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रिटायरमेंट का अर्थ सेवानिवृति है, नहीं और कोई भी रिटायर्ड व्यक्ति फ्यूज बल्ब नही बल्कि....

 रिटायर्ड लोग इस राष्ट्र के लिए कुछ महत्वपूर्ण योगदान कर सकते है जो निम्न हैं
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रिटायर्ड लोग इस राष्ट्र के लिए कुछ महत्वपूर्ण योगदान कर सकते है जो निम्न हैं
mahendra india news, new delhi

लेखक
नरेंद्र यादव
नेशनल वाटर अवॉर्डी
यूथ डेवलपमेंट मेंटर एंड वॉलंटियर

ने बताया कि आजकल रिटायर्ड व्यक्तियों को डाइमोर्लाइज करने का अभियान सा चल रहा है, जिधर देखो ऐसी ही कहानियों का प्रतुतिकरण किया जा रहा हैं, ऐसा लगता है जैसे जो व्यक्ति 58 या 60 साल का हो गया है वो बिल्कुल बेकार हो गया हैं, अरे, मैं तो ये कहता हूं कि जो रिटायर्ड हो गए , वो लेजर लाइट है आज कल के तो चाइनीज बल्ब है चले तो चले नही तो दो दिन भी ना चले।

अधिकतर तो वर्तमान में ऐसे ही बल्ब हैं। दोस्तो , पहली बात तो सभी को ये समझनी चाहिए कि रिटायरमेंट का अर्थ सेवा निवृत्ति तो कतई नहीं होता है क्योंकि सेवा का मतलब कभी नौकरी नही होता है और नौकरी का अर्थ सेवा नही होता हैं। ये केवल किसी विभाग से अलग होने की प्रक्रिया है, अगर आप देश में चारों ओर नजर दौड़ाओगे तो आप पाएंगे कि जो लोग देश को चला रहे है वो अधिकतर 60 साल से अधिक के ही हैं।

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जीवन में अनुभव तो उम्र के साथ ही आता है और आजकल तो 60 साल की आयु तो जीवन का मध्यकाल हैं, इस उम्र में तो बल्ब का वॉट ज्यादा बढ़ जाता है, इसकी चमक अथवा रौशनी ज्यादा बढ़ जाती हैं क्योंकि किसी भी इंसान का अनुभव ही तो उसकी रौशनी होती है, उसका उजाला होता हैं। ये खुद के ऊपर आधारित है कि वो उस रौशनी को दूसरे के उपयोग में लाना चाहता है या फिर अपने बल्ब को खुद ही स्विच ऑफ कर लेता हैं। यहां सवाल बल्ब के फ्यूज का नही हैं , प्रश्न बल्ब के ओन अथवा ऑफ का हैं। इसके फ्यूज होने का तो बिलकुल नहीं हैं और वैसे भी कोई व्यक्ति सेवा से कभी छुटकारा नही पा सकता है, हां वो अपनी नौकरी से जरूर नियमानुसार अलग हो जाता है, उसकी सेहत भी अच्छी होती हैं बस सवाल इस बात का है कि आप अपने अनुभव का लाभ कितने लोगों तक पहुंचा सकते हो ?

परंतु हम तो अपने घर में घुस कर बैठ जाते है या फिर जहां पैसे मिलते है वहां काम करते हैं और वैसे भी जब काम कर रहे ही हैं, तो फिर फ्यूज बल्ब कैसे हो गए। आज देश को एक करोड़ मेंटर की जरूरत है कितने ऐसे लोग है जो नेशनल मेंटरिंग सेवा में काम करना चाहते है लेकिन उस में पैसा कुछ नही मिलेगा, आपको केवल सप्ताह में एक दिन दस बच्चों , किशोरों अथवा युवाओं को ह्यूमन वैल्यू की ट्रेनिंग देनी हैं, कितने लोग तैयार है राष्ट्र की सेवा के लिए। कहने वाले या लिखने वाले तो बहुत मिल जाते है और लिखते भी वही लोग है जिन्हे सरकारी एंप्लॉयी से चिढ़ होती है कि आप रिटायर हो गए , ये केवल फ्यूज बल्ब रह गए है।

अगर वैसे देखे तो सरकारी सेवाओं में रहे लोग ही  समाज का कुछ कर पाते है, जो व्यवसाई या उद्योगपति वगैरा तो वैसे भी अपने लाभ के सिवाय कुछ ज्यादा करते नही हैं। वो तो अपने सी एस आर फंड को भी खुद ही अपने ही फायदे या अपने ही नाम के लिए ही खर्च करते हैं, सी एस आर का पैसा तो अपने प्रचार अथवा अपने ही प्रसार में ही खर्च करते हैं परंतु कुछ लोगों ने सरकारी नौकरी से रिटायर लोगों को इतना बेकार बताने की कौशिश की हैं कि जैसे रिटायर्ड लोग तो किसी काम के नही रहते हैं। अरे फ्यूज बल्ब को कौन अपने घर में रखता है, फ्यूज बल्ब को कौन सा अनुभव होता है, और उसका अनुभव किसके काम आता है।

मैं यहां रिटायर्ड लोगों तथा समाज में विराजमान अन्य लोगों को भी बड़ी विनम्रता से कहना चाहता हूं कि कोई भी रिटायर्ड व्यक्ति फ्यूज बल्ब नही बल्कि ज्यादा रौशनी देने वाली ट्यूबलाइट हैं, और इससे इसमें भी कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि रिटायर्ड लोग लेजर लाइट हैं। ये तो समाज के ऊपर है कि आप ऐसे लोगों का कितना फायदा लेते है। आप उन्हे बिना लाइट का मानते हो या फिर लेजर लाइट मानते हैं।

