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बिश्नोई सभा सिरसा के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में कथा का हुआ शुभारंभ, सत्संग से ही मनुष्य का उद्धार संभव: स्वामी गोविंदशरणानंद महाराज

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Religious discourse series begins to mark the founding day of Bishnoi Sabha Sirsa; human salvation is possible only through *Satsang* (spiritual gathering): Swami Govindsharananand Maharaj

mahendra india news, new delhi

 बिश्नोई सभा सिरसा के 52वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक दिव्य कार्यक्रम के अंतर्गत सोमवार को जंभवानी हरिकथा एवं प्रवचन का शुभारंभ हुआ। प्रचार सचिव डा. मनीराम सहारण ने बताया कि कथा का श्री गणेश पवित्र जोत प्रज्ज्वलन व हवन से हुआ, जिसमें संतजनों के अतिरिक्त सभा प्रधान खेमचंद बैनीवाल, उप प्रधान कृष्ण पाल बैनीवाल सचिव ओ पी बिश्नोई, सह सचिव व कार्यकारी सचिव भूप सिंह कसवां, कोषाध्यक्ष राजकुमार बैनीवाल, सह सचिव जगतपाल कड़वासरा, कार्यकारिणी सदस्यों ने उपस्थिति दर्ज करवाई।

कथा व्यास आचार्य स्वामी गोविन्दशरणानंद ने अपने मुखारबिंद से कथा का रसपान करवाया। साथ में स्वामी अमृतानंद व स्वामी सर्वानंद महाराज का भी सान्निध्य रहा। आचार्य जी ने सत्संग की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि जिस प्रकार लोहा-काठ के संग तर जाता है, उसी प्रकार अच्छा संग करने से यानी सत्संग करने से मनुष्य का उद्धार हो जाता है। प्रात: ब्रह्म मुहूर्त में उठने के बाद बिश्नोई पंथ के 29 नियमों में पहले प्रात: स्नान की पालना होती है।  आचार्य अमृतानन्द महाराज ने इसका महत्व बताते हुए कहा कि किसी भी बहुमूल्य वस्तु के दान से भी अधिक महत्ता इस स्नान की होती है। अर्थात हमारा तन भी पवित्र व मन भी पवित्र हो।

सत्संग में आने पर हमारा मन परमात्मा की तरफ होता है तथा जीवन उद्देश्य की प्राप्ति होती है। कथा में नजदीक गांव में ढाणियों से सैकड़ों की संख्या में महिलाओं, पुरुषों व बच्चों ने भाग लिया। श्रद्धालुओं के लिए सभा द्वारा बस का प्रबंध किया गया था। इस मौके पर समाज के गणमान्य महानुभावों के अतिरिक्त सेवक दल से जिले सिंह पटवारी, दिलीप सिंह मांझू, दरबारा सिंह कड़वासरा, जगदीश, देश कमल बिश्नोई, हनुमान गोदारा, जनक राज बैनीवाल, रिछपाल बैनीवाल, पुजारी धनाराम, प्यारे लाल बैनीवाल, जाट सभा प्रधान मोहनलाल झोरड़ आदि उपस्थित थे। आरती व प्रसाद के साथ ही कथा को विश्राम दिया गया।

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