवान, सहायक निदेशक युवा कल्याण निदेशालय राजेश छिकारा, डॉ रविंद्र, शाह सतनाम जी बॉयज़ कॉलेज के प्राचार्य दिलावर सिंह, शाह सतनाम जी गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्या गीता मोंगा सहित विभिन्न विभागों के डीन, डायरेक्टर, प्राध्यापक सहित संबंधित महाविद्यालयों के शिक्षकगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ चनप्रीत, डॉ टिम्सी, डॉ दीपिका शर्मा, डिम्पल व विक्रम द्वारा किया गया।
उल्लेखनीय है कि इस महोत्सव का समापन समारोह 14 नवम्बर को होगा, जिसमें विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।
चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा में चल रहे 12वें त्रिवेणी युवा महोत्सव के तीसरे दिन विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। मंच पर प्रस्तुत लोकनृत्य, नाटक, गीत, वाद्य संगीत और लोकगीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विश्वविद्यालय परिसर उत्सव के उल्लास से सराबोर रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हरियाणवी लोककला से गहरा जुड़ाव रखने वाले विष्णु दत्त, (लोककवि लख्मी चंद के पौत्र) ने शिरकत की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में हिसार आकाशवाणी के जाने-माने उद्धघोषक आज़ाद दुहन उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि विष्णु दत्त द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर युवा कल्याण निदेशक डॉ मंजू नेहरा, प्रो. उमेद सिंह, प्रो. विष्णु भगवान, डॉ आनंद शर्मा, प्रो. हुकुमचंद, प्रो. मोनिका वर्मा सहित निर्णायक मंडल के सदस्य उपस्थित थे।
मुख्य अतिथि विष्णु दत्त ने कहा कि युवा ऊर्जा तभी सार्थक होती है जब उसमें सृजनशीलता और संस्कृति का समन्वय हो। उन्होंने कहा कि त्रिवेणी युवा महोत्सव युवा मन की उस सकारात्मक शक्ति का प्रतीक है, जो समाज में एकता, सहयोग और सांस्कृतिक गौरव की भावना को जगाती है। प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति शिक्षा का अभिन्न हिस्सा है, जो विद्यार्थियों को संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाती हैं। उन्होंने अपने दादा लोककवि लख्मीचंद के जीवन के प्रेरक संस्मरण साँझा करते हुए कहा कि लोककला और लोकसंस्कृति समाज की आत्मा होती हैं। लख्मी चंद जैसे महान कलाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जन-जागरण और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को इन मूल्यों को आत्मसात कर आगे बढ़ना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि आज़ाद दुहन ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के बिना समाज की प्रगति अधुरी है। आज की नारी हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही है, और ऐसे मंच उन्हें आत्मविश्वास तथा नेतृत्व क्षमता प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक गतिविधियाँ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में आत्म-अनुशासन, टीम भावना और सकारात्मक दृष्टिकोण का संचार करती हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को इस भव्य आयोजन के लिए बधाई दी और प्रतिभागियों को जीवन में निरंतर उत्कृष्टता के लिए प्रेरित किया। उन्होंने चुटकुले सुना कर युवाओं को अपनी एनर्जी चैनेलाइज करने के लिए भी प्रेरित किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार के टेक्निकल एडवाइजर प्रो. पंकज शर्मा ने मुख्य अतिथि को पटका पहनाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में प्रो. अशोक शर्मा, कल्चरल ककोऑर्डिनेट प्रोफेसर रणजीत कौर, जनसम्पर्क निदेशक डॉ अमित सांगवान, सहायक निदेशक युवा कल्याण निदेशालय राजेश छिकारा, डॉ रविंद्र, शाह सतनाम जी बॉयज़ कॉलेज के प्राचार्य दिलावर सिंह, शाह सतनाम जी गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्या गीता मोंगा सहित विभिन्न विभागों के डीन, डायरेक्टर, प्राध्यापक सहित संबंधित महाविद्यालयों के शिक्षकगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ चनप्रीत, डॉ टिम्सी, डॉ दीपिका शर्मा, डिम्पल व विक्रम द्वारा किया गया।
उल्लेखनीय है कि इस महोत्सव का समापन समारोह 14 नवम्बर को होगा, जिसमें विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।
