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सीडीएलयू में गुरु रविदास शोध पीठ द्वारा ऑनलाइन व्याख्यान आयोजित, संत रविदास की वाणी सामाजिक समता का प्रतीक : प्रो. राजेश

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Online lecture organized by Guru Ravidas Research Centre at CDLU, Saint Ravidas's words symbolize social equality: Prof. Rajesh

mahendra india news, new delhi
चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा में संत शिरोमणि गुरु रविदास शोध पीठ के तत्वावधान में समता का स्वर विषय पर एक ऑनलाइन व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। यह कार्यक्रम वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर आयोजित हुआ, जिसमें देश के ख्यातिलब्ध शिक्षाविद् और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के हिंदी विभाग के प्रो. राजेश पासवान को मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया।

प्रो. राजेश पासवान ने संत शिरोमणि गुरु रविदास की वाणी में समता का स्वर विषय पर विस्तारपूर्वक विचार रखते हुए कहा कि संत रविदास की वाणी समाज में व्याप्त असमानता, भेदभाव और जातिगत शोषण के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने ऐसे समाज की कल्पना की थी, जहाँ सभी को समान अधिकार, सम्मान और अवसर प्राप्त हों। उन्होंने समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान की बात की और उसे सामाजिक संरचना का केंद्र माना।

प्रो. पासवान ने उदाहरणों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि संत रविदास की वाणी आज के सामाजिक परिप्रेक्ष्य में भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी उस कालखंड में थी। उन्होंने कहा कि जब आज भी समाज में जातिगत भेदभाव और असमानता की घटनाएँ सामने आती हैं, तब गुरु रविदास की शिक्षाएँ मार्गदर्शन का कार्य करती हैं। उनकी कविताओं और पदों में सामाजिक चेतना, आत्मसम्मान और न्याय की स्पष्ट अभिव्यक्ति मिलती है।

कार्यक्रम के आयोजक और शोध पीठ के प्रभारी डॉ. राकेश कुमार ने मुख्य अतिथि एवं विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे व्याख्यान युवाओं के भीतर साहित्यिक समझ के साथ-साथ सामाजिक चेतना भी विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि संत रविदास केवल एक भक्त या कवि नहीं थे, बल्कि वे एक सामाजिक क्रांतिकारी भी थे, जिन्होंने समतामूलक समाज की नींव रखने का कार्य किया।

इस ऑनलाइन व्याख्यान में विभिन्न महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों से कुल 55 विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। विद्यार्थियों ने पूरे व्याख्यान को गंभीरता से सुना और अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने संत रविदास की रचनाओं, उनके सामाजिक योगदान और वर्तमान समय में उनकी विचारधारा की प्रासंगिकता से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका प्रो. पासवान ने सरल और प्रभावशाली उत्तर दिया।