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स. प्रकाश सिंह बादल राजनीति में रहकर दरवेश इंसान थे वीरभान मेहता

राजनीति में शिखर तक पहुंचे स. प्रकाश सिंह बादल का फलसफा बड़ा ही सरल था
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file photo

mahendra india news, new delhi

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरभान मेहता ने बताया कि मेरा लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है। तीन बार जनता ने मुझे लगातार नगर पार्षद बनाया और सिरसा नगर परिषद का मैं उपाध्यक्ष भी रहा। इस राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे। हरियाणा जनहित कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन सफलता नहीं मिली। तब मैंने सोचा कि राजनीति छोडक़र अपने सामाजिक कामकाज करूं। इसी दौरान खेतीबाड़ी में रुचि होने के कारण उधर अपना ध्यान केंद्रित किया।


खेतीबाड़ी के कामकाज के दौरान पंजाब के Former Chief Minister  स. प्रकाश सिंह बादल से भेंट हुई। अपनी पहली मुलाकात में ही मैं उनकी शख्सियत और लासानी तहजीब का कायल हो गया। इसके बाद तो लगातार उनसे मुलाकात का सिलसिला बन गया। कई बार तो ऐसा हुआ कि बिना वजह ही उनसे मिलने के लिए चला जाता। राजनीति की काल कोठरी में रहकर उजला रहने वाले एक ऐसे राजनेता को मैंने अपने जीवन में देखा जिसका पूरा जीवन किसानों को समर्पित व मानवता के प्रति प्रेरणापुंज था।

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राजनीति में शिखर तक पहुंचे स. Prakash Singh Badalका फलसफा बड़ा ही सरल था। वे हर व्यक्ति से इस तरह मिलते थे मानो पहले कई बार मिल चुके हों। मैं जाता तो आओ मैहता साब... कहकर इज्जत देते। पांच बार पंजाब जैसे बड़े प्रांत के मुख्यमंत्री रहने के बावजूद घमंड उनके पास से भी नहीं गुजरा था। सुकून भरी जिंदगी जीने वाले प्रकार सिंह बादल जिंदगी के 96 बसंत देख चुके थे। 25 अप्रैल 2023 का वह मनहूस दिन था, जब वे इस दुनिया से अलविदा कह गए। उनके जाने के बाद जीवन में शून्यता का बोध होता रहा।


अभी 11 अक्टूबर बुधवार को कई दिन बाद Prakash Singh Badal साहब के बालासर (रानियां) सहित फार्म हाउस पर बरबस ही जाने को मन हुआ। फार्म हाउस में पहले जैसी रमणीकता, सौंदर्य और हरियाली का वातावरण देखकर मन बहुत खुश हुआ। भीतर उस कमरे में कई देर तक बैठा रहा जहां कभी बादल साहब के साथ सुकून भरी बातें हुआ करती थीं। ऐसा बार-बार लगा कि अब बादल साहब आएंगे। पर जाने वाले कहां आते हैं?

Prakash Singh Badal साहब के साथ रिश्ते पारिवारिक बन गए। वे या उनके परिवार का कोई भी सदस्य सिरसा आता तो मेरे परिवार से जरूर मिलता। इसी तरह चंडीगढ़ में होते तो भी उनसे मुलाकात अकसर होती रहती थी। उन्होंने कभी भी यह अहसास नहीं होने दिया कि हमारा परिवार उनसे कहीं भी अलहदा है। बल्कि इस पारिवारिक सांझ को उन्होंने खूब खाद-पानी देकर सींचने का काम किया। ऐसे नरोत्तम इंसान कभी कभी ही पैदा होते हैं और जब वे दुनिया से जाते हैं तो ऐसी यादें छोडक़र जाते हैं जो कभी भुलाए नहीं भूलती।


उनके साथ बिताए लगभग 13 साल कमरे में बैठे-बैठे ठिठक-ठिठककर सामने आते महसूस हुए। आम आदमी के हक और किसान की मुश्किलों पर उनसे बहुत बार चर्चा होती थी। मैं देखता था कि कैसे इतने बड़े ओहदे पर पहुंचे इंसान को आज भी अपनी धरती याद है। पूरे देश के बड़े राजनेताओं के साथ उनके गहरे संबंध थे और वे एक ऐसे व्यक्ति थे जो इंसान के रूप में देवता ही थे। छह महीने बाद उनके फार्म हाउस पर नि:स्वार्थ देखभाल करने वाले सरपंच अमरजीत से मुलाकात हुई। मंैने फार्म हाउस की इतने करीने से सार-संभाल के लिए उनकी पीठ थपथपाई। चाय पीकर वापस लौट रहा था तो वह गीत बरबस याद आ गया-
जाने चले जाते हैं कहां, दुनिया से जाने वाले...

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरभान मेहता