मेरा अनुभव वा मेरा मन मानता है कि रिटायर्ड लोग इस राष्ट्र को कुछ महत्वपूर्ण योगदान कर सकते है जो निम्न हैं, जैसे ;
1. नई जेनरेशन के बच्चों को सरकारी नौकरी के लिए तैयारी में सहयोग करना।
2. समाज में बच्चों , किशोरों तथा युवाओं के व्यक्तित्व विकास में सहयोग करना।
3. अपनी रुचि के अनुसार समाज में मेंटर के रूप में कार्य करना जिससे बच्चें तथा युवाओं को सकारात्मक दिशा मिल सकें।
4. जो सिविल सर्वेंट रहे है वो उन बच्चों को सिविल सर्विसेज में जाने के लिए उन्हे मोटिवेट कर सकते हैं।
5. युवाओं और बच्चों को उनके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए उन्हे अच्छी अच्छी बाते शेयर कर सकते हैं।
6. युवाओं तथा बच्चों को नशे में जाने से रोकने में सहयोग कर सकते हैं।


7. अपने समाज में दस बच्चे अपने साथ जोड़ कर , उन्हे अपनी मेंटरिंग में रखे जिससे उन्हें इंटरेक्शन करने का अवसर मिल सकें, और अपनी मन में चल रही विभिन्न दुविधाओं का हल कर सकें।
8. रिटायर्ड महिलाएं बेटियों को सशक्त करने में अपना सहयोग प्रदान कर सकती है, जैसे जो बेटियां टिनएज में आती है उन्हे विपरित सेक्स की तरफ जाने के लिए कुछ लड़के दिशा भ्रमित कर देते है उन्ही से बचाने के लिए बेटियों को रिटायर्ड महिलाओं के अनुभव का फायदा मिल सकता हैं। 


9. कुछ बच्चों के मातापिता इतने पढ़े लिखे नही होते है जो उनकी समस्याओं का समाधान कर सकें, ऐसे बच्चों के लिए रिटायर्ड लोग बहुत फायदेमंद साबित होते हैं।
10. अपने गांवो में , अपने कस्बों में सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए भी रिटायर्ड लोग ज्यादा लाभकारी साबित होते हैं।


   मैं, उन साथियों को बड़ी सहजता से कहना चाहता हूं कि मुझे रिटायर हुए लगभग आठ महीने हो गए है और मैं उन बच्चों को लेकर कार्य कर रहा हूं जो 6 से 12 year के है और एक वर्ष बाद किशोरावस्था अथवा टिनएज में जाने को तैयार है। और उनमें हार्मोनल चेंज की वजह से शारीरिक तथा मानसिक बदलाव आने वाले है, उनके मन में बहुत कुछ चलने वाला है जिसका जबाव उनके पेरेंट्स के पास भी नही हैं, जो विपरित सेक्स की ओर झुकेंगे, जिन्हे शो ऑफ करने का भी मन करेगा, जो अपने पियर प्रेशर को भी झेलेंगे, उन पर मातापिता की चाहत का दबाव भी आयेगा, जिन्हे अपने भविष्य के निर्माण को भी देखना है, तथा अपने को सुंदर बनाने का भी प्रेशर होगा, इसी को देखते हुए मैने , 100 फुटबाल क्लब स्थापित किए है,

उनके  माध्यम से लगभग तीन हजार बच्चों पर काम कर रहा हूं जो अपनी टिनएज में पहुंचकर , किसी भी प्रकार से रास्ते से नही भटक पाएंगे, उन्हे अपने मन की बात करने का भी बहुत अच्छा अवसर मिलता है। और उन्हे अपना  बेहतरीन व्यक्तित्व बनाने का भी मौका मिल रहा हैं। ऐसे ही अगर कोई भी रिटायर्ड साथी हमारी इस मुहिम में सहयोग करना चाहते है तो हमारे साथ भारतीय फुटबाल बैंक में अपनी सेवाएं दे सकते हैं, चाहे वो व्यैक्तिक रूप से अथवा ग्रुप में भी हमे फुटबाल देकर अथवा बच्चों के लिए किट उपलब्ध करा कर भी सहयोग कर सकते हैं। या फिर स्वतंत्र रूप से भी अपनी सेवाएं समाज को दे सकते है,'

क्योंकि मैं यहां जो कहना चाहता हूं वो ये है कि आज समाज में हमारे बच्चों तथा किशोरों को अनुभव वाले लोगों की बहुत अधिक आवश्यकता हैं। मैं तो सभी रिटायर्ड पुरुषों तथा महिलाओं को यही कहना चाहता हूं कि अपने को कभी फ्यूज बल्ब ना समझो , लोग तुम्हे हतोत्साहित करेंगे, परंतु आप अपने को ज्यादा वॉट का चमकता हुए बल्ब समझे या फिर अपने को लेजर लाइट समझें, जिससे समाज तथा राष्ट्र का कल्याण हो सकें। और भारत की नौजवान पीढ़ी देश के उत्थान में लग सकें, देश ज्यादा से ज्यादा मेडल लेकर आ सकें, ज्यादा से ज्यादा बच्चे ब्रह्मचर्य का पालन कर सकें, और सभी बच्चें वा युवा अपनी ऊर्जा को खुद तथा  देश के विकास में लगा सकें तथा भारत को विकसित देश बनाने में अपना आत्मिक सहयोग करें सकें।
जय हिंद, वंदे मातरम