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पंजाब की मौड़ मंडी से श्री बाबा तारा जी कुटिया पहुंचे स्कूली बच्चे

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School children from Maur Mandi, Punjab, arrived at Shri Baba Tara Ji Kutia

MAHENDRA INDIA NEWS, NEW DELHI
 पंजाब के मौड़ मंडी स्थित एसीटी डीएवी पब्लिक हाई स्कूल के विद्यार्थियों एवं अध्यापकों का एक दल अध्ययन व धार्मिक भ्रमण के तहत सिरसा स्थित प्रसिद्ध श्री बाबा तारा जी कुटिया पहुंचा। करीब 70 विद्यार्थियों और अध्यापकों के इस दल ने कुटिया परिसर में स्थित विभिन्न धार्मिक स्थलों के दर्शन किए और वहां की आध्यात्मिक व्यवस्था एवं अलौकिक सौंदर्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

कुटिया परिसर पहुंचने पर विद्यार्थियों और अध्यापकों का स्वागत किया गया। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं ने सर्वप्रथम श्री बाबा तारा जी की समाधि स्थल पर शीश नवाया और आशीर्वाद प्राप्त किया। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने कुटिया में स्थित पवित्र गुफा के दर्शन किए, जहां स्थापित द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर सभी भावविभोर हो उठे। बच्चों को इस पवित्र स्थान के इतिहास और श्री बाबा तारा जी के जीवन व संदेशों के बारे में जानकारी दी गई।
           

 इसके उपरांत, दल ने श्री तारकेश्वरम धाम का अवलोकन किया। धाम में स्थापित विशालकाय शिव प्रतिमा और भव्य शिवालय ने विद्यार्थियों व अध्यापकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। पूरे कुटिया परिसर का भ्रमण करते हुए अध्यापकों ने कहा कि इस स्थान पर आकर जो आत्मिक शांति और सुकून का अहसास होता है, वह अद्वितीय है। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों एवं अध्यापकों के प्रतिनिधिमंडल ने कुटिया के मुख्य सेवक गोबिंद कांडा से भी शिष्टाचार मुलाकात की। मुख्य सेवक ने विद्यार्थियों को मन लगाकर पढ़ने, गुरुओं का आदर करने और समाज सेवा के पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। अध्यापकों ने मुख्य सेवक को बताया कि बच्चों के सर्वांगीण विकास और उन्हें अपनी सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से इस भ्रमण का आयोजन किया गया था।
एसीटी डीएवी स्कूल के अध्यापकों रवीना रानी, संदीप कौर, मंजू शर्मा, पलक, जोगीश शर्मा व अंजू गर्ग ने कुटिया परिसर की स्वच्छता, भव्यता और सुचारू व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि श्री बाबा तारा जी कुटिया एक अत्यंत दर्शनीय और मनमोहक धाम है। यहां का सुंदर, शांत और आध्यात्मिक वातावरण मन को असीम सुकून प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि सिरसा की यह कुटिया केवल धार्मिक आस्था का ही केंद्र नहीं है, बल्कि यह श्रद्धालुओं को सेवा, समर्पण और शांति का भी संदेश देती है। भ्रमण के अंत में विद्यार्थियों और अध्यापकों ने इस अलौकिक यात्रा को अपने जीवन का एक यादगार अनुभव बताया और कुटिया प्रबंधन की उत्कृष्ट व्यवस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

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