भारतीय रसायन विज्ञान के जनक एवं बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स के संस्थापक आचार्य प्रफुल्ल चंद्र रे की जयंती के उपलक्ष्य में कार्यशाला का आयोजन
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चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के रसायन विज्ञान विभाग तथा विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वाधान में गुरुवार को भारतीय रसायन विज्ञान के जनक एवं बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स के संस्थापक आचार्य प्रफुल्ल चंद्र रे की जयंती के उपलक्ष्य में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को आचार्य पी.सी. रे के वैज्ञानिक योगदान, स्वदेशी आंदोलन में उनकी भूमिका तथा राष्ट्र निर्माण के प्रति उनके दृष्टिकोण से परिचित कराना था। कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट तथा विभिन्न महाविद्यालयों के लगभग 200 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यशाला के उद्धघाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए सीडीएलयू के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने कहा कि आचार्य पी.सी. रे केवल महान वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी राष्ट्रनिर्माता भी थे। उन्होंने विज्ञान को समाज और राष्ट्र की सेवा का माध्यम बनाया तथा स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को दशकों पहले साकार किया। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थियों को अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ते हुए विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने तथा अनुसंधान संस्कृति को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय ज्ञान परंपरा तथा नवीनतम तकनीक के बीच सामंजस्य स्थापित करते हुए अधिगम की प्रक्रिया को निरंतर जारी रखने की अपील की।
इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज के रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. राजीव सिंह ने बतौर मुख्य वक्ता बोलते हुए कहा कि भारतीय विज्ञान एवं स्वदेशी आंदोलन में आचार्य पी.सी. रे का अहम योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि आचार्य रे ने भारतीय रसायन विज्ञान को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ स्वदेशी उद्योगों की स्थापना के माध्यम से वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव रखी। उन्होंने विद्यार्थियों को विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार एवं उद्यमिता को अपनाने के लिए प्रेरित किया और कहा कि वैज्ञानिक ज्ञान का उद्देश्य समाज और राष्ट्र की प्रगति होना चाहिए।
इस कार्यशाला की संयोजक एवं रसायन विज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. गीता रानी ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक चेतना, नवाचार और अनुसंधान के प्रति रुचि विकसित करना तथा उन्हें भारत के महान वैज्ञानिकों के योगदान से अवगत कराना है। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर विजय कुमार के दिशा निर्देशन में इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है। कार्यशाला को सफल बनाने में विभाग के प्राध्यापक डॉ सुरेश, डॉ नीलम, डॉ सुमन, डॉ मोनिका, दीपिका, रविता ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर प्रो. राजबीर दलाल, डॉ अमित सांगवान, डॉ. जसबीर सिंह भारत, डॉ. राजपाल वर्मा, राजवीर आदि उपस्थित थे।
कार्यशाला के अंतर्गत आयोजित विज्ञान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में सीएमआरजे कॉलेज, ऐलनाबाद की टीम पहले स्थान पर, गवर्नमेंट कॉलेज, भोड़िया खेड़ा की टीम दूसरे स्थान पर तथा सीडीएलयू के रसायन विज्ञान विभाग की टीम ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। पोस्टर प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने रसायन विज्ञान एवं भारतीय वैज्ञानिकों पर आधारित आकर्षक पोस्टर प्रस्तुत किए। इसमें मनीषा प्रथम, रितिका द्वितीय तथा सविता तृतीय स्थान पर रहीं। इसी प्रकार स्लोगन लेखन प्रतियोगिता में परीक्षा ने प्रथम, अनुज ने द्वितीय तथा भूमिका ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
