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जनता के पैसे से खड़े किए गए रोडवेज विभाग का निजीकरण कर साहूकारों को सौंपना चाहती है सरकार: चाहर

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The government wants to privatize the Roadways department—built with public money—and hand it over to moneylenders: Chahar

mahendra india news, new delhi

हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन सम्बन्ध सर्व कर्मचारी संघ के आह्वान पर रोडवेज कर्मचारियों ने दो घंटे रोडवेज परिसर में प्रदर्शन किया और इसके बाद महाप्रबंधक को एक ज्ञापन सौंपा। पृथ्वी सिंह चाहर प्रदेश प्रवक्ता व सिरसा डिपो प्रधान व कर्मचारी नेता ने बताया कि परिवहन परिवहन मंत्री से 16 जून 2026 को वार्ता में परिवहन मंत्री ने स्वयं घोषणा की थी की रोडवेज के बेड़े में 500 बसें और खरीदी जाएंगी और कर्मचारियों के कई मांगों पर सहमति जताते हुए 40 दिन में दोबारा मीटिंग करने का आश्वासन दिया था, परंतु अचानक सरकार को क्या हो गया की हरियाणा में रोडवेज बेड़े में सरकारी बसें ना बढ़ाकर प्राइवेट परमिट देने शुरू कर दिए।

इससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी के चलते नेताओं ने सरकार से मांग की कि प्राइवेट परमिट व प्राइवेट इलैक्ट्रिक बसें 62 रुपए 37 पैसे पर किलोमीटर के हिसाब से चलाने का निर्णय व 362 रूटों पर 3648 पर प्राइवेट परमिटों के फैसले को रद्द कर विभाग में 10000 नई बसें शामिल कर 60000 बेरोजगारों को रोजगार दिया जाए। पृथ्वी सिंह चाहर ने कहा एक इलेक्ट्रॉनिक बस के बदले साधारण 6 बसें आती है, जो पूरे हरियाणा प्रदेश में सभी डिपो में 50-50 बसें लेने का जो निर्णय है अगर उसकी जगह पर साधारण 300 /300 बसें डिपो के बेड़े में शामिल हो तो हरियाणा प्रदेश में लगभग 7200 से अधिक बसें उपलब्ध होगी। एक बस पर 6 बेरोजगारों को रोजगार मिलता है।

इस प्रकार सरकारी बसों पर 43200 बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा और जनता को बेहतर सेवा मिलेगी अगर इलेक्ट्रिक बस यही सरकार चलाना चाहती है तो सरकार खुद सरकारी बसें खरीद कर रोडवेज के बेड़े में शामिल करें। कर्मचारी नेताओं बताया कि परिवहन मंत्री से बातचीत में जो मांगे मानी गई थी उनको तुरंत लागू करें। राज्य प्रधान नरेन्द्र दिनोद व महासचिव सुमेर सिवाच ने कहा आंदोलन तेज करने की कड़ी में आज सभी डिपो पर 10 से 12 बजे तक विरोध प्रदर्शन करते हुए परिवहन मंत्री हरियाणा सरकार एवं परिवहन आयुक्त को आंदोलन का ज्ञापन भेजा गया है।

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अगर उसके बाद भी सरकार बातचीत के माध्यम से समस्याओं का समाधान नहीं करती तो हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन जल्द ही मीटिंग बुलाकर निर्णायक आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी। कर्मचारी नेताओं ने मांग और मुद्दा रखते हुए बात की हरियाणा रोडवेज के सभी कर्मचारियों के वेतनमान स्वतंत्र आयोग का गठन करते हुए चालक-परिचालक लिपिक और अन्य कर्मचारियों के वेतन की विसंगति दूर की जाए। बकाया बोनस का भुगतान किया जाए। खाली पदों पर प्रमोशन की जाए। 2016 के चालकों सहित सभी कच्चे कर्मचारियों को कोर्ट के निर्णय अनुसार पक्का किया जाए।

देय अर्जित अवकाश में की गई कटौती को बहाल किया जाए। बकाया रात्रि ठहराव का भुगतान किया जाए और टाइम पॉलिसी को खोला जाए, 10 साल से पेंडिंग बोनस का भुगतान किया जाए। कोर्ट के निर्णय अनुसार 2006 से पहले नियुक्त किए गए कर्मचारियों को पुरानी पेंशन में शामिल किया। जाए पुरानी पेंशन बाल की जाए। विभाग में खाली पदों पर तुरंत पक्की भर्ती की जाए। प्राइवेट परमिट रद्द कर रोडवेज के बेड़े में सरकारी बसें शामिल की जाए। जनता को पहले से दी गई सुविधाएं जैसे छात्र-छात्राओं का रोडवेज के स्टाफ को प्राइवेट बसों में बेज्जती करके उतर जाता है

रोडवेज द्वारा दी जा रही 47 श्रेणियों को सब्सिडी नहीं मिली तो यह बसें आम जनता के किस काम की अगर रोडवेज के बेड़े में साधारण बसें लाई जाती है तो हरियाणा के प्रत्येक गांव में साधारण किसान, मजदूर के बच्चे छात्र-छात्राओं को आसान परिवहन सेवाएं उपलब्ध होती है। आम जनता को प्राइवेट संसाधनों में बैठकर जान नहीं गवानी पड़ेगी। निजीकरण की नीतियों को बंद करें। कर्मचारियों की मांगों का जल्द से जल्द बातचीत के माध्यम से निपटारा करें अन्यथा आंदोलन को तेज करने पर मजबूर होंगे। जिसकी जिम्मेवारी हरियाणा सरकार और प्रशासन की होगी। उन्होंने मांग की समय रहते उपरोक्त में लिए गए निजीकरण के फैसले को वापस करें। इस मौके पर सुशील ईकश, जयकुमार दहिया, महिपाल सोढे, राजेश बेरला, विरेन्द्र, सतबीर मुंढाल सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित थे।
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