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कसूर किसका, टेल पर पडऩे वाले गांवों को नहीं पीने का पानी, दो दशक से चल रहा था अवैध मोगियों का खेल

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Who is to blame? Villages at the tail-end lack drinking water; the racket of illegal *moghas* (unauthorized outlets) had been going on for two decades

mahendra india news, new delhi
सर्दी हो गया गर्मी टेल पर पडऩे वाले गांवों के ग्रामीणों को पीने का पानी नहीं पहुंचता है। पीने का पानी ग्रामीण खरीदकर पीते हैं। यह भी नहीं कि टेल पर पडऩे वाले गांवों तक नहरें व माइनर नहीं हैं। टेल पर पडऩे वाले गांवों में पीने का पानी नहीं पहुंचने का खेल पिछले दो दशक से चल रहा है। इससे हरियाणा ही राजस्थान के ग्रामीण भी दुख्खी है। क्योंकि नाथूसरी चौपटा क्षेत्र से गुजरने वाली नोहर नहर फीडर राजस्थान को जाती है। इसी के साथ ही नाथूसरी चौपटा क्षेत्र में वरूवाली नहर, नोहर फीडर नहर, कुताना माइनरख् व अन्य माइनर गुजरती है। 


अब हुआ खुलासा, मिलीभगती से चल रहा था खेल 
सिंचाई विभाग के अधिकारियों की जिम्मेवारी नहरों पर पानी रोकने की होती है। मगर यहां पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों से मिलीभगती से खेल चल रहा था। क्योंकि नहरों व माइनरों में अवैध रूप से मोगियां बनी हुई है। जिनसे लंबे समय से चोरी की जा रही थी। यह आज की नहीं बनी है। बल्कि लंबे समय से बनी हुई हैं। सबके मन में एक ही सवाल उठता है कि आखिर सिंख्चाई विभाग के अधिकारी आंखेमुंद ही सब कुछ देख रहे थे। 

धरना पर मिला आश्वासन 
गांव जमाल के ग्रामीण ने टेल पर पानी नहीं पहुंचने पर धरना दिया। धरना स्थल पर 6 दिन के बाद सिंचाई विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। इसके बाद ग्रामीणों ने अवैध मोगियों व प्लास्टिक के पाइप से पानी चोरी होने की बात कही। इसके बाद ग्रामीणों ने कहा कि जब तक मोगियों को नहीं तोड़ा जाएगा। धरना जारी रहेगा। इसके बाद अधिकारियों ने 20 दिन का समय मांगा। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने मंगलवार व बुधवार को अनेक जगह पर अवैध मोगियों को तोडऩे का कार्य शुरू किया है। अब फिर एक सवाल लोगों के मन में उठ रहा है कि अवैध मोगियों के बारे में अधिकारियों को अब पता चला है। प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी बार बार कहते हैं कि हर घर मेें जल पहुंचेगा। अगर ऐसे ही अवैध तरीके से पानी की चोरी होती रही तो पानी टेल के गांवों में कैसे पहुंचेगा। 

 

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