पद्मश्री अवार्डी पहलवान योगेश्वर दत्त ने किया सोल एक्वा वेलनेस सेंटर SIRSA का शुभारंभ
Mahendra india news, new delhi
सिरसा। भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई मानसिक रूप से परेशान है। भारत ऋषि-मुनियों की धरती रहा। आयुर्वेदिक उपचार पद्धति भारत में प्रख्यात रही है। ये बात और है कि बीच में कुछ समय के लिए बंद हो गई, लेकिन अब फिर से लोग उसी पुराने ढर्रे पर लौटने लगे हैं। लोगों में आयुर्वेद पद्धति के प्रति फिर से विश्वास जगा है। उपरोक्त बातें पद्मश्री अवार्डी पहलवान योगेश्वर दत्त ने सिरसा में बस स्टेंड के सामने होटल मेरिटोन में सोल एक्वा वेलनैस सेंटर के उद्घाटन के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कही। इस मौके पर पारिवारिक सदस्य धनराज मेहता, गौतम मेहता, ओमप्रकाश मेहता, अशोक, सुनील मेहता, अधिराज पुत्र गौतम मेहता, राजेश कुमार मेहता सहित सैकड़ों रिश्तेदार व महानुभाव भी मौजूद रहे।

उन्होंने सर्वप्रथम सैंटर की संचालिका डा. सोफिया मेहता को बधाई व शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सिरसा जैसी धरती पर इस प्रकार का सैंटर स्थापित होना सिरसावासियों के लिए बेहद कारगर साबित होगा। योगेश्वर दत्त ने कहा कि पंचकर्मा व न्यूरोथेरेपी पद्धति केरला में प्रसिद्ध है, लेकिन धीरे-धीरे ही सही लोग अब अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरूक हो रहे हैं। प्रदेश में इस पद्धति के प्रति लोगों में जागरूकता न होने के कारण इसका प्रचार कम है, लेकिन अब लोग इस पद्धति पर विश्वास करने लगे हैं और एलोपेथिक के बजाय इस पद्धति से उपचार करवाकर अपने स्वास्थ्य को मजबूत बना रहे हैं। उन्होंने युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वो नशे से दूर रहकर अपने माता-पिता की सेवा करें। अपनी सनातन संस्कृति को न छोड़ें और एकांत जीवन की बजाय संयुक्त परिवार में रहकर अपनों से जुड़ें रहे।

उपचार में बेहद कारगर है यह पद्धति: डा. सोफिया मेहता
इस मौके पर डा. सोफिया मेहता ने अपने अनुभव सांझा करते हुए बताया कि वर्ष 2016 में वह यह पद्धति सिरसा में लेकर आने वाली थी, लेकिन किसी कारणवश उनका यह प्रयास सिरे नहीं चढ़ पाया। डा. मेहता ने बताया कि लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार उन्होंने अपने लक्ष्य को अंजाम तक पहुंचा दिया और आज इस सेंटर की शुरूआत योगेश्वर दत्त ने की है। उन्होंने बताया कि जंक फूड के अधिक प्रयोग से बिमारियों की भरमार है।
इस पद्धति के बारे में विस्तार से जिक्र करते हुए बताया कि इस प्रक्रिया में सर्वप्रथम मरीज की नाड़ी चैक की जाती है, फिर वात-पित्त चैक करते हैं। बिमारी का पता चलने पर उसका उपचार मिट्टी और जड़ी-बूटियों से किया जाता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एलोपेथिक व अन्य दवाइयां किसी भी बिमारी को तुरंत ठीक तो कर देती है, लेकिन जड़ से खत्म नहीं करती। उसी प्रकार इस पद्धति में बिमारी को ठीक होेने में थोड़ा समय जरूर लगता है, लेकिन बिमारी का जड़ से सफाया होता है। केरला के प्रसिद्ध फिजियोथेरेपी द्वारा उपचार किया जाएगा। डा. सोफिया ने बताया कि परामर्श नि:शुल्क रहेगा, जो कोई भी ले सकता है, लेकिन नाड़ी देखने व उपचार के लिए अलग-अलग पैकेज निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने सिरसावासियों से आह्वान किया कि वे एक बार सेंटर पर आकर इस उपचार पद्धति का लाभ जरूर उठाएं।
