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कृषि क्षेत्र में सब्सिडीज कम करने के लिए डब्ल्यूटीओ के दबाव में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) कर रहा है काम: औलख

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The Commission for Agricultural Costs and Prices (CACP) is working under pressure from the WTO to reduce subsidies in the agricultural sector: Aulakh

mahendra india news, new delhi
बीकेई प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह ने अपने कार्यालय से ब्यान जारी करते हुए कहा कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने सरकार को सलाह दी है कि यूरिया में सब्सिडी कम करके कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी की जाए। औलख ने कहा कि भारत सरकार पर अमेरिका का दबाव है कि कृषि क्षेत्र में सब्सिडी कम की जाए, जबकि अमेरिका सरकार अपने देश में किसानों को बहुत ज्यादा सब्सिडी दे रही है।

india के कृषि क्षेत्र में सब्सिडीज कम करने के लिए डब्ल्यूटीओ के दबाव में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) किसान विरोधी फरमान जारी कर रहा है। औलख ने कहा कि भारत में यूरिया उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। 2015-16 में उत्पादन 24.5 मिलियन टन था, जो 2023-24 में 31.4 मिलियन टन तक पहुंच गया। 2024-25 में उत्पादन थोड़ी कमी के साथ 30.6 मिलियन टन रहा। आयात भी कम हुआ है, 2015-16 में 8.5 मिलियन टन यूरिया आयात हुआ था, जो 2024-25 में घटकर 5.6 मिलियन टन रह गया। इससे कुल खपत में आयात का हिस्सा 27.7 फीसदी से घटकर 14.6 फीसदी हो गया और आत्मनिर्भरता बढ़ी। ऐसे समय में किसानों पर आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है। सीएसीपी का कहना है कि यूरिया के रेट बढऩे से इसकी लागत कम हो जाएगी और अत्यधिक नाइट्रोजन से जमीन भी खराब नहीं होगी, लेकिन यह बिल्कुल आधारहीन तथ्य है। नरमे का एमएसपी 7710 रुपए और 8110 रुपए है, लेकिन मंडियों में 5000 से लेकर 6500 प्रति क्विंटल बिक रहा है। किसानों की लूट हो रही है। इसी तरह धान भी 300 से 400 रुपए प्रति क्विंटल एमएसपी से नीचे बिक रहा है। फसलों के दाम सही न मिलने की वजह से व सरकारों की गलत नीतियों के कारण किसान की आर्थिक हालत दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। इस साल भारी बरसात, जल भराव, सेम व बाढ़ से जान माल का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। इसलिए हम भारत सरकार से अपील करते हैं कि यूरिया के रेटों में वृद्धि करके किसानों पर अनावश्यक बोझ ना डाला जाए।