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विद्यार्थी, देश का भविष्य हैं, उनके लिए ये ध्यान रखना शिक्षण संस्थानों का दायित्व हैं

 जिससे देश विकसित बनें
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जिससे देश विकसित बनें

mahendra india news, new delhi
लेखक
नरेंद्र यादव
नेशनल वाटर अवॉर्डी
यूथ डेवलपमेंट मेंटर, एंड वॉलंटियर
ने कहा है कि देश के विद्यार्थी राष्ट्र के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं, क्या इसका विचार कोई राजनीतिक व्यक्ति अथवा ब्यूरोक्रेट या शिक्षण संस्थान के मुखिया करते हैं ? विद्यार्थियों के नाते तो देश का एक व्यक्ति भी ख्याल नही करता है, हां बच्चे होने के कारण मातापिता जरूर ध्यान करते हैं, उसमे भी कुछ पेरेंट्स ध्यान नही करते हैं। एक समय था जब भारत में गुरुकुल पद्धति होती थी तो उसमे पढ़ने वाले हर विद्यार्थी के भोजन की व्यवस्था वहीं पर होती थी और उस भोजन में सभी पोषक तत्व है इसका भी ख्याल रखा जाता था।

 आजकल तो जितने भी बच्चे अथवा युवा स्कूल, कॉलेज तथा विश्वविद्यालयों के हॉस्टल में रहते हैं और जितने भी विद्यार्थी कंपीटिटिव एग्जाम की तैयारी करने के लिए अपने गांव या अपना निवास स्थान छोड़ कर पी जी में रहते है, उनके भोजन का ध्यान कौन रखता हैं, इन बच्चों के मातापिता तो इनके साथ रहते नही है। अब कौन ख्याल करेंगे इनके भोजन और स्वास्थ्य का क्योंकि हर हॉस्टल तथा पी जी में तो पैसा लेने के बाद भी ढंग का खाना कोई देने के लिए तैयार नहीं हैं, इनको जो खाना दिया जाता है उसमें कितना प्रोटीन होता है, कितना आयरन होता है, कितना कैल्शियम होता है,कौन से विटामिंस होते है, कितना नमक होता है, कितना मीठा होता है,  इसका कौन ख्याल रखता हैं, 

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जो इंग्रेडियंट उस भोजन में है वो कितने शुद्ध है इसकी परख कौन करेगा, वह खाना विद्यार्थियों के लिए कितना लाभदायक है इसका भी तो कोई ध्यान करने वाला नही हैं। भारत में अगर किसी को अच्छा खाना मिलता है तो वो अपने घर में मातापिता द्वारा ही उपलब्ध कराया जाता हैं। बेटा बेटी के नाते ही पौष्टिक भोजन मिल सकता हैं, बाकी इसके अलावा यहां कोई रिश्ता नहीं है जो उनको अच्छा भोजन मिल सकें और विद्यार्थी के नाते तो ना ही स्कूल, कॉलेज के हॉस्टल में पौष्टिक खाना मिलता है और ना ही विश्वविद्यालयों के हॉस्टल में ही याददस्त को दुरुस्त करने वाला भोजन मिलता है और ना ही किसी पेइंग गेस्ट वाले हॉस्टल में भोजन अच्छा मिलता हैं। 

यहां तो पेइंग गेस्ट का नाम भी बदल कर बदनाम कर दिया है। पेइंग गेस्ट का अर्थ होता है जो व्यक्ति गेस्ट के रूप में किसी के घर में रहना और रहने तथा खाने के लिए पैसे भुगतान किए जाते है परंतु दुख की बात ये है कि पेइंग गेस्ट के नाम से लोग घर में अपने साथ तो नही रखते और अलग से हॉस्टल की तरह जगह बना लिए है, ना तो वो लोग, गेस्ट को अपने घर का खाना देते है ना ही अपने घर में  गेस्ट की तरह रखते हैं केवल नाम ही पेइंग गेस्ट है बाकी इंतजाम किसी कॉलेज अथवा विश्वविद्यालय के हॉस्टल से भी गया गुजरा होता है। 


क्या ये विद्यार्थी, बेचारे इस देश के नागरिक नही है, किसी भी हॉस्टल में फूड की गुणवत्ता देखने के लिए क्वालिटी कंट्रोल के लिए कोई इंचार्ज नही होता है। और पी जी के नाम से तो जितना गद्दर यहां मचा हुआ है, इतना तो कहीं नहीं हैं। पहली गलती तो ये है कि गेस्ट और वो भी पेइंग अर्थात पैसा देकर जो गेस्ट रहे, वो कैसा गेस्ट है। यहां तो पेइंग गेस्ट का नाम भी बदनाम करके, उन्हे घर में ना रख कर हॉस्टल अथवा होटल बना कर आमदनी करते है तथा राष्ट्र को टैक्स भी नही देते हैं। दूसरा गेस्ट के रहने के लिए कमरा इतना कंजेस्टेड की पैर रखने की भी जगह नहीं रहती है , इसके साथ ही विद्यार्थियों को खाना इतना घटिया देते है कि बच्चे बार बार बीमार होते हैं। किसी को चिंता ही नही ,देश के इन विद्यार्थियों की। 


ना किसी शिक्षण संस्थान के मुखिया को  उनके भोजन की चिंता हैं, ना ही कोई अधिकारी इन पी जी को जांचने की फुरसत है क्योंकि इन में कोई इन अधिकारियों के बच्चे थोड़े ही रहते हैं हालाकि किसी कॉलेज अथवा विश्वविद्यालयों के हॉस्टल में उनके बच्चों को भी वैसा ही खाना मिलता होगा और अगर वो पी जी में रहते होंगे तो उन्हे भी ऐसा ही बिना पौष्टिकता का खाना मिलता होगा। मैं इस लेख माध्यम सभी शिक्षण संस्थानों तथा पी जी मालिको को अपील करना चाहता हूं कि आप सभी आपके संस्थानों के हॉस्टल तथा पी जी वाले, 

अपने यहां रहने वाले बच्चों के लिए पांच दायित्व राष्ट्र हित में जरूर निभाएं, जिससे देश विकसित बनें।
1. सभी विद्यार्थियों के भोजन की पौष्टिकता तथा हाइजीन का ध्यान खुद करें क्योंकि वो सभी राष्ट्र के बच्चें हैं।
2. उन सभी बच्चों को बुलिंग से बचाने की व्यवस्था करें।
3. उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना अति आवश्यक हैं।
4. उनको नैतिक रूप से सशक्त करना भी सभी शिक्षण संस्थानों तथा पी जी मालिको का दायित्व हैं।


5. सभी विद्यार्थियों को गलत तथा फास्ट फूड से बचाने की जिम्मेदारी भी शिक्षण संस्थानों तथा पी जी मालिको का ही दायित्व है क्योंकि आप ही उस समय के लिए उनके अभिभावक होते हैं।
     प्रिय देश वासियों , हर विद्यार्थी का जीवन राष्ट्र के उत्थान के लिए है, इसी को ख्याल में रखते हुए सभी अपने दायित्वों का निर्वाह करें ताकि देश को सशक्त और स्वस्थ नागरिक मिल सकें।
जय हिंद , वंदे मातरम