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बाहर की बजाय अपने अंदर के अंधकार को दूर करें: रघुबीर महाराज

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Remove the darkness within you rather than outside: Raghubir Maharaj

mahendra india news, new delhi
सिरसा। प्रभु रामलाल नर सेवा नारायण सेवा योग ट्रस्ट सिरसा भावन-2266, सेक्टर 20, पार्ट 3 में दिवाली के पावन पर्व पर योग गुरु रघुबीर महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को अपने सम्बोधन में फरमाया कि दिवाली का त्योहार सत्य की असत्य पर, धर्म की अधर्म पर जीत का त्योहार है।

जब मर्यादा पुरषोतम भगवान राम ने लंकापति रावण को उसके पापों व अन्याय के कारण मार दिया, तब अयोध्या पहुंचने पर वहां लोगों ने खुशी में उत्साह में घी के दीपक जलाए। इसी दिन ही माता लक्ष्मी जी की पूजा होती है, ताकि घरों में लक्ष्मी जी आये हम सब धन-धान्य सम्पन्न बनें। तब से यह प्रथा चली आ रही है। हम सब भी दिवाली की रात दीपक जलाते हैं। इस प्रकार लोग खुशी-खुशी सो जाते हैं।

इस प्रकार प्रभुजी की कृपा से मैं सोचता हूं कि हमने एक रात दीपक जलाए और वे थोड़ी देर बाद बुझ गये? क्या इससे हमारे अन्दर का अन्धकार दूर हो जायेगा? क्या हमारे विषयों में पद-पदार्थों में सोया हुआ मन ज्योत स्वरूप बन पायेगा। गुरु ग्रन्थ साहिब में सच ही कहा है कि मन तू ज्योत स्वरूप है, अपने आप पहचान। इस विषय में परमसत्व गुरु अमरदास  महाराज फरमाते हैं कि जे सौ चन्दा उगवे, सूरज चढ़े हार, एैते पालन होदियां गुरु बिन धारे आधार। बाहर के अंधकार को बिजली द्वारा दूर किया जा सकता है, पर भीतर के अन्धकार को, अज्ञान को सतगुरु की कृपा बिना नहीं दूर किया जा सकता।

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रघुबीर महाराज ने आगे फरमाया कि अज्ञानी के जीवन में साल में एक बार दिवाली आती है, पर ज्ञानवान के जीवन में सदैव, हररोज आती है। इस सम्बन्ध में किसी ने सत्य ही कहा है कि सदा दिवाली साध की आठों पहर बसन्त। सन्त के जीवन में हर रोज दिवाली आती है।

उसके जीवन में हरपल खुशी और आनन्द बना रहता है। जगत गुरु स्वामी देवी द‌याल की कृपा से हमने उच्च विचार व दिव्य ज्ञान पाया, उनको मेरा अनन्त बार प्रणाम। इस मौके पर शक्ति चावला, यश चावला योगाचार्य, नरेश छाबड़ा, गुरबख्श मोंगा, अरुण चौधरी, अमित नरुला, संजय, उर्मिल, राज चावला, जमीत, लक्ष्य, अयान, अंकिता, गौरी, सुमन आरशिया आदि भक्त मौजूद थे।
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