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सफाई व अग्निशमन कर्मियों की हड़ताल पर मुख्यमंत्री चुप क्यों: चाहर

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Why is the Chief Minister silent on the sanitation and fire personnel strike? – Chahar

mahendra india news, new delhi
अखिल भारतीय किसान सभा ने नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के साथ 13 मई को हुए समझौते को लागू नहीं करने तथा हड़ताली सफाई एवं अग्निशमन कर्मचारियों की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है। किसान सभा के राज्य कमेटी सदस्य सरबत सिंह पूनिया ने कहा कि सफाई कर्मचारी प्रतिदिन सुबह उठकर शहरों और कस्बों को स्वच्छ बनाते हैं। सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर इन कर्मचारियों के प्रति प्रदेश सरकार का कथित उपेक्षापूर्ण रवैया समझ से परे है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार 13 मई के समझौते को लागू करके हड़ताल समाप्त कराने के बजाय पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियों का सहारा ले रही है। विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में हड़ताली कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं।


दमन से नहीं, समाधान से समाप्त होगी हड़ताल: चाहर
पृथ्वी सिंह चाहर प्रदेश प्रवक्ता व सिरसा डिपो प्रधान व कर्मचारी नेता ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी हड़ताल के बावजूद मुख्यमंत्री चुप क्यों हैं? चाहर ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि दमनात्मक कार्रवाई से आंदोलन नहीं रुकेगा। कर्मचारियों की मांगों का समाधान होने पर ही हड़ताल समाप्त हो सकती है। इस तरह के कदमों से परिस्थतियां और बिगड़ेंगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि हड़ताल के कारण शहरों और कस्बों में कूड़े के ढेर लगे हुए हैं तथा बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ रहा है। इसके बावजूद सरकार समस्या के समाधान के प्रति गंभीर दिखाई नहीं दे रही।  


ठेका प्रथा समाप्त करने की मांग:
किसान नेता ने कहा कि पिछले 10 से 15 वर्षों से ठेके पर कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने और कथित भ्रष्टाचार एवं शोषण पर आधारित ठेका प्रथा समाप्त करने में कोई बड़ी कानूनी अड़चन नहीं है। इसके लिए सरकार को दृढ़ इच्छाशक्ति दिखानी होगी। उन्होंने कहा कि सरकार को आशंका है कि स्थानीय निकाय और अग्निशमन विभाग के ठेका कर्मचारियों को नियमित करने पर दूसरे विभागों के संविदा कर्मचारियों की मांग भी तेज होगी। इसी कारण मामले को लटकाया जा रहा है। पूनिया ने सरकार से बातचीत के माध्यम से सफाई और अग्निशमन कर्मचारियों की मांगों का शीघ्र समाधान करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर किसान सभा और अन्य जनसंगठन सीधे तौर पर आंदोलन में शामिल होंगे।

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