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डा. इंद्र गोयल की पुस्तक मौन साधना: एक अद्वितीय अनुभव का कुलगुरु ने किया विमोचन

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The Vice Chancellor released Dr. Indra Goyal's book, Silent Sadhana: A Unique Experience

mahendra india news, new delhi
 अखिल भारतीय सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. इंद्र गोयल द्वारा रचित आध्यात्मिक चेतना, आत्मअनुभूति और आंतरिक शांति का संदेश देने वाली पुस्तक मौन साधना : एक अद्वितीय अनुभव का भव्य विमोचन समारोह आज अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। समारोह में विद्वानों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विजय कुमार थे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता जेसीडी विद्यापीठ के महानिदेशक डॉ. जयप्रकाश ने की।

अति विशिष्ट अतिथि के रूप में स्कॉलर हेवन स्कूल, सिकंदरपुर की निदेशक डॉ. अंजु शर्मा उपस्थित रहीं। विशिष्ट अतिथियों में बार एसोसिएशन सिरसा के प्रधान गंगाराम ढाका तथा सिरसा क्लब के सचिव राजेश गोयल शामिल रहे। अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि डॉ. विजय कुमार ने कहा कि वर्तमान तनावपूर्ण और भागदौड़ भरे जीवन में मौन साधना अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने इस पुस्तक को समाज के लिए मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि यह व्यक्ति को आत्मचिंतन और मानसिक संतुलन की दिशा में प्रेरित करती है। अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. जयप्रकाश ने कहा कि मौन केवल शब्दों का अभाव नहीं, बल्कि आत्मा की गहराइयों से संवाद का माध्यम है और यह पुस्तक उसी अनुभूति को सरल भाषा में प्रस्तुत करती है।

अति विशिष्ट अतिथि डॉ. अंजु शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों और युवाओं के लिए भी मौन साधना अत्यंत उपयोगी है, क्योंकि यह एकाग्रता, आत्मविश्वास और भावनात्मक संतुलन को विकसित करती है। विशिष्ट अतिथि गंगाराम ढाका ने पुस्तक को आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन के लिए प्रेरक बताया, जबकि राजेश गोयल ने इसे आत्मशांति की खोज में लगे प्रत्येक व्यक्ति के लिए उपयोगी ग्रंथ बताया। पुस्तक के लेखक अखिल भारतीय सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. इंद्र गोयल ने अपने विस्तृत वक्तव्य में बताया कि यह पुस्तक उनके व्यक्तिगत साधना-अनुभवों का सार है। उन्होंने कहा कि मौन साधना केवल बोलना बंद करना नहीं, बल्कि विचारों की शुद्धि, आत्मदर्शन और आंतरिक ऊर्जा के जागरण की प्रक्रिया है।

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उन्होंने अपने साधना काल के अनेक प्रेरक प्रसंग भी साझा किए, जिनसे उपस्थित श्रोतागण भावविभोर हो उठे। उन्होंने अपने संकल्प को संकल्पित करने पर भी विस्तार से बताया। पुस्तक की विवेचना प्रमुख साहित्यकार एवं टीकाकार डॉ. राजकुमार निजात ने की। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक आध्यात्मिक साहित्य में एक महत्वपूर्ण योगदान है, जो साधना को दार्शनिक जटिलता से मुक्त कर सहज और व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत करती है। उनके अनुसार यह पुस्तक पाठक को आत्मसंवाद की दिशा में ले जाती है और जीवन को सकारात्मक दृष्टि प्रदान करती है। कार्यक्रम के दौरान मुकेश वर्मा, प्रमोद सचदेवा, राजिंदर गर्ग, मोहिंदर बंसल, विनोद धवन,

राजिंदर सपरा, मोहिंदर सेतिया, अशोक खेत्रपाल, रमेश साहुवाला, राजेश शर्मा, साधना पंकज, शारदा गुप्ता, कांता बंसल, ब्रश कांता, अंजना गोयल, जसवीर कौर, प्रेमलता, हेमा, संतोष, तृप्ता तथा डॉ. राधा गोयल ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए पुस्तक की सराहना की और इसे समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायक बताया। वक्ताओं ने कहा कि मौन केवल बोलने का अभाव नहीं, बल्कि आत्मा की भाषा है, जिसके माध्यम से व्यक्ति स्वयं को और परमात्मा को अनुभव कर सकता है। कार्यक्रम का प्रभावशाली एवं सुगठित संचालन अमित लढ़ा ने किया, जिन्होंने पूरे समारोह को गरिमामय और रोचक बनाए रखा।
एडवोकेट मोहनलाल अरोड़ा ने समारोह के अंत में सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया तथा उपस्थित जनों ने पुस्तक को अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक बताते हुए लेखक को बधाई दी।