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हिंद दी चादर गुरु तेग बहादुर जी का जीवन धर्म परायणता, साहस, मानवता और न्याय हेतु वंदनीय है: स्वामी विज्ञानानंद

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The life of Guru Tegh Bahadur Ji is revered for his devotion to religion, courage, humanity and justice: Swami Vigyanananda

mahendra india news, new delhi
सिरसा। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा सुलतानपुरिया में नौवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस को समर्पित सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम की शुरुआत पवित्र गुरबानी शब्द साधन हेति इति जिन करी... सीसु दियां पर सी ना उचरी से हुई।

The life of Guru Tegh Bahadur Ji is revered for his devotion to religion, courage, humanity and justice: Swami Vigyanananda

कार्यक्रम के दौरान प्रवचन देते हुए दिव्य गुरु आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि शहादत की महान परंपरा पंजाब के इतिहास की शान है। पंजाब की धरती अनगिनत कुर्बानियों और शहादतों की गवाह रही है। इस धरती पर धर्म और सत्य की नींव रखने के लिए महापुरुषों को जंजीरों में जकड़ा गया। पीडि़त दबे-कुचले लोगों के आंसू पोंछने के लिए उन्हें चीरा गया, रामबियों से उनकी खोपडिय़ां काटी गई। पंजाब का इतिहास ऐसी अनगिनत गाथाओं को अपने सीने में समेटे हुए है।

प्रवचनों के दौरान स्वामी जी ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी वह महान शक्ति हैं, जिन्होंने मानवता की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया। गुरु तेग बहादुर जी का जीवन साहस, मानवता, धार्मिक समानता और न्याय का प्रतीक है। उन्होंने धर्म की रक्षा और मानवाधिकारों के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। उनकी शहादत आज भी हमें प्रेरित करती है और हमें एक न्यायपूर्ण, शांतिपूर्ण और समतामूलक समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करती है।

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जब श्री गुरु तेग बहादुर जी गुरु गद्दी पर बैठे, उस समय अत्याचारी शासक औरंगजेब का जुलम सिर चढक़र बोल रहा था। इस अत्याचारी और अज्ञानी बादशाह के जीवन का एकमात्र उद्देश्य भारत के लोगों को अपने पैरों तले रुलाना और उन्हें जबरदस्ती इस्लाम में परिवर्तित करना था। इसलिए, उसने हिंदुओं पर अत्याचार शुरू कर दिए और मंदिरों और ठाकुर द्वारों को तोडऩा शुरू कर दिया। दिल्ली में, हिंदुओं को यमुना नदी के किनारे अंतिम संस्कार करने पर रोक लगा दी गई। हिंदुओं को घोड़े और हाथी की सवारी करने से मना किया गया। यह हिंदुओं के धार्मिक रीति.रिवाजों पर उसका सीधा हमला था। उसने हिंदुओं के आत्म-सम्मान को पूरी तरह से नष्ट करने की कोशिश की।

इसके पीछे एकमात्र उद्देश्य यह था कि हिंदू राष्ट्र तंग आकर इस्लाम स्वीकार कर ले। इतिहास बताता है कि उस समय कश्मीरी पंडित श्री गुरु तेग बहादुर महाराज जी के पास शिकायत लेकर गए थे और श्री गुरु तेग बहादुर महाराज जी ने धर्म की रक्षा के लिए अपनी जान दे दी। धर्म को बहुत कम लोग जानते हैं। गुरु पातशाह जी ने मानवता को धर्म का ज्ञान कराया। अंत में उन्होंने कहा कि दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ऐसे महापुरुषों की शहादत को नमन करता है। कार्यक्रम के दौरान साध्वी विष्णु अर्चना भारती और साध्वी नेहा भारती ने गुरबानी शबद कीर्तन का गायन किया।