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52 गांवों की तहसील खुद बेहाल, पीने के पानी का भी नहीं प्रबंध, तीन साल से तहसीलदार और नायब तहसीलदार के पद खाली

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The tehsil comprising 52 villages is itself in a dire state; there are no arrangements even for drinking water, and the posts of Tehsildar and Naib Tehsildar have been vacant for three years

mahendra india news, new delhi
नाथूसरी चौपटा क्षेत्र के 52 गांवों की लाखों आबादी वाली नाथूसरी चौपटा तहसील में अव्यवस्था नजर आ रही है। कार्यालय में पीने का पानी नहीं है। जिससे लोग पानी के लिए भटकते हुए नजर आते हैं। इसी के साथ ही पिछले तीन वर्षों से स्थायी तहसीलदार और नायब तहसीलदार के बिना चल रही है। वर्तमान में अतिरिक्त प्रभार के आधार पर अधिकारी नियुक्त हैं, लेकिन लोगों का आरोप है कि अधिकारी नियमित रूप से तहसील नहीं पहुंचते, जिससे आम जनता को अपने कार्य करवाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

तहसील में तकसीम और गिरदावरी से जुड़े करीब 250 मामले लंबित पड़े हैं। इन मामलों में किसानों और अन्य लोगों को महीनों से फैसले का इंतजार करना पड़ रहा है।

स्थिति केवल अधिकारियों की कमी तक सीमित नहीं है। पिछले साढ़े तीन वर्षों तक पूरे चौपटा क्षेत्र के 52 गांवों का काम केवल छह पटवारियों के भरोसे चलता रहा। अधिक कार्यभार के कारण कर्मचारियों पर लगातार दबाव बना रहा। अब नई भर्ती के बाद पटवारियों की संख्या बढक़र 20 हो गई है, लेकिन क्षेत्र की आवश्यकता करीब 47 पटवारियों की बताई जा रही है। यानी आज भी लगभग 27 पटवारियों की कमी बनी हुई है। कई पटवारियों के पास तीन से पांच गांवों तक का अतिरिक्त कार्यभार है।

वर्तमान में चौपटा तहसील का अतिरिक्त प्रभार तहसीलदार रविंद्र मलिक के पास है। उनके जिम्मे पहले से ऐलनाबाद और डबवाली तहसीलों का कार्यभार भी है। ऐसे में चौपटा तहसील को पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा, जिससे लोगों के काम प्रभावित हो रहे हैं।

नहीं उचित प्रबंध 
तहसील परिसर में मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। लोगों के लिए साफ शौचालय और पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। कर्मचारी अपने स्तर पर पानी की व्यवस्था कर लेते हैं, लेकिन आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।

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स्थानीय लोगों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि नाथूसरी चौपटा तहसील में जल्द स्थायी तहसीलदार और नायब तहसीलदार की नियुक्ति की जाए, पटवारियों के खाली पद भरे जाएं तथा तहसील परिसर में पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि 52 गांवों के लोगों को राहत मिल सके।