प्रणामी निज धाम चोपटा में सत्संग व भंडारे का आयोजन, जहाँ सदबुद्धि होती है वहां सुख समृधि होती है : साध्वी प्रभाकर
प्रणामी निज धाम चोपटा में वार्षिक उत्सव के तहत सत्संग व भण्ढारे का आयोजन कर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया। सत्संग कथा के दौरान कथावाचक साध्वी प्रभाकर ने कहा कि जहाँ सदबुद्धि होती है वहां सुख समृधि होती है. और जहाँ कुमति होती है वहां विपदा आती रहती है. मनुष्य को क्रोध, लोभ, ईष्र्या, काम आदि से दूर रहकर सतकर्म करने चाहिए।
भगवान की कृपा होने पर अज्ञानता का नाश हो जाता है व ज्ञान के दरवाजे खुल जाते हैं। साघ्वी प्रभाकर ने राजा नहुष की कथा का वर्णन करते हुए कहा की राजा नहुष की कथा भारतीय पौराणिक कथाओं में अत्यंत प्रसिद्ध है। वृत्रासुर वध के कारण इंद्र पर ब्रह्महत्या का दोष लगा और ऋषि दुर्वासा के श्राप से वे शक्तिहीन होकर स्वर्ग छोड़ गए।

इस अवसर पर असुरों ने स्वर्ग में उत्पात मचाया। तब देवताओं ने सप्तर्षियों की सलाह पर पृथ्वी के प्रतापी राजा नहुष को स्वर्ग का राजा बनाया। नहुष ने अपनी शक्ति से असुरों को पराजित कर स्वर्ग में शांति स्थापित की। कुछ समय बाद नहुष में अहंकार आ गया। वे स्वयं को तीनों लोकों का स्वामी समझने लगे और इंद्राणी शची पर कुदृष्टि डालने लगे। शची की शर्त पर नहुष ने सप्तर्षियों से डोली उठवाई।
मार्ग में क्रोधित होकर उन्होंने ऋषि अगस्त्य को लात मार दी। इससे क्रुद्ध होकर ऋषियों ने नहुष को अजगर बनने का श्राप दे दिया। यह कथा अहंकार के विनाश की शिक्षा देती है। कथा समापन पर भंडारा लगाकर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस मौके कई श्रद्धालु मौजूद रहे।
