बाजेकां में समाजसेवी अमीर चावला ने शिवपुरी में भट्टी की रखी नींव, लोगों को किया जागरूक
mahendra india news, new delhi
पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य को लेकर बाजेकां गांव ने नई पहलकदमी दिखाते हुए फैसला लिया है कि भविष्य में अब खुले में शवों का अंतिम संस्कार करने की बजाय शव दहन भट्ठी के द्वारा अंतिम संस्कार करने को तरजीह दी जाएगी, जिससे लकड़ी की भारी बचत होगी, वहीं पर्यावरण भी दूषित होने से भी बचेगा।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं एस.एस. बोर्ड के पूर्व चेयरमैन समाजसेवी अमीर चावला ने शनिवार को बाजेकां गांव की शिवपुरी में शव दहन भट्ठी की नींव रखी। चावला ने इस दौरान भट्ठी के निर्माण पर खर्च होने वाली करीब 4 लाख रूपये की राशि खुद वहन करने की बात कही। सरपंच प्रतिनिधि राजेंद्र सिंह कंग ने ग्राम पंचायत की ओर से मुख्यातिथि का धन्यवाद करते हुए इस प्रयास को पर्यावरण के लिए बेहतर कदम बताया।
समासेवी चावला ने कहा कि यह कटु सच्चाई है कि जो इन्सान इस संसार में आया है तो उसे एक दिन जाना भी है, तो क्यों ना जीवन में ऐसा कार्य किया जाए जो आने वाली पीढिय़ों के लिए फायदेमंद हो और पर्यावरण संरक्षण में भी कारगर हो। उन्होंने बताया कि आमतौर पर शव का अंतिम संस्कार करने के दौरान साढ़े तीन क्विंटल लकड़ी का प्रयोग होता है जिसकी कीमत बाजार में 5 हजार रूपये के करीब पड़ती है। इतनी लकड़ी एकत्रित करने के लिए हमें डेढ़ पेड़ की बलि देनी पड़ती है। इन पेड़ों को बचाने के लिए, पर्यावरण को बचाने के लिए शव संस्कार भट्टी का निर्माण किया जा रहा है। जिसके इस्तेमाल से हर अंतिम संस्कार पर एक पेड़ कटने से बच जाएगा।
उन्होंने बताया कि हमने करीब 10 वर्ष पहले सिरसा शहर के हुडा सेक्टर-19 की शिव पुरी में ऐसी दो भ_ियों का निर्माण करवाया था, जो सही तरीके से कार्य कर रही हैं। भविष्य में जो भी पंचायत इस विधि को अपनाने की इच्छुक होगी तो उसको तकनीकी व भरपूर आर्थिक सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने आमजन से अंतिम संस्कार में इस विधि को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि ऐसा करके पेड़ों की अंधाधुंध हो रही कटाई को रोकने में मदद साबित हो सकते हैं, वहीं पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा। इस मौके पर दलीप भुक्कर, सुभाष, रामचंद्र, सरदार जैल सिंह, भगवान, रामचंद्र, श्याम लाल, घनश्याम, देवेंद्र, गुरदीप सिंह, रामकुमार, सुनील, मोहन लाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
भट्ठी के बड़े फायदे, हर संस्कार पर बचेगा एक पेड़
समाजसेवी अमीर चावला ने बताया कि इस भ_ी में शव का अंतिम संस्कार करने का पर्यावरण के नजरीये से बड़ा फायदा है। इस विधि के इस्तेमाल से एक वर्ष में ही सैकड़ों पेड़ों को कटने से बचाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि भट्ठी के द्वारा भारी भरकम शव के संस्कार में मात्र 80 किलो लकड़ी की आवश्यकता पड़ेगी, जबकि साधारण तरीके से अंतिम संस्कार में साढ़े तीन क्विंटल से ज्यादा लकड़ी का इस्तेमाल होता है। वहीं यदि शव नॉर्मल वजन में है तो उसके अंतिम संस्कार में मात्र 60 किलोग्राम लकड़ी ही पर्याप्त है। यानि एक शव के अंतिम संस्कार पर एक पेड़ कटने से बच जाएगा।
