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शारदीय नवरात्रों का 7वां दिन : आज होगी मां कालरात्रि की पूजा, लगाएं गुड़ का भोग, जानें पूजा विधि

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शारदीय नवरात्रों को आज सातवां दिन है। सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा जाएगी। मां कालरात्रि दुर्गा मां का सातवां रुप हैं। मां कालरात्रि की पूजा करने से भक्तों की जिंदगी से सभी प्रकार के दुख दर्द मिट जाते हैं। जिंदगी में सुख समृद्धि और खुशहाली आती है। इसी के साथ नकारात्मक शक्तियों से छुटकारा भी मिल जाता है। ऐसा कहा जाता है कि साधक की जिंदगी से सभी प्रकार के दुख दर्द मिट जाते हैं और जिंदगी में सुख समृद्धि बनी रहती है। साथ ही मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

मां कालरात्रि का स्वरुप
ज्योतिषचार्य पंडित नीरज शर्मा ने बताया कि मां देवी भागवत पुराण के अनुसार, मां कालरात्रि का रंग श्यामल है। माता के विशाल केश चारों दिशाओं में फैले हुए हैं। मां कालरात्रि की चार भुजा हैं और तीन नेत्र हैं। यह मां कालरात्री देवी भोलेनाथ के अर्ध्दनारीशवर रुप को दर्शाता है। कालरात्रि मां की चार भुजाओं में खड्ग और गले में माला सुशोत्रित है। उनकी आंखों से अग्नि की वर्षा होती है। देवी के हाथों में वर मुद्रा है। उनके एक हाथ के नीचे अभय मुद्रा में है।

मां कालरात्रि की पूजा विधि
ज्योतिषचार्य पंडित नीरज शर्मा ने बताया कि नवरात्रि के सातवें दिन सुबह में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और फिर चौकी और मंदिर पर गंगाजल छिडक़ लें।
अब एक लकड़ी की चौकी पर लाल कंबल का आसन बिछाएं और उस मां कालरात्रि की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद, आसपास गंगाजल छिडक़ दें।
मां के सामने घी का दीपक जलाएं और अक्षत, रोली व गुड़हल के फूल उन्हें अर्पित करें। अग्यारी करने के लिए लौंग, बताशे, गुग्गल, हवन सामग्री आदि जरुर अर्पित करें।
इसके बाद परिवार के साथ माता के जयकारे लगाएं। अतं में सभी को प्रसाद दें।
शाम को मां की आरती के बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

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मां कालरात्रि की आरती

कालरात्रि जय-जय-महाकाली,

काल के मुह से बचाने वाली।

दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा,

महाचंडी तेरा अवतार।

पृथ्वी और आकाश पे सारा,

महाकाली है तेरा पसारा।

खडग खप्पर रखने वाली,

दुष्टों का लहू चखने वाली।

कलकत्ता स्थान तुम्हारा,

सब जगह देखूं तेरा नजारा।

सभी देवता सब नर-नारी,

गावें स्तुति सभी तुम्हारी।

रक्तदंता और अन्नपूर्णा,

कृपा करे तो कोई भी दुःख ना।

ना कोई चिंता रहे बीमारी,

ना कोई गम ना संकट भारी।

उस पर कभी कष्ट ना आवें,

महाकाली मां जिसे बचाबे।

तू भी भक्त प्रेम से कह,

कालरात्रि मां तेरी जय।